चंडीगढ़ में 2 साल जेल काटकर बेगुनाह निकली बेटी:पिता के ही मर्डर केस में कैद थी; कोर्ट में मुख्य गवाह पलटा, पुलिस को लगी फटकार

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चंडीगढ़ में पिता की हत्या के आरोप में गिरफ्तार बेटी आशा को चंडीगढ़ जिला अदालत ने 2 साल बाद बरी कर दिया है। केस के मुख्य गवाह के बयान से मुकरने के बाद ये फैसला आया। कोर्ट ने पुलिस की कार्रवाई पर भी सवाल उठाए और कहा कि जब कोई गवाह ही नहीं था तो जबरन बेटी को क्या जेल में रखा। मुख्य गवाह गुलाब सिंह ने कोर्ट में कहा- उसने न तो बेटी को अपने पिता की हत्या करते देखा और न ही उसने पुलिस को कभी ऐसा कोई बयान दिया था। उधर, बेटी के वकील ने पुलिस द्वारा दिए गए सबूतों पर भी सवाल उठाए। बता दें कि 10 अगस्त 2023 को किशनगढ़ गांव में सुमेई लाल नाम के व्यक्ति की चाकू से हमला कर हत्या कर दी गई थी। मामले में पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर मृतक की बेटी आशा को आरोपी बनाया था। दरअसल, उस समय गवाह गुलाब सिंह ने कहा था कि उसने बेटी को चाकू से हत्या करते देखा था। इस मामले में खास बात ये है कि जिस बेटी को पुलिस ने हत्यारोपी बताकर जेल भेजा था, वह दसवीं तक पढ़ी थी। सुमेई लाल के सात बच्चों में वह तीसरे नंबर की थी। फैसले को बाद परिवार का आरोप है कि पुलिस ने इस मामले में शुरू से ही लापरवाही बरती। उनकी बेटी निर्दोष थी, लेकिन पुलिस ने जांच के दौरान उनकी एक बात तक नहीं सुनी। उनके पास इतने पैसे भी नहीं थे कि बेटी की जमानत करा सके। परिवार का आगे कहना है कि बेटी के दो साल जेल में कटे, उनकी भरपाई कैसे होगी। समाज में जो नाम खराब हुआ, उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा। बेटी की शादी जैसी कई चिंताएं है, जो अब परिवार को परेशान कर रही है। पढ़ें बेटी के वकील ने क्या दलील दी और कोर्ट क्या बोला… जानिए क्या था पूरा मामला… कोर्ट में गवाह ने ऐसे पलटी पुलिस की कहानी…