हरियाणा BJP विधायक को सुप्रीम कोर्ट से झटका:रिकाउंटिंग न कराने की मांग वाली याचिका खारिज; 32 वोटों से कांग्रेस प्रत्याशी को हराया था

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हरियाणा के जींद जिले की उचाना विधानसभा सीट से बीजेपी विधायक देवेंद्र अत्री को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने देवेंद्र अत्री की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने वोटों की दोबारा गिनती किए जाने पर रोक लगाने की मांग थी। बता दें कि देवेंद्र अत्री ने 2024 में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी बृजेंद्र सिंह को सिर्फ 32 वोटों से हराया था। उचाना विधानसभा चुनाव में वोटों की गिनती को लेकर कांग्रेस नेता बृजेंद्र सिंह ने पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। इस चुनौती के खिलाफ अत्री ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, ताकि हाईकोर्ट की कार्यवाही को रोका जा सके। इसके लिए स्पेशल लीव पिटीशन दायक की थी, जिसके सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है। इस फैसले के बाद अब पंजाब व हरियाणा उच्च न्यायालय इस मामले में अगली तारीख देने के लिए स्वतन्त्र है। विधानसभा चुनाव में मात्र 32 वोटों से हार गए थे बृजेंद्र सिंह
उचाना विधानसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी देवेंद्र अत्री को 48 हजार 968 वोट मिले थे। दूसरे नंबर पर रहे कांग्रेस प्रत्याशी बृजेंद्र सिंह को 48 हजार 936 वोट मिले थे। इसमें कांग्रेस प्रत्याशी बृजेंद्र सिंह 32 वोटों से हार गए थे। इस चुनाव में 600 के करीब बैलेट पेपर की काउंटिंग की गई थी, तो इनमें से 215 वोट त्रुटियों के कारण रिजेक्ट या कैंसिल हो गए थे। मार्च में बृजेंद्र सिंह ने हाईकोर्ट में दायर की थी याचिका
दरअसल, उचाना सीट पर भाजपा के देवेंद्र अत्री ने मात्र 32 वोटों से बृजेंद्र सिंह को हराया था। मार्च में बृजेंद्र सिंह ने हाईकोर्ट में याचिका दायर करते हुए कहा था कि जो कैंसिल या रिजेक्ट वोट होते हैं, यदि उसका अंतर इलेक्शन की हार-जीत के अंतर से ज्यादा है, तो गिनती खत्म होने के बाद उन सभी कैंसिल वोटों की दोबारा से जांच रिटर्निंग अधिकारी को मौके पर करनी होती है, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। 150 वोट स्कैन नहीं होने के कारण हुए कैंसिल
कांग्रेस प्रत्याशी बृजेंद्र सिंह ने कहा था कि 150 वोट केवल इसलिए कैंसिल किए गए हैं, क्योंकि पोस्टल बैलेट के लिफाफे के ऊपर जो स्कैनर था, उनकी स्कैनिंग नहीं हो पा रही थी। इसलिए वो रिजेक्ट के डिब्बे में डाले गए। जिन वोटों की स्कैनिंग नहीं होती तो उन लिफाफों को कैसे खोलना है, इसकी भी प्रक्रिया है, जो गिनती के दौरान नहीं की गई। उसी को लेकर उन्होंने कोर्ट में याचिका लगाई है। वोटों की जीत-हार का अंतर मात्र 32 वोटों का है, इसलिए यह काउंटिंग जरूरी थी। विधानसभा में चुनाव किस प्रत्याशी को मिले कितने वोट इस खबर हम लगातार अपडेट कर रहे हैं…