नारनौल में पूर्व मंत्री ने इंद्रजीत को कहा बब्बर शेर:बिना नाम लिए अभय बोले-राजनीति निजी जागीर समझ बैठे, जो सामने आए उसका शिकार करते

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नारनौल में पूर्व मंत्री डॉ. अभय सिंह ने रविवार को अपनी ही पार्टी के केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह पर बिना नाम लिए तीखा हमला बोला। गांव भुंगारका में आयोजित नववर्ष मिलन समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने राव इंद्रजीत सिंह को “बब्बर शेर” तक कह दिया। उन्होंने कहा कि कुछ नेताओं की आदत शिकार करने की बन चुकी है। अहीरवाल की राजनीति को लेकर डॉ. अभय सिंह ने कहा कि क्षेत्र की राजनीति को कुछ लोग अपनी निजी जागीर समझ बैठे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे नेता नए लोगों, विशेषकर युवाओं को आगे बढ़ने का अवसर नहीं दे रहे हैं। डॉ. अभय सिंह के अनुसार, अहीरवाल की राजनीति में “बब्बर शेर” बनकर कुछ नेता दूसरों का शिकार करते हैं और उनके लिए अपने-पराए का कोई भेद नहीं रह गया है। इस कार्यक्रम में महेंद्रगढ़ के विधायक कंवर सिंह भी मौजूद रहे। विरासत खतरे में न आए, इसलिए​ सामान्य व्यक्ति को हटा देते डॉ. अभय सिंह ने कहा कि जब भी कोई सामान्य परिवार का व्यक्ति राजनीति में कुछ करने की सोच के साथ आगे आता है, तो उसे केवल इस डर से रास्ते से हटा दिया जाता है कि कहीं वह भविष्य में उनकी विरासत के लिए खतरा न बन जाए। उन्होंने सवाल उठाया कि यह सिलसिला आखिर कब तक चलेगा। उन्होंने कहा कि अगर राजनीति में केवल एक ही परिवार की खुशामद करने वालों को ही जगह मिलेगी, तो क्षेत्र की राजनीति किस दिशा में जाएगी, यह जनता को सोचना होगा। 50 साल में नहीं कराया कोई काम पूर्व मंत्री ने राव इंद्रजीत सिंह की उपलब्धियों पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर समर्थक यह जरूर गिनाते हैं कि कोई नेता पांच बार सांसद रहा, तीन बार मंत्री रहा या विधायक रहा, लेकिन यह भी बताना चाहिए कि 50 साल तक सत्ता में रहने के बाद इलाके के लिए ठोस काम क्या किए गए। उन्होंने कहा कि जब इन सवालों पर चर्चा शुरू होती है, तो कुछ लोगों को असहजता होने लगती है। सीएम बनने का देखते हैं सपना डॉ. अभय सिंह ने राव इंद्रजीत सिंह के मुख्यमंत्री बनने की चर्चाओं पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि वे मुख्यमंत्री बनने के सपने देखते हैं। कई सालों से विधायकों से सीएम के खिलाफ बुलवाते हैं। कभी वर्करों से कुछ करवाते हैं। कभी अलग संगठन खड़ा करते हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री कोई खुद नहीं बनता, बल्कि पार्टी हाईकमान बनाता है। पार्टी की अपनी मर्यादाएं और प्रक्रियाएं होती हैं, जिनके तहत निर्णय लिया जाता है। एक हाउस नेताओं की नहीं मुर्गों की नर्सरी उन्होंने सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो का जिक्र करते हुए कहा कि किसी ने एक “हाउस” को नेताओं की नर्सरी बताया, जिस पर उन्हें हंसी आई। उन्होंने कहा कि नर्सरी सिर्फ पौधों की नहीं, मुर्गों की भी होती है और जनता तय करेगी कि कौन-सी नर्सरी चलाई जा रही है। वोट जनता का अधिकार, किसी की ठेकेदारी नहीं उन्होंने कहा कि उनका एक कार्यकर्ता लिखता है कि भाजपा को सीधे वोट नहीं देना, इससे पार्टी का कोई एहसान नहीं है, वोट उनके नेता के माध्यम से दें, ताकि अहसान बना रहे। उन्होंने कहा कि वोट जनता का अधिकार है, न कि किसी व्यक्ति की ठेकेदारी। अगर एक व्यक्ति को वोटों का ठेकेदार बना दिया जाएगा, तो लोकतंत्र कहां तक बचेगा। एक घर की जेब में बंद हो गई राजनीति डॉ. अभय सिंह ने युवाओं से अपील करते हुए कहा कि वे विचार करें कि क्या क्षेत्र की राजनीति को एक घर की जेब में बंद कर देना सही है। उन्होंने कहा कि उन्हें चुनाव हारने का दुख नहीं है, बल्कि चुनाव के दौरान फैलाए गए जुमलों और साजिशों का दुख है। उन्होंने आरोप लगाया कि जातिवाद फैलाया गया, कुछ गांवों में यह कहा गया कि वह किसी विशेष जाति के नेता हो गए हैं, जबकि विधायक की कोई जाति नहीं होती। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी के भीतर ही कुछ बड़े नेताओं ने उनके खिलाफ काम किया और षड्यंत्र रचकर उन्हें हराया।