हरियाणा के जींद में शहीदी दिवस पर इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) युवा सम्मेलन चल रहा है। जिसे रैली का रूप दिया गया है। राज्यसभा चुनाव के बाद हो रही इस रैली को पार्टी का शक्ति प्रदर्शन माना जा रहा है। रोहतक में 25 सितंबर 2025 देवीलाल जयंती के बाद इनेलो का यह दूसरा बड़ा सियासी आयोजन है। इनेलो ने रैली के लिए नरवाना हलके को चुना। क्योंकि पूर्व सीएम स्व. ओमप्रकाश चौटाला ने नरवाना से 5 बार चुनाव लड़े थे। इनेलो के रानियां से विधायक अर्जुन चौटाला ने कहा कि शहीद-ए-आजम भगत सिंह का चौ. देवीलाल से भी नाता था। युवा सम्मेलन के जरिये वक्ताओं ने कहा कि नौकरियों के लिए कठोर सरकारी क्राइटेरिया बनाकर पक्की नौकरियों से दूर रखा जा रहा है, जबकि HKRN के जरिये बेहद कम वेतन पर काम कराया जा रहा है। वक्ताओं ने राज्यसभा में इनेलो के स्टैंड को बड़ा संदेश बताया। कहा कि इनेलो ने साबित कर दिया है कि वो किसी पार्टी की बी टीम नहीं है। नेताओं ने कहा कि 2029 में अभय चौटाला प्रदेश के मुख्यमंत्री बनेंगे, के नारे लगाए। डबवाली से इनेलो विधायक अर्जन चौटाला, आदित्य देवीलाल, सुनैना चौटाला, कर्ण चौटाला व पार्टी प्रदेशाध्यक्ष रामपाल माजरा, पूर्व मंत्री संपत सिंह, उमेद लोहान, कुरुक्षेत्र से तनुजा समेत अन्य नेता पहुंचे हैं। अभय चौटाला भी कुछ देर में संबोधित करेंगे। जानिये…नरवाला रैली में कौन नेता क्या बोले अर्जुन चौटाला बोले-भगत सिंह का देवीलाल से नाता रानिया से इनेलो विधायक अर्जुन चौटाला ने कहा कि चौ. देवीलाल का शहीद-ए-आजम भगत सिंह से पुराना नाता था। जब भगत सिंह पर पहला केस लगा, तब देवीलाल भी स्वतंत्रता संग्राम में कूदे थे। शहीद भगत सिंह की शिनाख्त के लिए जिन 5 लड़कों को खड़ा किया गया, उनमें से एक देवीलाल भी थे। अर्जुन बोले, 100 के नोट पर फोटो लगे तो शहीद भगत सिंह की लगे रानियां विधायक अर्जुन चौटाला बोले, मैं और की तरह अंग्रेजों की तरह इनको भगाने की बात नहीं करूंगा। सिर्फ सामाजिक लड़ाई लड़ना चाहता हूं। शहीद भगत सिंह ने अंग्रेजों के खिलाफ लड़ने का काम किया। शहीद भगत सिंह आज होते तो हमें यहीं कहते कि सरकार के खिलाफ लड़ाई लड़ने का काम करे। देश के प्रधानमंत्री मोदी अपनी फोटो पर 100 के नोट पर फोटो लगवाना चाहते हो। मगर 100 के नोट पर फोटो लगे तो शहीद भगत सिंह पर लगे। सुनैना बोली, युवाओं को विदेशों से बेड़ियों में जकड़कर लाया गया, प्रधानमंत्री चुप रहे सुनैना चौटाला बोली, हमारे दोनों युवा विधायकों ने विधानसभा में डंका बजा रखा है। 23 मार्च के दिन तीन युवाओं की शहादत हुई थी और पूरे देश में आजादी का ज्वाला बना। आज के दिन नया आगाज होगा और युवाओं ने भाजपा की उलटी गिनती शुरू कर दी है। ये ज्वाला हरियाणा ही नहीं देशभर में आंदोलन का रूप लेगी। सुनैना बोली, भाजपा के कुशासन से आजादी दिलाने का काम करेगी। अंग्रेजों के समय में युवाओं के साथ बेदर्दी हुई और आज भाजपा के राज में भी ऐसा हो रहा है। युवा रोजगार के लिए विदेश गए और उनको बेड़ियों में जकड़कर वापस लाया गया। मगर देश के प्रधानमंत्री चुप रहे और युवाओं के साथ अन्याय होता रहा। उमेद लोहान ने धुरंधर फिल्म से की तुलना उमेद लोहान ने राज्यसभा चुनाव की तुलना धुरंधर फिल्म से कर दी और कहा- धुरंधर वन में सुभाष चंद्रा को जीताने का काम किया और धुरंधर टू में कर्मवीर बौद्ध को कांग्रेस विधायकों ने हराने का जो षडयंत्र रचा था, वो फैल हो गया। इसका श्रेय अभय चौटाला को ही जाता है कि वोट नहीं डाले। नहीं तो वो भी हार गए होते। विधायक खरीदकर कांग्रेस-बीजेपी का गला घोंटा पार्टी प्रदेशाध्यक्ष रामपाल माजरा बोले, आजादी के बाद भी ये नहीं पता था कि गरीब बिना छत के रह जाएंगे और युवा रोजगार बिना रह जाएंगे। बीजेपी ने राज में आने पर कहा था कि तिजोरी का धन खोल देंगे, पर कुछ नहीं किया। माजरा ने मंत्री कृष्ण बेदी पर भी निशाना साधा और कहा-एक वोट के अंतर से भी हार-जीत हो जाती है। ये समय बताएगा और अहंकार ठीक नहीं है। हरियाणा प्रदेश का हर नागरिक शर्मशार महसूस करने लगा। विधायक बेचने वाली कांग्रेस व खरीदने वाली भाजपा ने लोकतंत्र का गला घोंटा। किसानों को बहकाया। 