यमुनानगर जिले में सिजेरियन ऑपरेशन के दौरान महिला के गर्भ में सर्जिकल स्पंज (पट्टी) छोड़ने और बाद में झूठी अल्ट्रासाउंड व सीटी स्कैन रिपोर्ट बनाकर सच्चाई छिपाने के सनसनीखेज मेडिकल लापरवाही मामले में आखिरकार आठ माह बाद केस दर्ज हो गया है। कैबिनेट मंत्री कृष्ण कुमार बेदी के सख्त आदेशों के बाद पुलिस ने एसपी अस्पताल जगाधरी की महिला डॉक्टर डॉ. सोना गोयल(मुख्य आरोपी), उनके पति डिप्टी CMO डॉ. अनुप गोयल, इमेजिंग एंड डायग्नोस्टिक सेंटर के डॉ. प्रदीप तेहलान, मेहता अल्ट्रासाउंड सेंटर के डॉ. निखिल मेहता और मॉडल टाउन स्थित चड्ढा अस्पताल के डॉ. कुलदीप चड्ढा के खिलाफ विभिनन धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अल्ट्रासाउंड और सिटी स्कैन की झूठी रिपोर्ट आरोप है कि आरोपियों ने मिलीभगत कर न सिर्फ ऑपरेशन के दौरान की गई गंभीर लापरवाही को छिपाया, बल्कि बार-बार झूठी अल्ट्रासाउंड और सीटी स्कैन रिपोर्ट बनाकर पीड़िता को गुमराह किया, गलत इलाज की ओर धकेला और उसकी जान को गंभीर खतरे में डाल दिया। आराेपियों के खिलाफ केस दर्ज होने पर पीड़िता 21 वर्षीय मेहर खातून पत्नी ओसामा निवासी गांव बीबीपुर जगाधरी ने कहा कि लंबे संघर्ष के बाद उन्हें इंसाफ की उम्मीद जगी है। पीड़िता के पति ओसामा ने बताया कि उसकी पत्नी पूरी तरह स्वस्थ थी और गर्भावस्था के दौरान कोई गंभीर समस्या नहीं थी। परिवार को उम्मीद थी कि एक निजी अस्पताल में बेहतर इलाज मिलेगा, लेकिन वही अस्पताल उनकी जिंदगी का सबसे बड़ा दर्द बन गया। कहां और कब हुआ ऑपरेशन ओसामा के अनुसार, 12 मार्च 2025 को वह अपनी गर्भवती पत्नी मेहर को चेकअप के लिए जगाधरी स्थित एसपी अस्पताल लेकर गया था। डॉक्टरों ने जांच के बाद सिजेरियन डिलीवरी की सलाह दी और मेहर को अस्पताल में भर्ती कर लिया गया। अगले दिन 13 मार्च 2025 को सुबह करीब 8:40 बजे से 9:15 बजे के बीच महिला डॉक्टर डॉ. सोना गोयल ने सिजेरियन ऑपरेशन किया। आरोप है कि ऑपरेशन के दौरान उसके पति डॉ. अनूप गोयल जो कि डिप्टी सिविल सर्जन भी शामिल थे। ऑपरेशन में मेहर ने एक स्वस्थ बेटे को जन्म दिया, परिवार ने राहत की सांस ली और डॉक्टरों पर पूरा भरोसा जताया। ऑपरेशन और इलाज पर करीब 70 हजार रुपए खर्च हुए। 15 मार्च 2025 को मेहर को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। ऑपरेशन के बाद बिगड़ी हालत शुरुआत में सब कुछ ठीक लग रहा था, लेकिन कुछ दिनों बाद मेहर को टांकों के आसपास तेज दर्द, सूजन और कमजोरी महसूस होने लगी। 1 अप्रैल 2025 को दर्द असहनीय होने पर परिजन उसे बुड़िया गांव स्थित एक निजी अस्पताल लेकर पहुंचे। वहां के डॉक्टर ने अल्ट्रासाउंड कराने की सलाह दी। डायग्नोस्टिक सेंटरों पर मिलीभगत का आरोप ओसामा ने बताया कि वह 3 अप्रैल 2025 को जगाधरी-यमुनानगर रोड स्थित एक डायग्नोस्टिक सेंटर पहुंचे। आरोप है कि अल्ट्रासाउंड के दौरान डॉक्टरों को महिला के गर्भ में सर्जिकल स्पंज होने का अंदेशा हो गया था, इसके बावजूद सच्चाई छिपा ली गई। पीड़ित परिवार का आरोप है कि डॉ. प्रदीप तेहलान (इमेजिंग एंड डायग्नोस्टिक सेंटर) ने मुख्य आरोपी महिला डॉक्टर डॉ. सोना गोयल से मिलीभगत कर जान बूझकर नॉर्मल अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट बना दी। रिपोर्ट में कहा गया कि टांकों में केवल पस है और उसी डॉक्टर के पास इलाज करवाने की सलाह दी गई, जहां ऑपरेशन हुआ था। रिपोर्ट नॉर्मल होने के कारण परिजन भ्रमित हो गए और बुड़िया के उसी अस्पताल में वापस चले गए। वहां डॉक्टर ने केवल पस का इलाज किया और मेहर को 18 अप्रैल तक भर्ती रखा। बार-बार की जांच, फिर भी छिपाई सच्चाई ओसामा ने बताया कि अस्पताल से डिस्चार्ज के बाद भी मेहर की हालत में सुधार नहीं हुआ। इसके बाद फिर से यमुनानगर के एक अन्य अस्पताल में अल्ट्रासाउंड कराया गया। यहां भी आरोप है कि डॉक्टर ने सच्चाई जानते हुए भी गर्भ में पट्टी होने की बात छिपाई और नॉर्मल रिपोर्ट दे दी। इस बार कहा गया कि यूटेरस में पस की वजह से गैस बन गई है और छोटा सा ऑपरेशन उसी अस्पताल में करवाना बेहतर रहेगा, जहां से यह पूरा मामला शुरू हुआ था। सीटी स्कैन में भी खेल 21 मई 2025 को मेहर की हालत अचानक फिर से बिगड़ गई। उसे दोबारा बुड़िया स्थित निजी अस्पताल ले जाया गया। वहां डॉक्टर ने इस बार सीटी स्कैन कराने की सलाह दी। 