सरकार ने कोटक महिंद्रा बैंक को पैनल से हटाया:पंचकूला का 150 करोड़ का बैंक फ्रॉड केस; वित्त विभाग के आदेश जारी

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हरियाणा सरकार ने पंचकूला नगर निगम से जुड़े 150 करोड़ रुपए के बैंक धोखाधड़ी मामले में कोटक महिंद्रा बैंक को पैनल लिस्ट से हटा दिया है। वित्त विभाग अतिरिक्त मुख्य सचिव (ACS) अरुण गुप्ता ने सभी प्रशासनिक सचिवों और विभागों के प्रमुखों को इसकी सूचना लिखित रूप में भेज दी है। सूचना में लिखा है कि कोटक महिंद्रा बैंक को हरियाणा राज्य में सरकारी कामकाज करने के लिए तत्काल प्रभाव से और अगले आदेश तक पैनल से हटा दिया गया है। गुप्ता ने कहा कि अब से कोटक महिंद्रा बैंक के जरिए से कोई भी सरकारी निधि पार्क, जमा, निवेश या लेनदेन नहीं किया जाएगा। बचा पैसा ट्रांसफर करें अधिकारी वित्त विभाग द्वारा सभी विभागों को भेजे गए एक लेटर में कहा गया है, संबंधित सभी विभागों से अनुरोध है कि वे कोटक महिंद्रा बैंक में रखे खातों से शेष राशि ट्रांसफर करने और ऐसे खातों को जल्द से जल्द बंद करने की प्रक्रिया शुरू करने के लिए तत्काल कार्रवाई करें। इन निर्देशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए। 127 करोड़ लौटा दिए, ब्याज नहीं मिला कोटक महिंद्रा बैंक ने राज्य सरकार को 127 करोड़ रुपए लौटा दिए हैं। हालांकि, यह राशि केवल मूलधन को ही कवर करती है। हरियाणा सतर्कता एवं भ्रष्टाचार विरोधी ब्यूरो वर्तमान में पंचकुला नगर निगम के सेक्टर 11 स्थित कोटक महिंद्रा बैंक शाखा में खातों से कथित तौर पर धन की हेराफेरी की जांच कर रहा है। मामले में ब्रांच मैनेजर पुष्पेंद्र सिंह और रिलेशनशिप मैनेजर दिलीप सिंह राघव को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। FD के जरिए हुआ पूरा घोटाला घोटाले से संबंधित एफआईआर के अनुसार, पंचकुला नगर निगम ने बैंक की सेक्टर 11 शाखा में 145.03 करोड़ रुपए की 16 सावधि जमा रखी हुई थीं, जिनकी परिपक्वता अवधि 158.02 करोड़ रुपये थी। इनमें से 11 सावधि जमा (FD) 16 फरवरी को परिपक्व हो गईं, जिनकी कुल राशि 59.58 करोड़ रुपए थी। जब नगर निगम ने बैंक से संपर्क किया, तो अधिकारियों द्वारा दिए गए बयान न तो आपस में मेल खाते थे और न ही नगर निगम के रिकॉर्ड से, विशेष रूप से सावधि जमा के संबंध में। इससे पहले, राज्य सरकार ने 590 करोड़ रुपए के घोटाले के बाद आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक को सरकारी कारोबार से हटा दिया था।