धीरेंद्र ब्रह्मचारी आश्रम का प्रबंधन सरकार करेगी:नोटिफिकेशन जारी; 5 साल अनुभव वाले IAS प्रशासक होंगे, अलग खाता खुलेगा, यहीं जमा होगा पैसा

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हरियाणा सरकार ने फैसला किया है कि हरियाणा कैडर के एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी, जिसके पास पांच साल का अनुभव हो, दिवंगत धर्मगुरु और योग गुरु धीरेंद्र ब्रह्मचारी के आश्रम का प्रबंधन करेंगे, जिसे राज्य ने नवंबर 2025 में अपने अधिकार में ले लिया था। हरियाणा सरकार के उद्योग एवं वाणिज्य विभाग ने आज अपर्णा संस्था (प्रबंधन एवं नियंत्रण का अधिग्रहण) नियम, 2026 को अधिसूचित किया, जिससे पिछले वर्ष अधिनियमित अपर्णा संस्था (प्रबंधन एवं नियंत्रण का अधिग्रहण) अधिनियम, 2025 को लागू किया जा सके। आयुक्त एवं सचिव अमित कुमार अग्रवाल द्वारा जारी किए गए ये नियम आधिकारिक राजपत्र में प्रकाशन की तिथि से तत्काल प्रभाव से लागू हो गए हैं। यहां पढ़िए किन नियमों से होगा प्रबंधन… 5 साल का अनुभव होना जरूरी राज्य सरकार अब भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस), हरियाणा कैडर से कम से कम दो वर्ष के अनुभव वाले प्रशासक या हरियाणा सिविल सेवा (एचसीएस) से कम से कम पांच वर्ष के अनुभव वाले प्रशासक को संस्था के प्रबंधन की देखरेख के लिए नियुक्त करेगी। चार मेंबर वाली कमेटी बनेगी प्रशासक की सहायता के लिए चार सदस्यीय समिति का भी गठन किया जाएगा। समिति के सदस्य कम से कम एक वर्ष के अनुभव वाले ग्रुप-ए सेवा अधिकारियों या कम से कम दो वर्ष के अनुभव वाले ग्रुप-बी अधिकारियों में से चुने जाएंगे। नेशनल बैंक में खाता खुलेगा संस्था को राष्ट्रीयकृत बैंक में एक अलग खाता खोलना होगा। अनुदान, उपहार और दान सहित सभी आय इसी खाते में जमा की जानी चाहिए और इसका उपयोग केवल संस्था के खर्चों के लिए ही किया जाना चाहिए। अधिशेष धनराशि को राष्ट्रीयकृत बैंक में सावधि जमा के रूप में रखा जा सकता है। 24 एकड़ का है आश्रम परिसर भाजपा सरकार ने गुरुग्राम में 24 एकड़ की प्रमुख भूमि पर स्थित विवादास्पद योग गुरु धीरेंद्र ब्रह्मचारी द्वारा स्थापित अपर्णा आश्रम का अधिग्रहण कर लिया था। ब्रह्मचारी दिवंगत प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के करीबी सहयोगी थे। 2020 में खड़ा हुआ विवाद पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के पूर्व योग प्रशिक्षक ब्रह्मचारी ने आश्रम की स्थापना की थी। 1994 में विमान दुर्घटना में उनकी मृत्यु के बाद समाज दो विरोधी गुटों में विभाजित हो गया, जिनका नेतृत्व लक्ष्मण चौधरी और मुरली चौधरी ने किया। 2020 में एक बड़ा विवाद तब हुआ जब 24 एकड़ जमीन की बिक्री का विलेख मात्र 55 करोड़ रुपए में रजिस्टर्ड कर दिया गया। राज्य सरकार की जांच में पाया गया कि जमीन को तीन कंपनियों को बहुत कम कीमत पर बेचा गया था। गुरुग्राम डीसी ने बिक्री विलेख को रद्द कर दिया, जिसे बाद में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने बरकरार रखा। सरकार के अधिग्रहण के विरोध में हाईकोर्ट तक गए
हरियाणा सरकार ने 30 जनवरी, 1989 को एक अधिसूचना जारी की, जिसमें कहा गया कि सिलोखरा और सुखराली गांवों की भूमि सार्वजनिक उद्देश्यों के लिए अधिगृहीत की जाएगी। इसमें अपर्णा आश्रम की भूमि और भवन शामिल हैं। ब्रह्मचारी ने भूमि अधिग्रहण कलेक्टर के समक्ष आपत्तियां दर्ज कीं, जिन्हें खारिज कर दिया गया। इसके बाद उन्होंने 1990 में पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के समक्ष एक याचिका दायर कर अधिसूचनाओं को रद्द करने की मांग की। हालांकि, 9 जून 1994 को एक विमान दुर्घटना में उनकी मौत हो गई। उनके निधन के बाद, समाज दो समूहों में विभाजित हो गया। हरियाणा सरकार के एक्ट में यह दावा किया गया है कि ये समूह 2 दशकों से अधिक समय से कानूनी विवादों में उलझे हुए हैं। सरकार ने संस्था को नियंत्रण में क्यों लिया
विधेयक में कहा गया है कि वर्षों से सोसाइटी और इसके सदस्यों के बीच आंतरिक विवाद चल रहा है। ये समूह संस्था के उद्देश्यों और उद्देश्यों के विरुद्ध अपने निजी स्वार्थ के लिए संस्था की इस भूमि और भवन को अवैध और अनधिकृत रूप से बेचने की कोशिश कर रहे हैं। इसकी भी पूरी संभावना है कि संस्था की चल और अचल संपत्ति नष्ट हो सकती है, जिससे संस्था का मूल उद्देश्य ही विफल हो जाएगा। विधेयक में अपर्णा आश्रम को अपने अधीन करने का कारण बताया गया है।