डिवीजन बेंच ने पाया कि दंप्रस की धारा 161 के तहत चश्मदीद गवाह के बयान जिस तरह से लिए गए, उससे साफ है कि एसआई संजय गुर्जर पुलिस वाले के बजाए वकील के रूप में उससे जिरह कर रहे थे। उनका मकसद यही था कि बयानों को इस तरह से दर्ज किया जाए, ताकि उसका फायदा आरोपी को ट्रायल के दौरान मिल सके।
सुनवाई के दौरान आवेदक के अधिवक्ता विशाल डेनियल ने कहा कि मामले का ट्रायल गुरुवार से निचली अदालत में शुरू हो गया है। इस पर बेंच ने कहा कि पूरा मामला ही दोषपूर्ण विवेचना पर आधारित है। ऐसे में बेहतर होगा कि उस ट्रायल पर रोक लगाई जाए, ताकि आरोपी को उसका फायदा न मिल सके। बेंच ने ट्रायल पर रोक लगाते हुए विवेचना अधिकारी को कहा कि वे इस आदेश से निचली अदालत को अवगत कराएं।
कोतवाली में रहने वाले सौरभ अग्रवाल की ओर से दायर अपील में कहा गया है कि 05 नवंबर 2024 की रात करीब 9:30 बजे वो अपनी पत्नी और 3 साल के बेटे के साथ ई स्कूटर से जा रहे थे। अहिंसा चौक स्थित पानी की टंकी के पास एक एसयूवी ने उनके वाहन को टक्कर मारी, जिससे उसका तीन साल का बेटा हवा में उछलकर गिर गया। आवेदक का आरोप है कि उन्होंने एसयूवी चला रहे व्यक्ति से गाड़ी न बढ़ाने की गुहार लगाई, लेकिन उसने जानबूझकर गाड़ी आगे बढ़ाकर उसकी पत्नी और बच्चे को कुचल दिया। इससे बच्चे की मौत हो गई, जबकि पत्नी गंभीर रूप से घायल हो गई। आरोपित की पहचान रेलवे के सेक्शन इंजीनियर विजयंत गंगेले के रूप में हुई, जो विजय नगर के ही एकता चौक में रहता है। आरपी है कि कोतवाली थाना पुलिस ने मामले को दबाते हुए हत्या के बजाए लापरवाही से हुई मौत का प्रकरण दर्ज किया। इसके खिलाफ दाखिल याचिका हाईकोर्ट की एकलपीठ से 4 अगस्त को खारिज होने पर यह अपील दायर की गई।
बेंच ने कहा कि इस मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित होना चाहिए। बेंच ने जबलपुर एसपी को कहा है कि वो 14 अक्टूबर को हाजिर रहें।
