छतरपुर, मध्य प्रदेश में भू-माफियाओं ने एक मृत व्यक्ति को कागजों में जीवित दिखाकर करोड़ों रुपए की सरकारी जमीन बेच दी। जमानत पर बाहर आने के बाद इन्हीं जालसाजों ने उसी जमीन का दोबारा 2 करोड़ रुपए में सौदा किया। यह मामला बमीठा थाना क्षेत्र के शिवराजपुर का है। वर्ष 1990 में शासन ने रामसेवक तिवारी को खेती के लिए जमीन का पट्टा दिया था। रामसेवक तिवारी की मौत 1996 में हो गई थी, जिसके बाद यह जमीन सरकारी रिकॉर्ड में वापस दर्ज होनी चाहिए थी। हालांकि, वर्ष 2013 में भू-माफियाओं ने 20 साल पहले मृत रामसेवक को कागजों में फिर से जीवित दिखा दिया। बिना मृत्यु प्रमाण पत्र की जांच या रिकॉर्ड के मिलान के इस सरकारी जमीन की रजिस्ट्री निजी नामों पर कर दी गई। 2 दो साल पहले हुई FIR, हाईकोर्ट से बेल स्थानीय निवासी ओमप्रकाश पाठक ने इस धोखाधड़ी के खिलाफ न्यायालय का रुख किया। इसके बाद वर्ष 2024 में एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए गए। बमीठा थाने में धांधू कुशवाहा, गिरजू कुशवाहा और कमलेश कुशवाहा सहित सात लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश का मामला दर्ज किया गया। दिसंबर 2025 में, जब आरोपी जबलपुर हाईकोर्ट से जमानत पर रिहा हुए। दो करोड़ में फिर बेची आरोपियों इसके बाद उसी विवादित जमीन को दोबारा बेचने की योजना बनाई। इस बार जंगल कैंपस इंडिया लिमिटेड नामक कंपनी को लगभग 2 करोड़ रुपए में जमीन बेचने का सौदा किया गया। जनवरी 2026 में कंपनी द्वारा रकम ट्रांसफर करने और रजिस्ट्री प्रक्रिया शुरू होने पर यह मामला सामने आया। दस्तावेजों की गहन जांच में पता चला कि यह जमीन पहले से ही सरकारी है और धोखाधड़ी के दायरे में आती है।14 जनवरी 2026 को कंपनी के डायरेक्टर गजेंद्र सिंह ने बमीठा थाने में शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद पुलिस ने अवैध बिक्री और जालसाजी की नई धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। आरोपी पक्ष बोला- उन्हें फंसाया जा रहा है इस पूरे मामले में आरोपी किसान पक्ष का कहना है कि उन्हें फंसाया जा रहा है। उनका तर्क है कि पुलिस ने जांच के बाद पटवारी और तहसीलदार का नाम हटा दिया है, जो यह साबित करता है कि राजस्व प्रक्रिया सही थी। किसानों का आरोप है कि यह पूरा विवाद पैसे की वापसी और समझौते के अधूरे कागजों की वजह से पैदा हुआ है। फिलहाल बमीठा पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। चार लोगों पर केस दर्ज
बमीठा थाना प्रभारी आशुतोष सिंह श्रोत्रिय ने बताया जमीन संबंधी धोखाधड़ी और फर्जी दस्तावेज तैयार करने के मामले में कई आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। 14 जनवरी 2026 को एक फरियादी की शिकायत पर जांच के बाद, पुलिस ने जमीन की धोखाधड़ी और कूटरचित (फर्जी) दस्तावेज तैयार करने के आरोप में मामला दर्ज किया है। इन चारों कुशवाहा भाइयों (खड़िया, धांधू, कमलेश और गिरजू) ने साल 2013 में एक मृत व्यक्ति को जीवित बताकर धोखाधड़ी से जमीन खरीदी थी।
छतरपुर में मुर्दे को जिंदा कर बेची सरकारी जमीन:जालसाजों ने करोड़ों की भूमि का दो बार सौदा किया; पुलिस ने की FIR दर्ज
