समझौते के तहत दोनों संस्थान यूएवी इंजनों, सामग्रियों और निर्माण तकनीकों के विकास के साथ-साथ पांच प्रतिशत एकीकरण, भू-मानचित्रण, वस्तु अनुक्रमण और ड्रोन क्षमताओं के उन्नयन पर संयुक्त अनुसंधान करेंगे। इसके साथ ही आईआईटी जोधपुर के छात्रों को यूएवी तकनीक में व्यावहारिक प्रशिक्षण का अवसर मिलेगा, जिससे वे उद्योग अनुभव के साथ एयरोस्पेस एवं रोबोटिक्स इंजीनियरिंग के क्षेत्र में दक्षता प्राप्त करेंगे।
इस दौरान आइडिया फोर्ज के मुख्य वित्तीय अधिकारी विपुल जोशी ने कहा कि हम मानते हैं कि अकादमिक अनुसंधान और औद्योगिक नवाचार का संगम ही तकनीकी प्रगति की नींव है। आईआईटी जोधपुर की अनुसंधान उत्कृष्टता और आइडिया फोर्ज की इंजीनियरिंग नेतृत्व क्षमता को मिलाकर हम राष्ट्रीय प्राथमिकताओं को मजबूती देने वाले समाधान विकसित करेंगे।
वहीं, आईआईटी जोधपुर के निदेशक प्रो. अविनाश कुमार अग्रवाल ने कहा कि यह साझेदारी देश के रक्षा और नागरिक उपयोग के लिए स्वदेशी यूएवी के विकास में मील का पत्थर साबित होगी और भारत को वैश्विक मंच पर एक सशक्त तकनीकी राष्ट्र के रूप में स्थापित करेगी।
यह एमओयू तीन वर्षों के लिए मान्य रहेगा और दोनों संस्थानों की यह साझेदारी भारत को स्वदेशी ड्रोन प्रौद्योगिकी और डीप-टेक इकोसिस्टम में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, जोधपुर (आईआईटी जोधपुर) भारत में प्रौद्योगिकी, अनुसंधान और नवाचार का अग्रणी केंद्र है, जो रणनीतिक और उभरते क्षेत्रों में आत्मनिर्भर भारत की दिशा में कार्य कर रहा है। थार मरुस्थल क्षेत्र में स्थित यह संस्थान रक्षा और पर्यावरण संबंधी चुनौतियों के समाधान विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
