मंदसौर में पशुपतिनाथ लोक का लोकार्पण:25 करोड़ से बना, महाकाल लोक की तर्ज पर विकास; भक्तों के लिए जानिए क्या खास है यहां…

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मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव गुरुवार को मंदसौर पहुंचे और 25 करोड़ रुपए की लागत से तैयार ‘पशुपतिनाथ लोक’ का लोकार्पण कर इसे जनता को समर्पित किया। अष्टमुखी भगवान पशुपतिनाथ मंदिर परिसर में बने इस भव्य लोक का शुभारंभ सीएम ने 22 फीट ऊंचे ‘त्रिनेत्र’ का अनावरण कर किया। इसके बाद वे महायज्ञ में शामिल हुए और आहुति दी। लोकार्पण से पहले मुख्यमंत्री ने भगवान पशुपतिनाथ के दर्शन किए और आरती में शामिल हुए। इसके बाद उन्होंने मंदिर परिसर की व्यवस्थाएं देखीं। सीएम ने ई-कार्ट वाहन में बैठकर पूरे पशुपतिनाथ लोक का भ्रमण किया और वहां किए गए निर्माण कार्यों को बारीकी से निहारा। शिवना नदी के तट पर बने इस लोक को उज्जैन के महाकाल लोक की तर्ज पर विकसित किया गया है। यहां शिव परिवार की प्रतिमाओं के साथ एक विशाल डमरू भक्तों के आकर्षण का केंद्र रहेगा। कॉरिडोर में गार्डन, सरोवर, पूजन सामग्री की दुकानें और रेस्टोरेंट जैसी तमाम आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। कार्यक्रम के दौरान उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा, राज्यसभा सांसद बंशीलाल गुर्जर, विधायक हरदीप सिंह डंग, विधायक विपिन जैन और भाजपा जिला अध्यक्ष राजेश दीक्षित सहित तमाम जनप्रतिनिधि और अधिकारी उपस्थित रहे। देखिए लोकार्पण की तस्वीरें…
सबसे पहले जान लीजिए लोक की घोषणा के बारे में… 8 दिसंबर 2022 को मंदसौर गौरव दिवस के मौके पर प्रदेश के तत्कालीन मुखिया शिवराज सिंह चौहान मंदसौर आए थे। इसी दौरान जनप्रतिनिधियों ने महाकाल लोक की तर्ज पर पशुपतिनाथ लोक बनाने का आग्रह किया था। इसके बाद उन्होंने भव्य कॉरिडोर बनाने की घोषणा की थी। 1 साल बाद 6 अक्टूबर 2023 को साधु-संतों की मौजूदगी में कॉरिडोर का भूमि पूजन हुआ। शिवराज वर्चुअली कार्यक्रम में शरीक हुए थे। शिवना तट पर राजस्थान के लाल पत्थरों से निखरा लोक सिवना नदी के तट पर स्थित यह लोक 15 बीघा क्षेत्र में फैला है। इसका निर्माण राजस्थान के लाल पत्थरों से पारंपरिक नक्काशी कला के साथ किया गया है। लोक में अयोध्या शैली के भव्य प्रवेश द्वार, चार सुव्यवस्थित प्रवेश-निकास मार्ग और शिव लीलाओं पर आधारित विशाल म्यूरल वॉल बनाई गई है। विशेष लाइटिंग से सजी दीवारें और भगवान पशुपतिनाथ के इतिहास को उकेरती पेंटिंग्स आकर्षण का केंद्र रहेंगी। यहां 22 फीट ऊंचा त्रिनेत्र और उसके मध्य में स्थापित रुद्राक्ष श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध करेगा। 2 साल 4 महीने की मेहनत, 3 राज्यों के 100 मजदूरों ने बनाया मध्य प्रदेश, राजस्थान और गुजरात के 100 से अधिक मजदूरों ने 2 साल 4 महीने की मेहनत के बाद इस लोक को तैयार किया है। कॉरिडोर में गार्डन, सरोवर, भक्ति सामग्री की दुकानें और रेस्टोरेंट जैसी सुविधाएं भी विकसित की गई हैं। प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशाल प्रतीक्षालय, प्राथमिक चिकित्सा कक्ष, अलग से पार्किंग व्यवस्था, भोजनशाला और अतिथि विश्राम गृह बनाए हैं। सुरक्षा के लिए अनाउंसमेंट सिस्टम और अत्याधुनिक सीसीटीवी नेटवर्क से लैस विशेष कंट्रोल रूम तैयार किया गया है। सीएम के दौरे को देखते हुए प्रशासनिक अधिकारी लगातार निरीक्षण कर रहे हैं। गर्भगृह में प्रवेश बंद, ASI ने किया संरक्षण भगवान पशुपतिनाथ की प्राचीन प्रतिमा के संरक्षण के लिए पश्चिम बंगाल से आई भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की टीम ने विशेष कार्य किया है। प्रतिमा पर आए स्क्रैच (खरोंच) की मरम्मत की गई है। हाल ही में पूरे हुए इस संरक्षण कार्य के चलते फिलहाल गर्भगृह में भक्तों का प्रवेश प्रतिबंधित रखा गया है। श्रद्धालु बाहर से ही बाबा के दर्शन कर रहे हैं।
इतिहासकारों के अनुसार यह प्रतिमा विक्रम संवत 575 (ईस्वी) की है। 1940 में उदाजी धोबी को शिवना नदी में इसके दर्शन हुए थे। 21 साल खुले में रहने के बाद 1961 में मंदिर बनने पर इसकी प्राण-प्रतिष्ठा हुई। देखिए कल रात की 2 तस्वीरें…