आईटी को मिले खनन सिंडिकेट-अफसरों की मिलीभगत के सबूत:सही जांच हुई तो कई सफेदपोश और ब्यूरोक्रेट्स तक पहुंचेगी आंच

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उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले में डोलो स्टोन (गिट्टी) के अवैध खनन का सिंडिकेट अब इनकम टैक्स (IT) विभाग के शिकंजे में फंस गया है। बसपा विधायक उमाशंकर सिंह और उनके करीबियों के यहां छापे पड़े। इसमें IT विभाग को खनन सिंडिकेट और अधिकारियों के गठजोड़ के बड़े सबूत मिले हैं। यह कई बड़े ब्यूरोक्रेट्स और सफेदपोश के चेहरे से नकाब हटा सकते हैं। ऐसे में सवाल उठना वाजिब है कि इनकम टैक्स को कहां से लीड मिली? कहां-कहां छापे मारे गए? छापे में क्या-क्या मिला? सिंडिकेट से जुड़े किन लोगों के नाम सामने आए? इन सवालों का जवाब इस खबर में तलाश करेंगे… IT को इस पूरे मामले में लीड सीएजी (कैग) की उस रिपोर्ट से मिली, जो विधानसभा में पेश की गई थी। IT विभाग ने इस रिपोर्ट का पूरा अध्ययन किया। फिर कार्रवाई के लिए पूरा प्लान तैयार किया गया। 26 फरवरी, 2026 को आयकर विभाग ने लखनऊ, बलिया, प्रयागराज, मिर्जापुर और सोनभद्र में कुल 30 ठिकानों पर छापे मारे। इस दौरान उमाशंकर के घर से 11 करोड़ रुपए, गहने, महंगी घड़ियां, गाड़ियां, बेनामी संपत्ति के कागजात, कई डायरी, अवैध खनन से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज मिले। इसके अलावा लेन-देन की लूज शीट्स और हाथ से लिखे नोट्स, टेंडर और भुगतान से जुड़ी संदिग्ध फाइलें, कंप्यूटर हार्ड डिस्क, प्रॉपर्टी के दस्तावेज भी बरामद किए गए। जांच के दौरान 100 करोड़ से अधिक की टैक्स चोरी का अनुमान लगाया गया है। सूत्रों की मानें, तो इनकम टैक्स विभाग को कुछ दस्तावेज हाथ लगे हैं। इनसे पता चला कि उमाशंकर सिंह की पत्नी पुष्पा सिंह के नाम से रजिस्टर्ड फर्म सीएस इंफ्रा कंस्ट्रक्शन और रमेश कुमार सिंह की फर्म साईं राम इंटरप्राइजेज ने पुराने पार्टनर को दरकिनार कर एक सिंडिकेट बनाया था। कैसे हुआ पूरा खेल इस पूरे खेल को जानने के लिए थोड़ा फ्लैश बैक में चलना होगा। ये वो समय था, जब खनन विभाग में नए सिंडिकेट ने पांव पसारना शुरू किया था। साल-2018 में जारी विज्ञप्ति में सोनभद्र के बिल्ली मारकुंडी क्षेत्र की आराजी संख्या 7536 में 4 खंडों के लिए टेंडर निकाले गए। उस समय जिले में सामान्य रेट 160 रुपए प्रति घनमीटर था। लेकिन, साईं राम इंटरप्राइजेज ने 3010 रुपए और सीएस इंफ्रा ने 3000 रुपए प्रति घनमीटर की हैरतअंगेज बोली लगाई। कंपनी ने पट्टे हासिल कर लिए। चारों खंडों में पट्टाधारकों ने आपसी तालमेल से सिर्फ दो खंडों (1 और 3) की ही रजिस्ट्री कराई। बाकी पर अवैध खनन चलाया। मकसद साफ था, खनन पूरे क्षेत्र से होगा। लेकिन, सरकार को रॉयल्टी सिर्फ दो खंडों की दी जाएगी। उम्भा कांड के बाद जागा प्रशासन
साल- 2019 में सोनभद्र में उम्भा कांड हुआ। यहां जमीन कब्जे को लेकर कई हत्याएं हुईं। प्रशासनिक अफसरों को हटा दिया गया। नए जिलाधिकारी राजलिंगम ने जब खनन की देख-रेख शुरू की, तो बिल्ली मारकुंडी क्षेत्र की आराजी संख्या 7536 के उन चार खंडों पर पड़ी, जहां केवल 2 खंड आवंटित किए गए थे। दो खंड में अवैध खनन हो रहा था। खनन अधिकारी से रिपोर्ट लेकर पट्टाधारकों को नोटिस जारी कर दिया। खास बात ये रही कि पट्‌टा धारकों पर अवैध खनन पर जो जुर्माना लगाया गया, वह न्यूनतम दर 160 रुपए प्रतिघन मीटर की दर से था। जबकि, इन दोनों कंपनियों ने 3010 और 3000 रुपए की दर से ये पट्‌टा हासिल किया था। CAG रिपोर्ट ने क्या खुलासा किया था? 