नंदगांव और बरसाना लट्ठमार होली के लिए तैयार है। नंदगांव यानी जहां श्रीकृष्ण ने अपना बचपन बिताया। प्रभु के सखा स्वरूप में ग्वाले 8 Km दूर बरसाना पहुंचेंगे। बरसाना यानी जहां राधाजी रहती थीं। यहां राधा रानी की सखियों के स्वरूप में हुरियारने उन पर लाठियां बरसाएंगी। 25 फरवरी की दोपहर 12 बजे नंदगांव के हुरियारे बरसाना के पीली पोखर पहुंचेंगे। यहां पगड़ी बांधेंगे, श्रृंगार के बाद वह लाडलीजी के दर्शन करेंगे। इसके बाद करीब 3km के दायरे में फैली कुंज गलियों से वह गुजरेंगे। जब हुरियारने ग्वालों पर लाठियां बरसा रही होंगी, तब उन्हें देखने के लिए करीब 15 लाख टूरिस्ट बरसाना में मौजूद रहेंगे। लट्ठमार होली की परंपरा क्या है? बरसाना में सखियां और नंदगांव में ग्वालों की तैयारियां कैसी चल रही हैं? यह जानने के लिए दैनिक भास्कर ऐप टीम मथुरा राधा रानी के गांव बरसाना पहुंची। पढ़िए पूरी रिपोर्ट…
हुरियारनों की तैयारी पढ़िए… ब्रज दूल्हा मंदिर में हुरियारने लाठियों पर तेल लगाती मिलीं
बरसाना पहुंचने के बाद हमने लोगों से बात शुरू की। लट्ठमार होली की तैयारियां देखने कहां जा सकते हैं? हमें ब्रज दूल्हा मंदिर पहुंचने के लिए कहा गया। लोगों ने बताया- यहीं पर हुरियारन तैयारियां कर रही हैं। इस मंदिर पहुंचने के बाद हमें बताया गया यहीं पर पहली बार श्रीकृष्ण दूल्हा बनकर पहुंचे थे। इस मंदिर के कैंपस में हमें हुरियारन लाठियों पर तेल लगाती हुईं दिखीं। सबने लहंगा और फरिया पहना हुआ था। हाथ में एक-एक लाठी थी, महिलाएं होली के गाने गा रही थीं। माहौल में होली के रंग घुले से महसूस हो रहे थे। दिल्ली से आईं ज्योति बोलीं- राधा रानी की कृपा, जो मैं यहां की बहू बनी
यहां मौजूद इंदु गौड़ कहती हैं- जैसे-जैसे होली के दिन नजदीक आ रहे हैं। हमारा उत्साह बढ़ता जा रहा है। हमने पूछा- लाठियों पर तेल कब से लगाने लगती हैं? उन्होंने कहा- एक महीने पहले से लाठी पर तेल लगाने लगते हैं, ताकि मारते वक्त लचक रहे। फिर इन लाठियों को सजाते भी हैं। हमने पूछा कि लाठियों का साइज कैसे तय करते हैं? उन्होंने कहा- यह हुरियारन की लंबाई पर निर्भर करता है, ताकि वह आसानी से लाठी चला सके। उनके करीब ज्योति बैठी थीं। वो दिल्ली की रहने वाली हैं, कहती हैं- मैं पहली बार लट्ठमार होली खेलने जा रही हूं। हमेशा इस होली को वीडियो में देखा है, पहली बार यहां होली में शामिल होने का मौका मिल रहा है, ये मेरे लिए बहुत खुशी का मौका है। राधा रानी की ऐसी कृपा हुई कि बरसाना की बहू बनकर आ गई। हमने पूछा- 3 से 4 घंटे लाठी चला लेंगी? वह कहती हैं- परिवार की महिलाओं ने मेरी डाइट बदल दी है। पहले सादा खाना खाते थे, अब उसमें दूध, घी बढ़ा दिया गया है। सुबह नाश्ते में बादाम, मखाना मिल रहा है। हमारा तो परिवार ही इस बात का ख्याल रख रहा है कि लाठी की मार में दम लग सके और उस दिन थकावट न महसूस हो। किशोरी बोली- ये प्रिया और प्रियतम की होली
