हरियाणा राज्यसभा चुनाव,क्रॉस-वोटिंग में फंसे विधायकों की जा सकती विधायकी:सिर्फ 1 वजह काफी, तब दलबदल कानून लगेगा; 2014 के सर्कुलर का भी पेंच

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हरियाणा राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोट करने वाले कांग्रेस विधायकों को पार्टी ने शोकॉज नोटिस जारी कर दिया है। बुधवार की सुबह ही पार्टी ने इन चार विधायकों के नाम जारी किए थे। दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर प्रभारी बीके हरिप्रसाद ने बताया कि नारायणगढ़ से शैली चौधरी, पुन्हाना से मोहम्मद इलियास, हथीन से मोहम्मद इसराइल और सढ़ौरा विधायक रेनू बाला ने क्रॉस वोटिंग की थी। हाईकमान भी इन विधायकों से बेहद नाराज है और जवाब तलब किया है। जवाब संतुष्ट नहीं मिलने पर निष्कासन की कार्रवाई भी की जा सकती है। हालांकि, इस सूरत में विधायकों की विधायकी सुरक्षित रहेगी, लेकिन एक ऐसी भी वजह भी है, जिसको नहीं मानने पर इन चारों विधायकों की विधायकी तक जा सकती है। इसके अलावा 2014 में केंद्रीय चुनाव आयोग की ओर से जारी किए गया एक सर्कुलर का पेंच भी राज्यसभा चुनाव में फंसा हुआ है। इसकी शिकायत भी केंद्रीय चुनाव आयोग तक पहुंच चुकी है। बताया गया है कि इस आदेश का भाजपा और कांग्रेस दोनों ने उल्लंघन किया है। यहां पढ़िए वो वजह, जिससे जा सकती है विधायकी… 1. इस वजह से विधायकी सेफ संवैधानिक मामलों के जानकार और पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट के एडवोकेट हेमंत कुमार ने बताया कि राज्यसभा चुनाव सदन की प्रक्रिया के अंतर्गत नहीं आता, इसलिए इसमें दल-बदल विरोधी कानून के प्रावधान लागू नहीं होते हैं। कांग्रेस क्रास वोट करने वाले चार विधायकों को कारण बताओ नोटिस जारी कर पार्टी से निलंबित या निष्कासित कर सकती है, लेकिन उससे उनकी विधानसभा सदस्यता पर कोई असर नहीं पड़ेंगा। 2. पार्टी व्हिप नहीं माना तो जाएगी विधायकी हालांकि, पार्टी से निष्कासित किए जाने के बाद भी इन क्रॉस वोटिंग करने वाले चारों विधायकों पर सदन में पार्टी व्हिप लागू होता है। उसकी अवहेलना करने पर इन विधायकों के विरुद्ध दलबदल विरोधी कानून के तहत कार्रवाई की जा सकती है। इसमें उनकी विधायकी जा सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने 1996 में इस सबंध में फैसला भी सुनाया था। राज्यसभा चुनाव में इनकी हुई जीत अब यहां पढ़ते हैं शोकॉज नोटिस के बाद क्या… लिखित में देना होगा जवाब शोकॉज नोटिस जारी होने के बाद संबंधित विधायक को तय समय के भीतर लिखित जवाब देना होता है। इसमें उसे बताना पड़ता है कि उसने पार्टी लाइन से हटकर वोट क्यों किया।
अगर विधायक संतोषजनक जवाब देता है, जैसे तकनीकी गलती, गलतफहमी या व्हिप को लेकर भ्रम तो पार्टी उसे राहत दे सकती है।
