मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले के गरोठ और शामगढ़ नगर में होली का उत्सव धूमधाम से मनाया गया। ग्रामीण क्षेत्रों में भी उत्साह देखा गया। इस वर्ष परंपरा के अनुसार, गरोठ नगर के 11 प्रमुख स्थानों पर होलिका दहन किया गया, जबकि थाना क्षेत्र में कुल 99 जगहों पर होलिका जलाई गई। यह आयोजन रात्रि लगभग 11:30 बजे से शुरू होकर 2:00 बजे तक चला। इससे पूर्व महिलाओं ने विशेष पूजा-अर्चना की। उन्होंने सूत, गेहूं की बालियां, कुमकुम और हल्दी जैसी सामग्री से होलिका की पूजा कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। गरोठ में प्रमुख होलिका दहन स्थलों में गांधी चौक, सब्जी मंडी, रामपुर दरवाजा, चौक, बोलिया रोड, बागड़ी मोहल्ला और रविदास मोहल्ला शामिल थे। अंत में, लगभग 2:00 बजे ब्राह्मण मोहल्ले की होलिका जलाई गई। शामगढ़ नगर में 13 स्थानों पर होलिका दहन किया गया, जिनमें शिव हनुमान मंदिर, सब्जी मंडी, आलमगढ़ और शामगढ़ गांव प्रमुख रहे। इस अवसर पर धार्मिक भजन-कीर्तन के साथ डीजे पर लोकप्रिय गाने भी बजाए गए, जिससे पूरे नगर में उत्साह का माहौल रहा। हिंदू धर्म में होलिका दहन को बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। यह फाल्गुन पूर्णिमा की पूर्व संध्या पर मनाया जाता है और इसका संबंध भक्त प्रह्लाद की पौराणिक कथा से है। पौराणिक कथा के अनुसार, असुर राजा हिरण्यकश्यप ने अपनी बहन होलिका को मिले वरदान का उपयोग कर प्रह्लाद को आग में जलाने का प्रयास किया था। हालांकि, भगवान विष्णु की कृपा से प्रह्लाद सुरक्षित रहे और होलिका स्वयं जल गई। इसी घटना की स्मृति में होलिका दहन किया जाता है, जिसमें लोग नकारात्मकता का दहन कर सकारात्मक ऊर्जा का आह्वान करते हैं। होलिका दहन के दौरान गोबर के उपले, कंडे, लौंग और गूलर की टहनियां अर्पित करने की परंपरा है, जिसे शुद्धि और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। मध्य प्रदेश में होली से जुड़ी कई अनोखी परंपराएं भी प्रचलित हैं, जिनमें आदिवासी क्षेत्रों में ‘होली का डंडा’ गाड़ना, इंदौर के राजवाड़ा पर 300 वर्ष पुरानी होली का आयोजन और कुछ गांवों में दुख बांटने की रस्म शामिल है। गरोठ में यह उत्सव सामुदायिक एकता और भक्ति का एक सुंदर उदाहरण प्रस्तुत करता है।
गरोठ-शामगढ़ में होलिका दहन:रात 11:30 से 2 बजे तक 11 प्रमुख स्थानों पर जली होली