4 साल से लट्ठमार होली खेल रहीं किशोरी कहती हैं- ये तो प्रिया और प्रियतम की होली है। खुद राधा रानी ने अपनी सखियों के साथ प्रभु श्रीकृष्ण के साथ होली खेली थी, अब हमें सौभाग्य मिला है, 4 साल से होली खेल रही हूं, लेकिन हर बार उत्साह नया ही लगता है। वह कहती हैं- ब्रज की होली के लिए कहावत है, सब जग होरी या ब्रज होरा…कैसा यह देश निगोड़ा। मायने हैं, सब जगह होली एक या दो दिन खेली जाती है, लेकिन ब्रज में होली का उत्सव 40 दिन मनाया जाता है। बरसाना की लट्ठमार होली, इनमें सबसे खास है। सिर्फ बरसाना की बहू ही बनती है हुरियारन
महिलाओं ने बताया- बरसाना से करीब 1200 हुरियाने तैयार हो रही हैं। नए परिधान बनवाए जा रहे हैं। हमने पूछा- क्या कोई भी लड़की हुरियारन बन सकती है? विमला ने कहा- नहीं…। सिर्फ वही लड़की हुरियारन बनती है, जो बरसाना की बहू हो। कुंवारी लड़कियां इसमें शामिल नहीं होती। वो सिर्फ देखती हैं। ऐसा लगता है कि सभी श्रीकृष्ण की सखियां हैं। ग्वाल चिढ़ाएंगे तो उन्हें सबक सिखाने का मौका मिलेगा। सबका यही भाव रहता है।
नंदगांव के हुरियारे ढाल बरसाना में बनवाते हैं…
लट्ठमार होली में हुरियारों के लिए सबसे जरूरी है, उनकी ढाल। लाठियों के प्रहार से यही बचाती है, एक और खासियत यह है कि नंदगांव के हुरियारें ढाल तैयार करवाने के लिए बरसाना आते हैं। यहां के मेन बाजार में रमेश मिस्त्री की दुकान है। यहां एक और मजेदार फैक्ट पता चला। पूरे बरसाना में रमेश मिस्त्री ऐसे इकलौते कारीगर हैं, जो ढाल तैयार करते हैं। भास्कर टीम उनकी दुकान पहुंची। सामने आया कि सामान्य दिनों में वह गैस, गीजर, हीटर आदि की मरम्मत करते हैं, मगर होली से 45 दिन पहले ढाल बनाने और पुरानी ढालों की मरम्मत का काम शुरू कर देते हैं। रमेश मिस्त्री ने कहा- 70 सालों से हमारे परिवार में यही काम चलता आ रहा है। ढाल कैसे बनानी है, कैसे ठीक होगी? मजबूत ढाल के लिए क्या मेटेरियल बेहतर है? यह सब मैंने अपने पूर्वजों से सीखा। उन्होंने बताया कि ढाल करीब 8 Kg की होती है। इसलिए शरीर से ठीक-ठाक लोग ही इसको एक साथ से लेकर चल पाते हैं। ढाल का साइज छोटा-बड़ा हो सकता है, जोकि हुरियारे के शरीर पर निर्भर करता है। पहले एक ही तरह की ढाल बनती थी, जिनमें लेदर का इस्तेमाल होता था। अब ग्वाले तरह-तरह की ढालों की डिमांड करते हैं। इसमें हवा ढाल और LED लाइट ढाल की भी अब डिमांड होने लगी है। मगर सबसे ज्यादा सादी ढाल ही हुरियारे लेकर जाते हैं। अब नंदगांव के हुरियारों की बात… श्रीकृष्ण के सखा श्रृंगार करके पहुंचते हैं, होता है सत्कार
