घुसपैठियों की विचारधारा–गतिविधियां राष्ट्र को कर रहीं कमजोर : राकेश

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कार्यक्रम की अध्यक्षता वरीय अधिवक्ता अनिल कुमार कश्यप ने की। गोष्ठी में अवैध अप्रवासन : राष्ट्रीय सभ्यतागत खतरा विषय पर विस्तृत चर्चा हुई। इस अवसर पर बतौर मुख्य अतिथि सह प्रमुख वक्ता समाजसेवी राकेश लाल ने कहा कि अधिवक्ता समाज को सिंहावलोकन की जरूरत है। इतिहास बताता है कि घुसपैठियों की विचारधारा और उनकी गतिविधियां राष्ट्र को कमजोर कर रही हैं। हमें आत्मचिंतन कर इस बुराई को जड़ से खत्म करने की रणनीति बनानी होगी।

वरिष्ठ अधिवक्ता मनोज टंडन ने कहा कि घुसपैठिए छोटे-छोटे काम कर समाज में रच-बस जाते हैं और धीरे-धीरे स्थायी नागरिक बन जाते हैं। एएसजी प्रशांत पल्लव ने मताधिकार, सरकारी योजनाओं और नागरिक सुविधाओं से घुसपैठियों को वंचित रखने और कठोर दंड का प्रावधान करने की बात कही। राजेंद्र कृष्णा ने एनआरसी जैसे सख्त कदम उठाने की आवश्यकता बताई।

इस अवसर पर आरएन सहाय ने कहा कि अगर घुसपैठ नहीं रोकी गई तो संस्कृति खतरे में पड़ जाएगी। वहीं अनिल कुमार कश्यप ने युवा अधिवक्ताओं से सर्वोच्च न्यायालय की टिप्पणियों को ध्यान में रखते हुए बदलाव लाने का आह्वान किया।

कार्यक्रम का संचालन नीता कृष्णा ने किया।

कार्यक्रम में ऋतु कुमार, सुनील कुमार, रीतेश कुमार बॉबी, अवनीश रंजन मिश्रा, पवन कुमार पाठक सहित कई वरिष्ठ अधिवक्ता मौजूद थे।