11वीं एशियाई एक्वेटिक्स चैंपियनशिप में भारत का ऐतिहासिक प्रदर्शन: डाइविंग और तैराकी में मिले कांस्य पदक

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मणिपुर के 18 वर्षीय इंदिवर और 32 वर्षीय विल्सन पुणे के आर्मी स्पोर्ट्स इंस्टीट्यूट (ASI) में प्रशिक्षण लेते हैं। उन्होंने 300.66 अंक हासिल कर तीसरा स्थान पाया। चीन की जोड़ी झांग्यु कुई और झानहोंग जू (381.75 अंक) स्वर्ण पदक विजेता रही, जबकि मलेशिया के बर्ट्रेंड रोडिक्ट लिसेज़ और एनरिक एम. हेरोल्ड (329.73 अंक) ने रजत पदक जीता।

उनके ऑस्ट्रेलियाई कोच शैनन रॉय ने कहा, “दो साल पहले ये दोनों एशिया और दुनिया के टॉप स्तर से काफी पीछे थे। लेकिन पिछले छह महीनों में हमने सिंक्रोनाइज़्ड इवेंट्स पर गहन मेहनत की है। मलेशिया और सिंगापुर में हुए प्रशिक्षण शिविरों का असर अब साफ दिख रहा है। मेरा मानना है कि ये जोड़ी आने वाले एशियाई खेलों में भारत के लिए बड़ा नाम कमा सकती है।”

तैराकी में भी भारत को सफलता मिली। दिल्ली के युवा तैराक कुशाग्र रावत ने पुरुषों की 1500 मीटर फ्रीस्टाइल में 15:30.88 मिनट का समय निकालकर कांस्य पदक जीता। वियतनाम के हुई होआंग गुयेन (15:15.01) ने स्वर्ण और उज़्बेकिस्तान के इल्या सिबिर्त्सेव (15:23.35) ने रजत पदक हासिल किया।

इसके अलावा ऋषभ दास ने पुरुषों की 200 मीटर बैकस्ट्रोक में कांस्य पदक जीतकर भारत के पदक तालिका में एक और इज़ाफा किया। कुल मिलाकर 12 भारतीय तैराक अपने-अपने फाइनल में पहुंचे, जबकि दो रिले टीमें भी फाइनल में जगह बनाने में सफल रहीं।

भारत की इस उपलब्धि ने भविष्य के लिए उम्मीदें और ऊंची कर दी हैं।