यह आदेश न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन एवं न्यायमूर्ति अरुण कुमार की खंडपीठ ने मस्जिद की इंतजामिया कमेटी की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है।
याचिका के अनुसार अधिकारियों ने नोटिस के बाद मस्जिद का एक हिस्सा पहले ही ध्वस्त कर दिया था। सुनवाई के दौरान सरकारी वकील ने कहा कि ध्वस्तीकरण मस्जिद के पास की सड़क को चौड़ा करने के लिए किया गया और यह कार्य पहले ही पूरा हो चुका है।
याची के अधिवक्ता का कहना था कि यह सही नहीं है। ध्वस्तीकरण आगे भी होना है। यदि मस्जिद को संरक्षित नहीं किया गया तो अगली सुनवाई तक उसे और ध्वस्त किया जाएगा। इस पर सरकारी वकील ने कहा कि अगली सुनवाई तक संबंधित संरचना को और ध्वस्त नहीं किया जाएगा। यह वचन इस आदेश का हिस्सा है। कोर्ट ने कहा कि अगली सुनवाई होने तक मस्जिद में कोई और विध्वंस की कार्रवाई नहीं की जाएगी।”
हालांकि, सड़क चौड़ीकरण की तात्कालिकता और आवश्यकता को देखते हुए खंडपीठ ने निर्देश दिया कि मामले को 17 नवम्बर सूचीबद्ध किया जाए, ताकि राज्य सरकार निर्देश प्राप्त कर सके। फतेहपुर जिले के ललौली गांव स्थित नूरी जामा मस्जिद उस समय प्रचलित स्थापत्य शैली में निर्मित 180 साल पुरानी मस्जिद है।