22वीं किस्त में शर्ते लगाकर मात्र 9 करोड़ किसानों को योजना का लाभ दिया है। चुनाव होने के बाद पीला कार्ड काट दिए गए। पेंशन काट दी गई और इनकी लड़ाई लड़ी। एसवाईएल का मुद्दा उठाया। पूर्व प्रत्याशी चंद्र भान के बेटे इनेलो में हुए शामिल माजरा ने संबोधन में बताया, चंद्र भान के बेटे कांग्रेस नेता धर्मेंद्र ढुल, इनेलो में शामिल हहुए। रतिराम एससी सेल मोर्चा बीजेपी के अध्यक्ष रहे। बीजेपी से रतिराम इनेलो में शामिल हुए। सभी को पार्टी का पटका पहनाकर सम्मानित किया। इनसो के पूर्व जिलाध्यक्ष दिग्विजय शेखावत को पटका पहनाकर पार्टी ज्वाइन करवाई। जुलाना से कांग्रेस प्रत्याशी रहे ढुल, एक दिन पहले दिया था इस्तीफा साल 2014 और 2019 में कांग्रेस के टिकट पर जुलाना हलके से विधानसभा चुनाव लड़े धर्मेंद्र ढुल इनेलो में शामिल हो गए हैं। एक दिन पहले ही उन्होंने कांग्रेस छोड़ी थी। इनेलो के प्रदेश अध्यक्ष रामपाल माजरा ने बताया कि ढुल के पिता चंद्रभान एसपी रहे। एचपीएससी के चेयरमैन भी रहे। ढुल भूपेंद्र सिंह हुड्डा गुट से जुड़े थे। वह 2024 के चुनाव में भी पार्टी से टिकट मांग रहे थे, लेकिन कांग्रेस ने रेसलर विनेश फोगाट को प्रत्याशी बनाया। जिन्होंने जुलाना सीट कांग्रेस की झोली में डाली। जानिये…वो 4 कारण जींद पर क्यों चौटाला परिवार का फोकस जींद हरियाणा की राजनीति में जाटलैंड का दिलः जींद को हरियाणा की राजनीति में जाटलैंड का दिल कहा जाता है। यहां के बारे में मशहूर है कि जिस आंदोलन की शुरूआत जींद से हुई, वो तेजी से फैला। चौ. देवीलाल ने भी 1980 के दशक में किसानों के हक, बिजली-पानी के बिलों में राहत और सामाजिक और आर्थिक न्याय के लिए यहीं से आंदोलन शुरू किया था। जिसे न्याय युद्ध रैली कहा गया। नतीजा 1985 के चुनाव में देवीलाल की पार्टी 85 सीटें जीती।
जींद गढ़ रहा, ओपी चौटाला 5 बार लड़ेः जींद देवीलाल परिवार का गढ़ रहा है। ओमप्रकाश चौटाला नरवाना सीट से 1970, 1990, 1993, 1996 और साल 2000 में चुनाव लड़े। दो बार जीते। हालांकि, साल 2007 के परिसीमन में नरवाना सीट एससी के लिए रिजर्व कर दी गई। साल 2000 में जब इनेलो की सरकार बनी और ओमप्रकाश चौटाला सीएम बने, तब जींद जिले की सभी 5 सीटें इनेलो ने जीती थी। 2009 व 2014 में भी इनेलो को यहां 3 सीटें मिलीं। 2019 में जननायक जनता पार्टी के दुष्यंत चौटाला जींद के उचाना से ही विधायक बने और फिर डिप्टी सीएम बने। सिरसा से बाहर निकलने की कोशिशः इनेलो अभी तक सिरसा जिले तक सिमट कर रह गई। 2 विधायकों वाली इनेलो को 2024 में रानियां और डबवाली सीट पर जीत मिली। ऐलनाबाद को छोड़कर बाकी जगह कुछ खास नहीं कर पाई। ऐसे में इनेलो की छटपटाहट सिरसा से बाहर पांव जमाने की है। जजपा के कमजोर होने से बना वैक्यूमः 2024 के विधानसभा चुनाव में उचाना सीट से जजपा के दुष्यंत चौटाला की जमानत भी नहीं बची। इसी वजह से इनेलो की कोशिश है कि जजपा के कमजोर होने क फायदा उठाए। इनेलो ने नेता लगातार जींद में सक्रियता बढ़ा रहे हैं। खासकर सुनैना चौटाला लगातार दौरे कर रही हैं। राजनीतिक नजरें टिकीं नरवाना पर पूरे हरियाणा की राजनीतिक नजरें इस समय नरवाना की इस रैली पर टिकी हुई हैं। राज्यसभा चुनाव के बाद यह इनेलो का पहला बड़ा शक्ति प्रदर्शन है, जिसके आने वाले चुनावी समीकरणों पर असर डालने की संभावना जताई जा रही है। सक्रियता का संदेश देने की कोशिश इस रैली के माध्यम से पार्टी यह संदेश देना चाहती है कि इनेलो अब फिर से सक्रिय हो गई है और प्रदेश की राजनीति में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने के लिए तैयार है।
जींद में इनेलो का ऐलान-आधी टिकटें युवाओं को देंगे:नेता बोले-राज्यसभा चुनाव ने साबित किया पार्टी किसी की ‘बी’ टीम नहीं
