नारनौल में खुले में जमीन पर बैठकर पढ़ रही छात्राएं:पीएम श्री कन्या स्कूल में खुले चल रही कक्षाएं, बैठने के लिए नहीं हैं डेस्क

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हरियाणा के नारनौल में स्थित पीएम श्री राजकीय गर्ल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल की छात्राएं ठंड में जमीन पर बैठकर पढ़ने को मजबूर हैं। स्कूल में किसी भी कक्षा में ड्यूल डेस्क नहीं हैं। जो हैं, वो टूटी पड़ी हैं। ऐसे में 5 डिग्री के तापमान में छात्राएं खुले में धरती पर बैठकर शिक्षा ग्रहण कर रही हैं। जबकि टीचर्स वहां कुर्सियों पर बैठे धूप सेकते हैं। प्रदेश सरकार सरकारी स्कूलों खासकर लड़कियों के स्कूलों में बड़ी-बड़ी सुविधाएं देने का दावा करती है। उल्टे पीएम श्री राजकीय कन्या स्कूल में ड्यूल डेस्क की भारी कमी के कारण छात्राएं ठंड में फर्श, जमीन और घास पर बैठकर पढ़ने को विवश हैं। हालात यह हैं कि पिछले 3 वर्षों से स्कूल को नई डेस्क नहीं मिली हैं, जिसका सीधा असर पढ़ाई और छात्राओं के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। मीडिया देख दरी पर बैठाया जब दैनिक भास्कर की टीम स्कूल में इस समस्या की कवरेज करने पहुंची तो वहां का नजारा देखकर दंग रह गई। स्कूल की सभी कक्षाओं की छात्राएं ठंड के मौसम में बाहर खुले में ग्राउंड पर घास या मिट्‌टी में ईट पर बैठी थी। जब कैमरा उनकी तरफ किया गया तो छात्राओं को वहां साइड में रखी दरी पर बैठने को एक टीचर ने कहा। जिसके बाद छात्राएं गुटमुट होकर एक जगह बैठ गई। कक्षा 6 से 8 तक ज्यादा दिक्कत सबसे ज्यादा समस्या कक्षा 6 से 8 तक की छात्राओं को हो रही है। कई कक्षाओं में डेस्क न होने के कारण टाट पट्टी या दरी बिछाकर पढ़ाई करवाई जा रही है। कुछ कक्षाएं खुले में लगाई जा रही हैं, जहां छात्राएं सर्दी में घास पर बैठने को मजबूर हैं। ठंडी हवा और घने कोहरे के बीच इस तरह पढ़ाई करना छात्राओं के लिए बेहद मुश्किल हो गया है। शिक्षक बैठते कुर्सियों पर छात्राओं का कहना है कि जहां शिक्षकों के लिए कुर्सियों की व्यवस्था है, वहीं बच्चों को टाट पट्टी पर बैठाया जा रहा है। कक्षा 8वीं की छात्रा पारुल ने बताया कि स्कूल की पढ़ाई अच्छी है, लेकिन बैठने के लिए बेंच नहीं हैं। कई कक्षाओं में टाट पट्टी और कुछ में दरी है। ठंड बहुत लगती है। बेंच पर बैठकर पढ़ने की इच्छा थी, लेकिन अब तक पूरी नहीं हो पाई। जानवर कर जाते हैं गंदगी एक अन्य छात्रा ने बताया कि कई बार टाट पट्टी पर बैठना भी संभव नहीं होता, क्योंकि उस पर आवारा जानवर गंदगी कर जाते हैं। ऐसी स्थिति में नीचे बैठकर पढ़ना और भी मुश्किल हो जाता है। धुंध होने पर बाहर बैठने की जगह भी नहीं बचती और कक्षाओं के अंदर भी बेंच नहीं होने से परेशानी बढ़ जाती है। पेरेंट्स भी चिंतित छात्राओं का कहना है कि अत्यधिक ठंड के कारण कई छात्राएं नियमित रूप से स्कूल नहीं आ पा रही हैं। पेरेंट्स भी बच्चों की सेहत को लेकर चिंतित हैं। उनका कहना है कि फर्श पर बैठने से बच्चों को सर्दी-जुकाम और अन्य बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। नई बेंच आने वाली है- प्राचार्य इस पूरे मामले पर स्कूल की प्राचार्य शीला देवी ने बताया कि बेंचों की कमी की जानकारी विभाग को पहले ही दी जा चुकी है। उन्होंने कहा कि स्कूल के लिए 108 नई बेंच स्वीकृत हो चुकी हैं और ये कभी भी स्कूल में पहुंच सकती हैं। प्राचार्य ने आश्वासन दिया कि बेंच आने के बाद छात्राओं को जमीन पर बैठने नहीं दिया जाएगा और कक्षाओं की व्यवस्था बेहतर की जाएगी। सरकार के दावे खोखले हालांकि, सवाल यह है कि जब सरकार शिक्षा के स्तर और सुविधाओं को बेहतर बनाने के बड़े-बड़े दावे कर रही है, तो फिर इतनी ठंड में छात्राओं को फर्श पर बैठकर पढ़ने के लिए क्यों मजबूर होना पड़ रहा है। अब देखना होगा कि शिक्षा विभाग कब तक इस समस्या का स्थायी समाधान करता है और छात्राओं को सम्मानजनक और सुरक्षित माहौल में पढ़ाई का अधिकार दिलाता है।