हार्ट पेशेंट्स के लिए अच्छी खबर…80 हजार की जांचें फ्री:पहले से ज्यादा सटीक रिपोर्ट आएगी, बेवजह नहीं लगेगा स्टेंट; हमीदिया में ऐसा पहली बार

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मध्य प्रदेश के हार्ट पेशेंट्स के लिए अच्छी खबर है। भोपाल के हमीदिया अस्पताल में 2 मॉर्डन तकनीकों- इंट्रावैस्कुलर अल्ट्रासाउंड (IVUS) और फ्रैक्शनल फ्लो रिजर्व (FFR) से दिल के मरीजों का इलाज शुरू किया गया है। ये तकनीकें एक्यूरेसी के साथ बताती हैं कि मरीज को स्टेंट की जरूरत है भी या नहीं। अब तक होता यह है कि एंजियोग्राफी के बाद थोड़ी बहुत आशंका के चलते भी स्टेंट लगा दिया जाता था। लेकिन अब कई मरीज बेवजह स्टेंट लगवाने की प्रक्रिया से बच सकेंगे। यही नहीं, स्टेंट सही जगह और सही तरीके से लगा है या नहीं, यह भी मशीन से तुरंत पता चल जाएगा। खास बात यह है कि जहां निजी अस्पतालों में इन तकनीकों का खर्च 80 हजार रुपए तक आता है, वहीं हमीदिया अस्पताल में यह सुविधा पूरी तरह फ्री है। दरअसल, मध्य प्रदेश में 34 प्रतिशत मौतों का कारण दिल का रोग होता है। वहीं, कोविड के बाद युवाओं में दिल की बीमारियों के मामले भी तेजी से बढ़े हैं। इस स्थिति को देखते हुए हमीदिया अस्पताल के कार्डियोलॉजी विभाग ने IVUS और FFR टेक्नीक से ट्रीटमेंट शुरू किया है। ये दोनों तकनीक कोरोनरी एंजियोप्लास्टी के दौरान डॉक्टरों को बेहद सटीक जानकारी देती हैं। पढ़िए रिपोर्ट… IVUS नसों के भीतर देखने वाली तकनीक वरिष्ठ कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. अजय शर्मा बताते हैं कि इंट्रावैस्कुलर अल्ट्रासाउंड (IVUS) तकनीक एक बेहद बारीक कैमरे की तरह काम करती है, जिसे दिल की नसों के अंदर पहुंचाया जाता है। इससे डॉक्टर साफ तौर पर देख पाते हैं कि नस के भीतर कैल्शियम कितना जमा है, फाइब्रोटिक हिस्सा कहां है और ब्लॉकेज की वास्तविक स्थिति क्या है? इस तकनीक का सबसे बड़ा फायदा यह है कि स्टेंट लगाने के बाद उसकी पोजिशन, फैलाव और नस से सही तरीके से चिपकाव (एपोजिशन) की तुरंत जांच हो जाती है। इससे स्टेंट के गलत जगह लगने या अधूरा खुलने का खतरा लगभग खत्म हो जाता है। FFR बताएगी कि स्टेंट की जरूरत है या नहीं फ्रैक्शनल फ्लो रिजर्व (FFR) तकनीक उन मरीजों के लिए बेहद उपयोगी साबित हो रही है, जिनकी रिपोर्ट में ब्लॉकेज बॉर्डर लाइन में होता है। डॉ. शर्मा के अनुसार, कई बार एंजियोग्राफी में ब्लॉकेज दिखाई देता है, लेकिन वह खून के बहाव में वास्तविक रुकावट नहीं बनता। FFR जांच से यह मापा जाता है कि ब्लॉकेज वास्तव में हार्ट की मसल्स तक खून पहुंचने में बाधा डाल रहा है या नहीं। यदि FFR रिपोर्ट निगेटिव आती है, तो मरीज को स्टेंट लगाने की जरूरत नहीं होती। इससे मरीज बेवजह सर्जरी, दवाइयों और