22 मई को परिजन उसे फिर उसी यमुनानगर के डायग्नोस्टिक सेंटर ले गए। आरोप है कि यहां भी पहले से मिलीभगत के चलते डॉ. निखिल मेहता (मेहता अल्ट्रासाउंड सेंटर) ने सच्चाई छिपाते हुए रिपोर्ट में लिखा कि यूटेरस में पस के कारण रसौली बन गई है और ऑपरेशन जरूरी है। यहां से भी मरीज को मुख्य आरोपी महिला डॉक्टर के अस्पताल में इलाज कराने की सलाह दी गई। डर का माहौल, ऑपरेशन का दबाव परिजनों के मना करने पर डायग्नोस्टिक सेंटर के डॉक्टर ने कहा कि फिर आप मॉडल टाउन स्थित चड्ढा अस्पताल चले जाइए, वहां के डॉक्टर से बात हो चुकी है। 23 मई को पीड़िता को वहां ले जाया गया। आरोप है कि डॉ. कुलदीप चड्ढा को सच्चाई पहले से पता थी, फिर भी उन्होंने परिवार को डराया कि यूटेरस में गैस का गोला बन गया है, जो कभी भी फट सकता है और महिला की जान जा सकती है। इमरजेंसी ऑपरेशन का दबाव बनाया गया। डर के बावजूद परिजन वहां से बिना इलाज कराए लौट आए। पंचकूला में खुली सच्चाई, काटनी पड़ी आंत पीड़िता की लगातार बिगड़ती हालत को देखते हुए परिवार उसी दिन उसे पंचकूला के सेक्टर-26 स्थित ओजस अस्पताल लेकर पहुंचा। यहां जब सभी आधुनिक जांच की गई, तो डॉक्टर यह देखकर हैरान रह गए कि महिला के गर्भ में लंबे समय से सर्जिकल स्पंज (कॉटन पट्टी) फंसी हुई है, जिससे गंभीर संक्रमण फैल चुका है। 24 मई 2025 को मेहर का इमरजेंसी ऑपरेशन किया गया। इस दौरान डॉक्टरों को उसकी आंतों को भी काटना पड़ा, ताकि फंसी हुई पट्टी को बाहर निकाला जा सके। डॉक्टरों ने साफ कहा कि अगर कुछ दिन और देरी हो जाती, तो महिला की जान नहीं बच पाती। संक्रमण इतना फैल चुका था कि करीब तीन महीने बाद आंत जोड़ने का एक और बड़ा ऑपरेशन करना पड़ा। परिजनों का कहना है कि इस पूरे इलाज और भागदौड़ में उनके करीब 10 लाख रुपये खर्च हो चुके हैं। आर्थिक, मानसिक और शारीरिक रूप से परिवार पूरी तरह टूट चुका है। ग्रीवेंस कमेटी में उठा मुद्दा आरोपी डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर भारी संख्या में परिजन व ग्रामीण जून 2025 में डीसी से मिलने पहुंचे। जहां डीसी ने मामले में एक जांच कमेटी गठित की। लंबे समय तक कमेटी द्वारा कोई कार्रवाई न होने पर मामला ग्रीवेंस कमेटी की बैठक में पहुंचा। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री कृष्ण कुमार बेदी की अध्यक्षता में हुई ग्रीवेंस कमेटी की बैठक में तीन बार भी उठा। कमेटी की जांच में लापरवाही की पुष्टी हुई, तो मंत्री ने इसे बेहद गंभीर मानते हुए एसपी को सभी आरोपी डॉक्टरों के खिलाफ केस दर्ज करने के आदेश दिए और कहा कि दोषियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। लापरवाही साबित होने पर FIR के आदेश डीसी ने पहले ही पांच सदस्यीय जांच कमेटी गठित की हुई थी। जांच में यह तो साबित हो गया है कि ऑपरेशन के दौरान गर्भ में पट्टी छोड़ी गई, हालांकि जिम्मेदारी तय करने को लेकर रिपोर्ट पर सवाल उठे, जिसके बाद मंत्री ने पिछले माह हुई बैठक में सीधे FIR के आदेश दिए। मंत्री के आदेश में जगाधरी सिटी थाना पुलिस ने डॉ. सोना गोयल – एस.पी. अस्पताल, जगाधरी (मुख्य आरोपी), डॉ. अनुप गोयल – डिप्टी CMO, सिविल अस्पताल यमुनानगर (डॉ. सोना गोयल के पति), डॉ. प्रदीप तेहलान – इमेजिंग एंड डायग्नोस्टिक सेंटर, डॉ. निखिल मेहता मेहता अल्ट्रासाउंड सेंटर व डॉ. कुलदीप चड्ढा – चड्ढा अस्पताल, मॉडल टाउन, जगाधरी के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है।
यमुनानगर में मंत्री के आदेश पर 5 डॉक्टरों पर FIR:ऑपरेशन में महिला के गर्भ में छोड़ी पट्टी, संक्रमण फैला; काटनी पड़ी आंत
