इशिबा ने अपने कार्यालय में पत्रकारों से कहा, “हम यह गहराई से चर्चा करेंगे कि हमारे देश को कानून और क्षमताओं के दृष्टिकोण से क्या करना चाहिए और क्या करना संभव है। उसी आधार पर हम उपयुक्त भूमिका निभाएंगे।” उन्होंने दोहराया कि जापान अभी उस चरण में नहीं है जहां समर्थन के सटीक स्वरूप को बताया जा सके।
जापान नाटो का औपचारिक सदस्य नहीं है, लेकिन उसके साथ निकट सहयोग करता है। इशिबा का यह बयान इस बात का संकेत है कि पश्चिमी देश रूस के भविष्य में किसी भी आक्रामक कदम की स्थिति में यूक्रेन को बचाने के लिए व्यापक ढांचा तैयार कर रहे हैं।
इससे पहले सोमवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और यूरोपीय नेताओं की बातचीत के बाद सुरक्षा गारंटी पर चर्चा तेज हुई। इसमें यूक्रेन के लिए शांति समझौते के बाद शांति-रक्षक बल (पीस-कीपिंगग फोर्स) तैनात करने की संभावनाएं भी शामिल हैं।
नाटो महासचिव मार्क रुटे ने कहा है कि 30 देश, जिनमें जापान भी शामिल है, एक ऐसा ढांचा तैयार करने पर काम कर रहे हैं जिससे युद्धविराम या पूर्ण शांति समझौते के बाद यूक्रेन की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
