हिसार में जाट सेवक संघ की बैठक में हंगामा:यशपाल मलिक को हटाने पर दो गुट आमने- सामने, बल्हारा बोले- कोई पद ग्रहण नहीं करेंगे

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हिसार की जाट धर्मशाला में शनिवार को जाट सेवक संघ की बैठक उस समय विवादों में घिर गई जब यशपाल मलिक को लेकर दो गुट आमने-सामने आ गए। बैठक में कुछ खाप प्रतिनिधियों और समाज के लोगों को आमंत्रित किया गया था। बैठक के दौरान यशपाल मलिक को ट्रस्ट से हटाने की मांग उठी, जिसके बाद उनके समर्थकों ने विरोध जताया। आरोप है कि इस दौरान तीखी बहस और नारेबाजी हुई, जिससे माहौल तनावपूर्ण हो गया और बैठक बीच में ही स्थगित करनी पड़ी। बैठक में मौजूद लोगों के अनुसार, जैसे ही हटाने का प्रस्ताव सामने आया, यशपाल गुट के समर्थकों ने अपनी बात रखने की मांग की। इसी दौरान दोनों पक्षों में बहस तेज हो गई। आरोप है कि माइक छीने गए और हंगामे की स्थिति बन गई। हालात बिगड़ते देख आयोजकों ने बैठक स्थगित करने की घोषणा कर दी। जाट महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक बल्हारा ने आरोप लगाया कि जाट आंदोलन के दौरान 18 मार्च 2017 की रात को यशपाल मलिक ने दिल्ली कूच से पहले सरकार से अकेले में समझौता किया, ताकि उनका व्यक्तिगत कारोबार सुरक्षित रहे और जींद थाने में दर्ज देशद्रोह के मामले को खत्म करवाया जा सके। उन्होंने कहा कि 19 मार्च 2017 को किया गया समझौता आज तक लागू नहीं हुआ और यह समाज की आंखों में धूल झोंकने जैसा था। प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दिया सभी पदों से इस्तीफा बल्हारा ने किसान आंदोलन का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि 2 अक्टूबर 2021 को नांगलोई जाट धर्मशाला में बैठक कर किसान आंदोलन को कमजोर करने के लिए जाट आरक्षण आंदोलन का एजेंडा रखा गया। उन्होंने कहा कि उन्होंने इसका विरोध किया और मलिक को “सरकार का एजेंट” बताते हुए सैकड़ों साथियों के साथ बैठक से बाहर आ गए। इसके बाद 3 अक्टूबर 2021 को चंडीगढ़ में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर संघर्ष समिति और जाट सेवा संघ के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया। अशोक बल्हारा ने ऐलान किया कि वे भविष्य में छोटूराम धाम में कोई पद ग्रहण नहीं करेंगे, लेकिन तन,मन और धन से धाम के लिए काम करते रहेंगे। बैठक में यह भी कहा गया कि समाज के साथ धोखा करने वाले व्यक्ति के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे। 7 मार्च को बुलाई जाएगी महापंचायत वहीं, हुड्डा खाप के प्रधान ओमप्रकाश हुड्डा ने घोषणा की कि 7 मार्च 2026 को जसिया स्थित छोटूराम धाम में उत्तर भारत की सभी खापों की महापंचायत बुलाई जाएगी। इसके बाद यशपाल मलिक समर्थक गुट जाट धर्मशाला से निकलकर पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस पहुंचा, जहां उन्होंने अलग से प्रेस वार्ता कर अपनी सफाई दी। अखिल भारतीय जाट संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रताप सिंह दहिया ने कहा कि पूर्व चेयरमैन रणधीर सिंह और दो अन्य ट्रस्टी अब पद पर नहीं हैं और अधिकांश ट्रस्टी उनके साथ हैं। उन्होंने कहा कि वे बैठक में “हेल्दी डिस्कशन” के लिए पहुंचे थे, लेकिन उन्हें अपनी बात रखने का अवसर नहीं दिया गया। दहिया ने बताया कि जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान एकत्रित चंदे से पहले 16 एकड़ और बाद में 25 एकड़ भूमि खरीदी गई। ट्रस्ट के नियमों के तहत ट्रस्टी का कार्यकाल पांच वर्ष का होता है और चुनाव नहीं, बल्कि चयन की प्रक्रिया अपनाई जाती है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग ट्रस्ट के नियम बदलकर चुनाव प्रणाली लागू करना चाहते हैं, जिससे संस्था का स्वरूप बदल जाएगा। चंदे के हिसाब को लेकर उठे सवाल चंदे के हिसाब को लेकर उठे सवालों पर दहिया ने कहा कि अब तक करीब 28 करोड़ रुपये एकत्रित हुए हैं और इसका नियमित हिसाब ऑनलाइन उपलब्ध कराया जाता है। उन्होंने किसी भी प्रकार के गबन से इनकार किया। कोचिंग प्रोजेक्ट में घाटे की बात स्वीकार करते हुए कहा कि यह निर्णय छात्रों के हित में लिया गया था।