SYL पर फिर हरियाणा-पंजाब आमने-सामने होंगे:दोनों CM की आज मीटिंग; केंद्रीय मंत्री शामिल नहीं होंगे, CM सैनी एक दिन पहले कर चुके मंथन

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सतलुज यमुना लिंक (SYL) नहर के विवाद के समाधान का कोई रास्ता निकालने के लिए एक बार फिर हरियाणा और पंजाब के मुख्यमंत्री आमने-सामने होने जा रहे हैं। इस बार दिल्ली की बजाय चंडीगढ़ में दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों और शीर्ष अधिकारियों की बैठक होगी, जिस पर केंद्र सरकार की भी नजर रहेगी। हरियाणा निवास में सुबह ये बैठक होगी। इस बैठक से पहले सीएम नायब सिंह सैनी ने 26 जनवरी की शाम छह बजे सीनियर अधिकारियों की बैठक बुलाई, जिसमें मामले में अब तक की स्टेटस रिपोर्ट पर मंथन किया गया। इससे पहले पिछले साल नौ जुलाई और पांच अगस्त को भी केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल की अध्यक्षता में नायब सिंह सैनी और भगवंत मान की बैठक हुई थी, जिसमें कोई हल नहीं निकल पाया। केंद्र सरकार के निर्देश पर एक बार फिर से एसवाईएल के मुद्दे पर हरियाणा व पंजाब संयुक्त बैठक करने जा रहे हैं। केंद्र सरकार कर चुकी है किनारा नवंबर में हुई बैठक में सतलुज-यमुना लिंक नहर विवाद पर केंद्र सरकार मध्यस्थता से पीछे हटते हुए दिखाई दे रही है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद केंद्र ने अपनी अगुआई में पंजाब और हरियाणा के बीच 5 दौर की द्विपक्षीय बैठकें करवाई, लेकिन किसी में भी ठोस नतीजा नहीं निकला है।इससे पहले केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने पंजाब और हरियाणा के मुख्यमंत्रियों को पत्र लिखकर कहा है कि दोनों राज्य SYL नहर पर आपसी बातचीत कर समाधान खोजें। पत्र में यह भी कहा गया है कि जरूरत पड़ने पर केंद्र सरकार दोनों राज्यों को आवश्यक सहयोग देगी। मंत्रालय ने बताया कि 5 अगस्त 2025 को हुई बैठक में दोनों राज्यों ने सकारात्मक भावना से आगे बढ़ने पर सहमति जताई थी, इसलिए अब दोनों को अपनी प्रस्तावित योजनाओं पर बातचीत करनी चाहिए। उत्तरी जोनल काउंसिल की बैठक में नदी पानी के सभी मुद्दे टाले 17 नवंबर को फरीदाबाद में हुई उत्तरी जोनल काउंसिल की बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने नदी पानी से जुड़े सभी मुद्दों को फिलहाल के लिए मुल्तवी कर दिया। इससे पहले चंडीगढ़ को राष्ट्रपति के सीधे नियंत्रण में लाने के प्रस्ताव का पंजाब में तीखा विरोध हो चुका है, जिसके बाद केंद्र को कदम पीछे खींचने पड़े थे। पंजाब पहले ही कह चुका कि, ‘देने को एक बूंद पानी नहीं’ वहीं जानकारों का कहना है कि अब जब केंद्र मध्यस्थता से हट गया है, तो पंजाब किसी भी सूरत में खुद बातचीत शुरू नहीं करेगा। मुख्यमंत्री भगवंत मान पहले ही साफ कर चुके हैं कि पंजाब के पास देने के लिए एक बूंद भी अतिरिक्त पानी नहीं है, इसलिए SYL नहर निर्माण का सवाल ही पैदा नहीं होता। सुप्रीम कोर्ट में केस अंतिम पड़ाव में सुप्रीम कोर्ट में यह मामला अब अंतिम पड़ाव में है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा दोनों राज्यों को केंद्र की मध्यस्थता के साथ विवाद का साझा हल करने के लिए बोला गया है। हरियाणा सचिवालय में शनिवार को अवकाश के बावजूद बैठक की तैयारियों को लेकर कई विभागों के अधिकारी मौजूद रहे। एसवाईएल नहर का मुद्दा लंबे समय से दोनों राज्यों के बीच विवाद का कारण बना हुआ है। हरियाणा का तर्क है कि नहर के निर्माण से उसे उसके वैधानिक जल अधिकार मिलेंगे, जबकि पंजाब लगातार यह कहते हुए विरोध करता रहा है कि उसके पास अतिरिक्त पानी नहीं है। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व आदेशों और केंद्र सरकार की मध्यस्थता के बावजूद समाधान अब तक नहीं निकल पाया है। 214 किमी. में से 122 किमी. पंजाब का हिस्सा अटका ​​​​​​​कुल 214 किमी लंबी SYL नहर में से पंजाब का 122 किमी हिस्सा अभी भी बिना निर्माण के पड़ा है। जनवरी 2002 में सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब को पानी समझौते के मुताबिक नहर बनाने के लिए कहा था। हरियाणा नहर निर्माण के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर चुका है। 8 अगस्त को इस मामले की आखिरी सुनवाई हुई थी। अगली तारीख तय नहीं है। 1981 समझौता रद्द करने का विवाद भी जुड़ा 2004 में पंजाब के तत्कालीन CM कैप्टन अमरिंदर सिंह ने विधानसभा के जरिए 1981 के पानी समझौते को रद्द कर दिया था। 2016 में सुप्रीम कोर्ट ने इस कानून को अमान्य करार दिया। इसके बाद से मामला लगातार अदालत और केंद्र-राज्य स्तर की बैठकों में अटका हुआ है। ग्राफिक्स में पढ़िए क्या है एसवाईएल विवाद…