झज्जर में बच्ची के रेपिस्ट-हत्यारे की फांसी की सजा रद:हाईकोर्ट बोला- ट्रायल में फोरेंसिक तथ्य छिपाए; सजा पर नए सिरे से होगी सुनवाई

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पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट ने हरियाणा के झज्जर में 5 वर्षीय मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म और उसकी हत्या के सनसनीखेज मामले में एक बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट द्वारा दोषी विनोद उर्फ मुन्ना को सुनाई गई मौत (फांसी) की सजा को रद्द कर दिया है। जस्टिस अनूप चितकारा और जस्टिस सुखविंदर कौर की खंडपीठ ने मामले में प्रक्रियात्मक खामियां पाते हुए इसे दोबारा ट्रायल के लिए भेजने का निर्णय लिया है। ट्रायल में ‘अन्याय’: जानें क्यों रद्द हुई सजा? हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान पाया कि झज्जर की कोर्ट में ट्रायल के समय आरोपी के साथ न्याय नहीं हुआ। हाईकोर्ट ने ऑर्डर में कहा है कि… आरोपी के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा भी हो पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के जस्टिस अनूप चितकारा और जस्टिस सुखविंदर कौर की खंडपीठ ने फैसला सुनाते हुए कहा कि- “पीड़िता और उसके परिवार को न्याय दिलाना जितना जरूरी है, उतना ही आरोपी के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करना भी आवश्यक है। दोनों के बीच संतुलन बनाए रखने का एकमात्र विकल्प यही है कि मामले को वापस ट्रायल कोर्ट भेजा जाए।” अब आगे क्या होगा? हाई कोर्ट के आदेश के बाद अब यह मामला वापस झज्जर में निचली अदालत (Trial Court) में जाएगा। इसमें दोबारा से पूरे मामले में सुनवाई होगी और इसी के आधार पर दोबारा से साक्ष्यों को देखते हुए सजा निर्धारित की जाएगी। फॉरेंसिक और डीएनए रिपोर्ट अब आधिकारिक तौर पर रिकॉर्ड पर ली जाएंगी और आरोपी को उन पर अपनी सफाई देने का पूरा मौका मिलेगा। 11 महीने में आया ट्रायल कोर्ट का फैसला वारदात 21 दिसंबर 2020 को झज्जर के छावनी एरिया में हुई थी। यहां एक राजमिस्त्री अपने परिवार के साथ रहता था। उनके पास ही 26 साल का विनोद कुमार उर्फ मुन्ना भी रहता था। उसने बच्ची का अपहरण किया और रेप के बाद हत्या कर दी। 5 साल की बच्ची का रेप कर मर्डर करने का यह केस झज्जर में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश हेमराज की फास्ट ट्रैक कोर्ट में चल रहा था। कोर्ट ने सभी सबूतों को देखते हुए सोमवार 29 नवंबर, 2021 को वारदात के 11 महीने बाद विनोद उर्फ मुन्ना को दोषी ठहराते हुए सजा सुना दी। बच्ची के साथ रेप और उसकी हत्या के मामले में कोर्ट ने विनोद को फांसी की सजा सुनाई। इसके अलावा प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रेन फ्रॉम सेक्सुअल अफेंसेस (पॉक्सो ) एक्ट 2012 की धारा 6 के तहत भी उसे उम्रकैद की सजा सुनाते हुए 1 लाख 85 हजार रुपए जुर्माने की सजा दी गई। 12 गवाहों ने पहुंचाया था फांसी तक इस मामले की जांच झज्जर के तत्कालीन DSP राहुल देव के नेतृत्व में पुलिस टीम ने की। तकरीबन दो दर्जन गवाहों के बयानों के आधार पर विनोद उर्फ मुन्ना को फांसी की सजा सुनाई गई। विनोद उर्फ मुन्ना के खिलाफ पहले भी हरियाणा और राजस्थान में लूट और हत्या जैसे 8 केस दर्ज हैं।