लेकिन अगर जवाब कमजोर या गोलमोल हुआ, तो मामला अनुशासनात्मक कार्रवाई की ओर बढ़ जाता है। कई बार विधायक को व्यक्तिगत तौर पर भी बुलाकर सफाई ली जाती है। कारण सही नहीं मिला तो क्या होगा? अगर पार्टी को विधायक का जवाब संतोषजनक नहीं लगता, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई तय मानी जाती है। इसमें शामिल हो सकता है, पार्टी से निलंबन, पार्टी से निष्कासन, इसके अलावा पार्टी के द्वारा भविष्य में होने वाले चुनावों में टिकट काटना भी है।
राजनीतिक तौर पर यह सबसे बड़ा झटका होता है, क्योंकि विधायक की पार्टी में पकड़ कमजोर हो जाती है और उसकी सियासी भविष्य पर असर पड़ता है। सस्पेंशन किया तो विधायकी पर क्या असर पड़ेगा? सिर्फ पार्टी से सस्पेंड होने का मतलब यह नहीं है कि विधायक की सदस्यता तुरंत खत्म हो जाएगी। वह विधायक बना रहता है, लेकिन “निर्दलीय” जैसी स्थिति में आ जाता है (यानी पार्टी का आधिकारिक समर्थन नहीं रहता)। हालांकि, पार्टी उसे विधानसभा में अलग-थलग कर सकती है और संगठन में उसकी भूमिका खत्म हो जाती है। विधायकी किस सूरत में जा सकती है? विधायकी जाने का मामला सीधे दलबदल कानून (Anti-Defection Law) से जुड़ा है। सदस्यता इन हालात में जा सकती है। अगर विधायक पार्टी व्हिप के खिलाफ वोट करता है और पार्टी उसके खिलाफ स्पीकर को शिकायत देती है। स्पीकर जांच के बाद उसे दोषी मान लेते हैं, विधायक स्वेच्छा से पार्टी छोड़ देता है या दूसरी पार्टी जॉइन कर लेता है। शोकॉज नोटिस पाने वाले विधायकों के बारे में जानिए… राज्यसभा चुनाव में ये भी विवाद हरियाणा राज्यसभा चुनाव को लेकर एक और विवाद काफी चर्चा में है। जिसकी शिकायत केंद्रीय चुनाव आयोग तक पहुंच चुकी है। दरअसल, 9 मई 2014 को केंद्रीय चुनाव आयोग द्वारा देश के सभी राज्यों के मुख्य चुनाव अधिकारियों को एक सर्कुलर भेजा गया था। जिस सर्कुलर में केंद्रीय मंत्री, कैबिनेट मंत्री, सांसद, विधायक, नगर निकाय के मेयर और अध्यक्ष, जिला परिषद और ब्लॉक समितियों के चेयरमैन, जिला सहकारिता कमेटी के चेयरमैन और किसी सरकारी कर्मचारी को किसी भी चुनाव में काउंटिंग एजेंट नियुक्त करने पर रोक लगाई थी। जबकि, हरियाणा में हाल ही में 16 मार्च को राज्यसभा चुनाव में वोटिंग के दौरान भाजपा की ओर से कैबिनेट मंत्री कृष्ण बेदी और खेल राज्य मंत्री गौरव गौतम को, जबकि कांग्रेस की ओर से दो मौजूदा विधायक बीबी बत्रा और आफताब अहमद को काउंटिंग एजेंट नियुक्त किया गया था, जो कि चुनाव आयोग के सर्कुलर के विपरीत है। इस मामले में एडवोकेट की ओर से शीघ्र कार्रवाई की मांग की गई है। ————– हरियाणा राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग पर कांग्रेस का एक्शन:4 विधायकों को शोकॉज नोटिस, 7 दिन में मांगा जवाब; विनेश फोगाट बोलीं- कुछ अपने भी जयचंद हरियाणा कांग्रेस ने बुधवार को राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग करने वाले 4 विधायकों के नाम सार्वजनिक कर दिए। दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर प्रभारी बीके हरिप्रसाद ने बताया कि नारायणगढ़ से शैली चौधरी, पुन्हाना से मोहम्मद इलियास, हथीन से मोहम्मद इसराइल और सढ़ौरा विधायक रेनू बाला ने क्रॉस वोटिंग की थी। पढ़ें पूरी खबर…