नंदगांव के सुशील गोस्वामी ने कहा- श्रीमदभागवत में भी जिक्र मिलता है कि जब श्रीकृष्ण का राधा रानी से विवाह हुआ। उसके बाद जिस तरह वह दूल्हे की तरह सजकर पहुंचे थे। सखियां गीत गाती हैं- चल री सखी ठाकुरजी दूल्हा बनकर आए। तब कोठे पर चढ़ी सखियां श्याम सुंदर पर फूल मारती हैं। अब भी वही परंपरा चली आ रही है। आज भी हुरियारे श्रीकृष्ण के सखा के रूप में नंदगांव से बरसाना आते हैं, दूल्हा की तरह श्रृंगार करते हैं। यहां राधा रानी की सखियां उनके ऊपर प्रेम के साथ लाठी मारती हैं।
निमंत्रण मिलने के बाद जाते हैं हुरियारे
किशोरी श्याम गोस्वामी कहते हैं- ब्रज की होली 40 दिन की होती है, बसंत से शुरू होता है, जोकि फाल्गुन पूर्णिमा तक चलता है। अब अष्टमी पर नंदगांव में नंदलाला के यहां हमारा फाग निमंत्रण जाता है। इसमें हम सखी के प्रतिनिधि के रूप में नंदबाबा के यहां जाते हैं कि हे कन्हैया आप अपने ग्वाल लेकर बरसाना आइए और होली खेलिए। उस दिन शाम को नंदगांव से एक संदेशवाहक बरसाना आता है। उसको हमारे यहां पाण्डेय कहा जाता है। श्री राधारानी मंदिर में लीला का मंचन होता है। इसके बाद हुरियारे बरसाना जाते हैं, फिर प्रेम पूर्वक प्रहार और बचने की रीति शुरू होती है। लट्ठमार होली पर रंगीली गली भी तैयार…
गली सजी, मगर VIP के लिए रिजर्व
अब हम लोग रंगीली गली पहुंचे। जहां लट्ठमार होली खेली जाती है। पहले बरसाना आने वाले श्रद्धालु इसी जगह पर लट्ठमार होली देखते थे। अब यह जगह VIP मूवमेंट के लिए रिजर्व कर दी गई है। मगर लट्ठमार होली के लिए रंगीली गली को सजाया और संवारा जा रहा है। यहां गलियों की दीवार पर लट्ठमार होली की पेंटिंग बनाई जा रही है। सड़कों की मरम्मत के काम पूरे हो चुके हैं। लोग रंगीली गली के आसपास, सुदामा चौक, राधा रानी चौक और बृज दूल्हा गली पर लट्ठमार होली देख सकते हैं। हालांकि पुलिस प्रशासन ने भीड़ ज्यादा होने की वजह से ज्यादा देर एक जगह पर खड़े होने की मनाही की है। मतलब लोग भी इन गलियों में चलते रहेंगे। इस बार लोगों को छतों पर भी बैठने से मना कर दिया गया है। ताकि हादसे से बचाया जा सके। श्रीजी मंदिर में होली का रसिया गायन हो रहा
रंगीली गली से आगे बढ़ते हुए करीब 300 सीढ़ी चढ़कर श्रीजी मंदिर पहुंचे। यहां मंदिर के अंदर समाज गायन चल रहा था। मंदिर के गोस्वामी आंगन में बैठकर श्रीजी के सामने होली के पदों को गा रहे थे। यह सिलसिला होली तक प्रतिदिन इसी तरह चलता है। श्रद्धालु राधा रानी की एक झलक पाने को आतुर रहते हैं। …. ये पढ़ें –
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जहां पूरी दुनिया में नया साल 1 जनवरी को मनाया जाता है। वहीं हिंदू धर्म में नववर्ष की शुरुआत चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से होती है। इस साल यह 19 मार्च को पड़ रही है। इस बार हिंदू नववर्ष की शुरुआत के साथ नव संवत्सर 2083 शुरू होगा। यह संवत्सर धार्मिक और पंचांग की दृष्टि से काफी खास माना जा रहा है। इस बार विक्रम संवत में 12 नहीं, 13 महीने होंगे। पढ़िए पूरी खबर….
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