पहाड़ों में पहले कैसे गांव होते थे आत्मनिर्भर, मिल जाते थे कामकाज के जरूरी औजार, कैसे कुछ बदला, जाने

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पहाड़ों के गांवों में कभी दरांती, कुदाल जैसे खेती के औजार गांव के कारीगर ही बनाया करते थे, इसे बनाने के लिए आफर लगाया जाता था. लेकिन समय के साथ यह पारंपरिक कला धीरे-धीरे खत्म होती जा रही है. पलायन और कम मुनाफे के कारण कारीगरों ने यह काम छोड़ दिया है, जिससे अब गांव के लोग खेती के औजार बाजार से खरीदने को मजबूर हो गए हैं.