हरियाणा के पानीपत में एक चार साल की बच्ची ने खेले-खेल में लोहे की कील निगल ली। यह कील पेट के अंदर जाकर उसकी आंत में फंस गई। पेट में दर्द उठने पर बच्ची ने इसकी जानकारी माता-पिता को दी। दर्द से राहत नहीं मिलने पर पेट का एक्सरे कराया गया तो कील के आंत में फंसा होने का पता चला। करीब तीन सेंटीमीटर लंबी यह कील इस तरह फंसी थी, जिस कारण बच्ची को बेहद दर्द हो रहा था। डॉक्टर ने बताया कि कील निकालने में कई जटिलताएं है। इससे परिवार घबरा गया। उन्होंने तीन अस्पतालों में इसकी जांच कराई, लेकिन तीनों ही जगह के डॉक्टरों ने मासूम की उम्र और कील के आंत में फंसे होने के कारण अपने हाथ खड़े कर दिए गए। इसके बाद परिवार बच्ची को लेकर पानीपत के एक सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में पहुंचा, जहां गैस्ट्रोएंटरोलॉजी (पाचन तंत्र विशेषज्ञ) विभाग की टीम ने तुरंत मोर्चा संभाला और बिना सर्जरी किए सफलता पूर्वक कील को बाहर निकाला। इसके बाद बच्ची को दर्द से राहत मिली। यहां सिलसिलेवार ढंग से जानिए पूरा मामला… अब यहां जानिए कैसे निकाली गई कील… सर्जरी के बजाय ‘एंडोस्कोपिक रिमूवल’ तकनीक अपनाई
डॉ. माधव और उनकी टीम ने तय किया कि वे पारंपरिक सर्जरी के बजाय ‘एंडोस्कोपिक रिमूवल’ का प्रयास करेंगे। एंडोस्कोपी एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें मुंह के रास्ते एक लचीली ट्यूब डाली जाती है, जिसके आगे कैमरा और पकड़ने वाले उपकरण लगे होते हैं। एक छोटे बच्ची की संकरी भोजन नली और आंतों में इस प्रक्रिया को अंजाम देना “सुई में धागा पिरोने” जैसा चुनौतीपूर्ण था। बिना सर्जरी सफल उपचार, 24 घंटे में ही बच्ची को दी छुट्टी
डॉ. माधव ने बताया कि अत्यंत कुशलता और धैर्य के साथ उनकी टीम ने एंडोस्कोप की मदद से कील को पकड़ा और धीरे-धीरे उसे बिना किसी आंतरिक चोट के बाहर निकाल लिया। प्रक्रिया सफल रही और बच्ची कुछ ही घंटों में दर्द से मुक्त हो गई। उसकी रिकवरी इतनी तेज थी कि उसे मात्र 24 घंटे के भीतर अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। —————- ये खबर भी पढ़ें… 2 साल की बच्ची के गले में फंसा क्लेचर:मुंह से खून निकलने लगा, सांस नहीं ले पा रही थी; एक्स-रे में नजर नहीं आया यूपी के संतकबीरनगर में खेल-खेल में 2 साल की बच्ची ने क्लेचर मुंह में डाल लिया। क्लेचर उसके गले में फंस गया। सांस फूलने लगी तो बच्ची रोने लगी। मां ने देखा तो बच्ची के मुंह से खून निकल रहा था। (पूरी खबर पढ़ें)
पानीपत में 4 वर्षीय बच्ची ने निगली कील:आंत में फंसी, दर्द उठा तो पता चला, बिना सर्जरी निकाली; 3 अस्पतालों ने खड़े किए थे हाथ
