साल 2026 का पहला चंद्रग्रहण मंगलवार दोपहर 3.21 बजे शुरू होकर शाम 6.47 बजे तक रहा। मध्य प्रदेश में यह सबसे पहले सिंगरौली में 6 बजकर एक मिनट पर दिखा। पूर्णग्रहण की कुल अवधि 58 मिनट रही, लेकिन भारत में चंद्रोदय के समय तक इसका ज्यादातर हिस्सा बीत चुका था। चंद्रग्रहण मध्य प्रदेश के पूर्वी जिलों में करीब 40 से 45 मिनट तक दिखा जबकि पश्चिमी जिलों में यह अवधि करीब 10 मिनट के आसपास रही। विज्ञान प्रसारिका सारिका घारू के अनुसार, चंद्रमा पृथ्वी की पूर्ण छाया से होकर गुजरा। इस दौरान पृथ्वी का वायुमंडल सूर्य की नीली रोशनी को बिखेर देता है और केवल लाल प्रकाश चंद्रमा तक पहुंचता है। इसी कारण पूर्ण चंद्रग्रहण के दौरान चंद्रमा तांबे या गहरे लाल रंग का दिखाई देता है, जिसे ‘ब्लड मून’ भी कहा जाता है। सूतक खत्म होने के बाद प्रदेशभर के मंदिरों में साफ-सफाई शुरू हुई। जल शुद्धिकरण के बाद मंदिरों के पट खोले गए। पूजा-पाठ की गई। चंद्रग्रहण क्या होता है? गुरुत्वाकर्षण बल यानी ग्रेविटेशनल फोर्स की वजह से पृथ्वी और सभी दूसरे ग्रह सूर्य के चारों ओर चक्कर लगाते हैं। पृथ्वी, 365 दिन में सूर्य का एक चक्कर लगाती है जबकि चंद्रमा एक प्राकृतिक उपग्रह है, जो पृथ्वी के चारों ओर चक्कर लगाता है। उसे पृथ्वी का एक चक्कर लगाने में 27 दिन लगते हैं। सूर्य के चक्कर लगाने के दौरान कई बार ऐसी स्थिति बनती है, जब पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा के बीच में आ जाती है। इस दौरान सूर्य का प्रकाश चंद्रमा तक नहीं पहुंच पाता है और पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ने से चंद्रग्रहण होता है। चंद्रग्रहण की घटना तभी होती है, जब सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा एक सीध में हों, खगोलीय विज्ञान के अनुसार ये केवल पूर्णिमा के दिन ही संभव होता है। इसी वजह से ज्यादातर चंद्रग्रहण केवल पूर्णिमा के दिन होते हैं। चंद्रग्रहण से जुड़े अपडेट्स जानने के लिए नीचे दिए लाइव ब्लॉग से जरूर गुजर जाइए…
MP में सबसे पहले सिंगरौली में दिखा चंद्रग्रहण:सबसे आखिरी में आलीराजपुर में नजर आया; शुद्धिकरण के बाद मंदिरों के पट खुले
