जींद पुलिस ने नाबालिग को अवैध हिरासत में रखा:पिता हाईकोर्ट पहुंचे, वारंट अफसर के आने से पहले घर के बाहर छोड़ा

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जींद पुलिस पर एक नाबालिग को अवैध हिरासत में रखने और प्रताड़ित करने का गंभीर आरोप लगा है। यह मामला पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट तक पहुंच गया है, जिसके बाद पुलिस ने वारंट अफसर के पहुंचने से पहले ही नाबालिग को छोड़ दिया। जोगेंद्र नगर निवासी महेश कुमार ने बताया कि 30 दिसंबर की सुबह सीआईए की टीम ने उनके बेटे को जोगेंद्र नगर से उठाया था। आरोप है कि टीम नाबालिग को जुलाना एवीटी थाने ले गई, जहां उसके साथ मारपीट की गई और उसे प्रताड़ित किया गया। महेश कुमार का आरोप है कि हेड कांस्टेबल जितेंद्र कुमार ने उन्हें बार-बार फोन कर थाने बुलाने का दबाव बनाया। इसके बाद उन्होंने वकील राकेश मलिक से संपर्क किया और पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर की। हाईकोर्ट से कार्रवाई की भनक लगते ही पुलिस ने देर रात नाबालिग को उसके घर के बाहर छोड़ दिया। बच्चे की खराब हालत के कारण उसे सिविल अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। कोर्ट ने जांच के लिए अफसर भेजा मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने अजय कुमार को वारंट अफसर नियुक्त कर जांच के लिए जुलाना भेजा। वारंट अफसर अजय कुमार बच्चे के साथ थाने पहुंचे। जांच के दौरान मौके पर एक संतरी और सचिन कुमार नामक युवक मिला, जो उस सरकारी गाड़ी का चालक था जिससे नाबालिग को उठाया गया था। जिस कमरे में नाबालिग को अवैध रूप से रखा गया और मारपीट की गई, उसकी भी पहचान करवाई गई। जांच अफसर को रोजनामचा (आधिकारिक रजिस्टर) में 27 दिसंबर के बाद की कोई एंट्री दर्ज नहीं मिली। ड्यूटी इंचार्ज का बयान दर्ज जांच अफसर ने ड्यूटी इंचार्ज को मौके पर बुलाकर बयान दर्ज किए। परिजनों ने दोषी पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और पूरे मामले की न्यायिक जांच कराने की मांग की है। उन्होंने नाबालिग को सुरक्षा प्रदान करने के साथ-साथ संबंधित थाना और सीआईए यूनिट के अधिकारियों को निलंबित करने की भी मांग उठाई है। जींद के एसपी कुलदीप सिंह ने इस मामले पर कहा कि यह उनके संज्ञान में आया है। उन्होंने आश्वासन दिया कि पुलिस जांच में सहयोग करेगी और यदि कोई भी कर्मचारी दोषी पाया गया तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।