जोखिम से बच जाता है। अब तक 3 मरीजों पर हुआ सफल इस्तेमाल हमीदिया अस्पताल के कार्डियोलॉजी विभाग के HOD डॉ. राजीव गुप्ता की टीम ने इन दोनों तकनीकों के इस्तेमाल से अब तक तीन मरीजों का सफलतापूर्वक इलाज किया है। इस टीम में प्रोफेसर डॉ. अजय शर्मा, डॉ. आरएस मीना और डॉ. आरके सिंह शामिल हैं। कैथ लैब टेक्नीशियन हेमेंद्र शर्मा, सर्वेश जोशी और नर्सिंग ऑफिसर उपमा और उत्प्रेक्षा का भी इसमें योगदान रहा है। वरिष्ठ कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. अजय शर्मा के अनुसार, कोविड के बाद युवाओं में दिल की बीमारियों के मामले तेजी से बढ़े हैं। अनियमित दिनचर्या, शारीरिक गतिविधियों की कमी, तनाव और खानपान की गलत आदतें इसके बड़े कारण हैं। ऐसे में स्टेंट की जरूरत भी बढ़ी है, लेकिन अब नई तकनीकों से यह तय किया जा सकेगा कि स्टेंट वाकई जरूरी है या नहीं। एमपी में मौतों के आंकड़े बढ़ा रहे चिंता केंद्र सरकार की एमसीसीडी रिपोर्ट 2022 (मेडिकल सर्टिफिकेशन ऑफ कॉज ऑफ डेथ) के मुताबिक, मध्य प्रदेश में हर 100 में से 34 मौतें दिल और रक्त संचार से जुड़ी बीमारियों के कारण होती हैं। देशभर में यह आंकड़ा 40.8 प्रतिशत तक पहुंच चुका है। चौंकाने वाली बात यह है कि 14 साल से कम उम्र के 17 प्रतिशत बच्चों की मौत भी हार्ट डिसीज के कारण हो रही है। ऐसे में हमीदिया अस्पताल में शुरू हुई यह नई तकनीक दिल के इलाज में एक बड़ा और जरूरी बदलाव मानी जा रही है। दिल को स्वस्थ रखने का आसान तरीका
स्पेशलिस्ट का कहना है कि दिल को स्वस्थ रखने के लिए रोजाना कम से कम 30 मिनट ब्रिस्क वॉकिंग जरूरी है। धीरे-धीरे चलने से ज्यादा फायदा नहीं होता। तेज चाल से चलना हार्ट के लिए ज्यादा असरदार है। इसके अलावा, चेस्ट पेन को कभी हल्के में न लें। इमोशनल स्ट्रेस से नसें सिकुड़ जाती हैं, जिससे दर्द और हाई ब्लड प्रेशर की समस्या बढ़ती है। यह खबर भी पढ़ें… युवाओं का ‘दिल टूट रहा’, 72% इमोशनल स्ट्रेस से बीमार मैं न सिगरेट पीता हूं, न ही शराब…जिम में एक्सरसाइज भी करता हूं, साथ में खाने का भी विशेष ध्यान रखता हूं। फिर मुझे हार्ट अटैक क्यों आया…यह सवाल हमीदिया अस्पताल के आईसीयू में भर्ती 30 साल के राहुल का है। राहुल ने यह सवाल कार्डियोलॉजी विभाग के प्रोफेसर डॉ. अजय शर्मा से किया था। पढ़ें पूरी खबर… हार्टअटैक में 49 साल से कम उम्र के 50% मरीज भोपाल के गांधी मेडिकल कॉलेज में आने वाले हार्ट अटैक के मरीजों में से आधे 49 साल से कम उम्र के हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अटैक आने पर पहले दो घंटे बेहद अहम होते हैं। इस ‘गोल्डन ऑवर’ में एंजियोप्लास्टी हो जाए तो दिल पर कोई असर नहीं पड़ता और मरीज की जिंदगी बचने की संभावना चार गुना तक बढ़ जाती है। पढ़ें पूरी खबर…