हरियाणा की नायब सिंह सैनी सरकार इस समय ‘इधर कुआं, उधर खाई’ वाली स्थिति में फंसी नजर आ रही है। पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले में हजारों संविदा (कच्चे) कर्मचारियों को पक्का करने का फरमान सुनाया है, जिसकी समय सीमा 28 फरवरी को समाप्त हो रही है। एक तरफ अदालत की अवमानना का तलवार लटकी है, तो दूसरी तरफ कर्मचारी संघों ने अपनी मांगों को लेकर 12 फरवरी को ‘स्टेट लेवल हड़ताल’ का बिगुल फूंक दिया है। दोनों तरफ के दबाव से सरकार उलझन में है कि आखिर क्या और कैसे किया जाए। हालांकि सरकार बीच का कोई रास्ता निकालने का प्रयास कर रही है। सरकार बना चुकी पोर्टल
ऑल इंडिया स्टेट गवर्नमेंट एम्प्लाइज फेडरेशन के अध्यक्ष सुभाष लांबा ने स्थिति को सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बताते हुए आरोप लगाया कि राज्य सरकार संविदा कर्मचारियों के दस्तावेजों को सरकारी पोर्टल पर जल्दबाजी में अपलोड कर रही है। ताकि उन्हें 58 वर्ष की आयु तक नौकरी की सुरक्षा प्रदान की जा सके, एक ऐसा कदम जिसका उद्देश्य नियमितीकरण को दरकिनार करना है।
हाई कोर्ट की अवमानना से बचना चाह रही सरकार
लांबा ने बताया, हरियाणा कौशल रोजगार निगम के नोटिफिकेशन कर्मचारियों को नियमितीकरण और ‘समान काम के लिए समान वेतन’ का दावा करने से रोकती है। 58 वर्ष तक नौकरी की सुरक्षा प्रदान करके, सरकार यह दावा करके अदालत की अवमानना से बचने की कोशिश कर सकती है कि संविदा कर्मचारियों ने पोर्टल पर पंजीकरण करके स्वेच्छा से नौकरी की सुरक्षा स्वीकार कर ली थी। हाईकोर्ट ने क्या आदेश दिया
पिछले वर्ष 31 दिसंबर को, उच्च न्यायालय ने 41 याचिकाओं का निपटारा करते हुए हरियाणा सरकार को संविदा कर्मचारियों को आठ सप्ताह के भीतर नियमित करने का निर्देश दिया। इसने 1993, 1996, 2003 और 2011 की राज्य नीतियों के तहत पात्र कर्मचारियों को नियमित करने का आदेश दिया। इसने आगे फैसला सुनाया कि संविदा कर्मचारी जिन्होंने 31 दिसंबर, 2025 तक 10 वर्ष की सेवा पूरी कर ली है, लेकिन इन नीतियों के अंतर्गत नहीं आते हैं, उन्हें भी नियमित किया जाना चाहिए।
अदालत ने स्पष्ट किया कि पदों को मंजूरी न मिलने पर भी सरकार को उनका सृजन करना होगा। अदालत ने यह भी आदेश दिया कि कर्मचारियों को नियमितीकरण के लिए पात्र होने वाले वर्ष से पूर्ण वेतन के साथ-साथ 6 प्रतिशत ब्याज का भुगतान किया जाए।
सरकार निकाल रही बीच का रास्ता
सूत्रों के अनुसार, सरकार के पास फैसले को अक्षरशः लागू करने की स्थिति नहीं है, साथ ही वह अवमानना की कार्यवाही से भी बचना चाहती है। उसके सामने सीमित विकल्प हैं या तो फैसले को लागू करें या हाईकोर्ट में इसे चुनौती दें। एक सीनियर ऑफिसर ने बताया, नियमितीकरण के बजाय नौकरी की सुरक्षा प्रदान करने की प्रक्रिया में तेजी लाकर, सरकार दोनों विकल्पों को खुला रखने का प्रयास कर रही है। एचकेआरएन के माध्यम से नियुक्त लगभग 1.20 लाख कर्मचारियों में से, पांच साल से अधिक की सेवा वाले कर्मचारियों को 58 वर्ष की आयु तक नौकरी की सुरक्षा का लाभ उठाने के लिए 20 फरवरी तक दस्तावेज अपलोड करने के लिए कहा गया है। हड़ताल का खतरा मंडरा रहा
इसी बीच, सर्व कर्मचारी संघ के अध्यक्ष नरेश कुमार शास्त्री और महासचिव कृष्ण कुमार नैन ने चेतावनी दी कि यदि उच्च न्यायालय के आदेश को लागू नहीं किया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि 12 फरवरी की हड़ताल सरकार को अदालत के निर्देशों का पालन करने के लिए मजबूर करने की दिशा में एक निर्णायक कदम होगा।
हरियाणा के कच्चे कर्मचारियों को पक्का करना चुनौती:HC की डेडलाइन नजदीक, 12 को प्रदेश व्यापी हड़ताल; बीच का रास्ता तलाश रही सरकार