2024-25 में यूपी विधानसभा में पेश सीएजी रिपोर्ट में खनन विभाग में चल रहे बड़े खेल का खुलासा किया था। रिपोर्ट के मुताबिक, साईं राम इंटरप्राइजेज ने 62,072 घनमीटर अवैध खनन कर सरकार को 112 करोड़ 10 लाख का नुकसान पहुंचाया। जबकि, सीएस इंफ्रा कंस्ट्रक्शन ने 33,603 घनमीटर अवैध खनन से 60 करोड़ 48 लाख का घपला किया। सीएस इंफ्रा कंस्ट्रक्शन की ओनर उमाशंकर सिंह की पत्नी पुष्पा सिंह हैं। कुल मिलाकर सरकार को 172 करोड़ से ज्यादा का राजस्व नुकसान हुआ। रिपोर्ट में कहा गया कि नीलामी दर पर रॉयल्टी वसूलनी चाहिए थी। लेकिन, पुरानी और कम दरों पर मामला निपटाया गया। अवैध परिवहन का खेल बिल्ली मारकुंडी से अवैध तरीके से निकाले गए पत्थर के परिवहन के लिए दुद्धी तहसील के सस्ते रेट वाले पट्टों, जिसकी कीमत 200 रुपए प्रति घनमीटर से भी कम थी, का इस्तेमाल एमएम 11 के लिए किया गया। यानी पत्थर निकाला गया बिल्ली मारकुंडी से। जहां सरकार को 3010 रुपए प्रति घनमीटर देना था। लेकिन, उसे बेचा गया दुद्धी के पट्‌टे से, जिसकी दर 200 रुपए से कम थी। हकीकत में दुद्धी में कोई खनन हुआ ही नहीं। बड़ा सवाल ये… संरक्षण किसका? तत्कालीन खनन निदेशक रोशन जैकब ने 14 जुलाई, 2023 को ही इन कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए तत्कालीन जिलाधिकारी सोनभद्र चंद्र विजय सिंह को पत्र लिखा। साथ ही इन पट्टों को निरस्त करने को कहा था। लेकिन, कार्रवाई के बजाय रोशन जैकब को ही विभाग से हटा दिया गया। साईं राम इंटरप्राइजेज के नाम ये पट्टा अब भी चल रहा है। सूत्रों का कहना है कि शासन में अहम ओहदे पर बैठे एक अफसर के संरक्षण के कारण ही यह संभव हो सका था। क्या डूब गया छोटे निवेशकों का पैसा? 26 फरवरी को आयकर विभाग ने साईं राम इंटरप्राइजेज के ज्यादातर पार्टनर के ठिकानों पर छापे मारे। इस दौरान ज्यादातर पार्टनर ने बताया कि वे पार्टनर थे जरूर, लेकिन न तो उन्हें वो पैसे वापस मिले और न ही फायदा मिला। ज्यादातर पार्टनर ने आयकर विभाग के अधिकारियों को खनन विभाग के इस सिंडिकेट के बारे में बताया। इसमें बसपा विधायक उमाशंकर सिंह, रमेश कुमार सिंह और रमाशंकर दुबे शामिल थे। इनकम टैक्स अब साईंराम इंटरप्राइजेज की बैलेंस शीट और बैंक खातों से इसकी तस्दीक कर रहा है। आयकर विभाग को कुछ ऐसे सबूत हाथ लगे हैं, जिनसे कुछ ब्यूरोक्रेट्स की नींद उड़ सकती है। 4 साल में 5 गुना हो गया टर्नओवर उमाशंकर सिंह की पत्नी के नाम से चल रही कंपनी सीएस इंफ्रा कंस्ट्रक्शन लिमिटेड को न सिर्फ खनन विभाग, बल्कि मंडी परिषद और पीडब्ल्यूडी विभाग में भी ठेके मिलते रहे हैं। उमाशंकर सिंह की संपत्ति 2021-22 के बाद से तेजी से बढ़ी। 2021-22 में सीएस इंफ्रा कंस्ट्रक्शन लिमिटेड का कुल टर्नओवर 271.39 करोड़ रुपए था। 2022-23 में ये 402.26 करोड़, 2023-24 में 777.14 करोड़ और 2024-25 में 1005.42 करोड़ रुपए हो गया। ————————- ये खबर भी पढ़ें… बसपा विधायक के ठिकानों पर IT रेड:लखनऊ और बलिया में सर्च ऑपरेशन जारी, साथी ठेकेदार के यहां भी कार्रवाई बसपा के इकलौते विधायक उमाशंकर सिंह के ठिकानों पर आयकर विभाग (IT) की छापेमारी दूसरे दिन भी जारी है। सोनभद्र, कौशांबी और बलिया में कार्रवाई चल रही है, जबकि लखनऊ के आवास पर छापेमारी खत्म हो चुकी है। सूत्रों के मुताबिक, यहां से टीम को करीब साढ़े 11 करोड़ रुपए कैश मिले हैं। इसके अलावा महंगी घड़ियां, सोना-चांदी और कीमती जेवर भी बरामद हुए हैं। पढ़ें पूरी खबर