हरियाणा में उद्योग के लिए पर्यावरणीय मंजूरी लेना अब आसान:MEIAA के जरिए मिलेगी सुविधा; प्राधिकरण-मूल्यांकन कमेटी गठित, रिटायर्ड IAS, IFS को जिम्मेदारी

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हरियाणा में औद्योगिक और इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को अब मंजूरी के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। केंद्र सरकार ने पर्यावरण संरक्षण और विकास के बीच संतुलन बनाने के लिए हरियाणा में ‘राज्य स्तरीय पर्यावरण समाधान निर्धारण प्राधिकरण’ (MEIAA) और ‘विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति’ (SEAC) का गठन कर दिया है। इस संबंध में नोटिफिकेशन जारी कर दिया गया है। विशेषज्ञों के अनुसार इस कदम से हरियाणा में औद्योगिक, इन्फ्रास्ट्रक्चर और विकास परियोजनाओं की पर्यावरणीय जांच तेज, पारदर्शी और जवाबदेह होगी। साथ ही पर्यावरण संरक्षण के मानकों से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं होने दिया जाएगा। रिटायर्ड आईएएस अंकुर गुप्ता प्राधिकरण के अध्यक्ष बने हरियाणा में प्रस्तावित विभिन्न परियोजनाओं को मिलने बाली पर्यावरणीय मंजूरी अब एमईआईएए के माध्यम से दी जाएगी। यह प्राधिकरण राज्य स्तरीय विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति की सिफारिशों के आधार पर निर्णय लेगा। सभी निर्णय बैठक में लिए जाएंगे और सामान्यतः सर्वसम्मति से होंगे। यदि किसी मामले में बहुमत से निर्णय होता है तो उसके पक्ष और विपक्ष के मतों को स्पष्ट रूप से कार्यवृत्त में दर्ज कर केंद्र सरकार को भेजा जाएगा। डॉ. अंकुर गुप्ता, आईएएस (सेवानिवृत्त) अध्यक्ष, डॉ. राम स्वरुप वर्मा आईएएस (सेवानिवृत्त) सदस्य, निदेशक पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग हरियाणा सदस्य सचिव होंगे। कमेटी की जिम्मेदारी रिटायर्ड आईएफएस को मिली परियोजनाओं के तकनीकी और वैज्ञानिक मूल्यांकन के लिए गठित एसईएसी में पर्यावरण, वन, इंजीनियरिंग और प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े अनुभवी विशेषज्ञों को शामिल किया गया है। समिति का नेतृत्व महाबीर प्रसाद शर्मा, आईएफएस (सेवानिवृत्त) अध्यक्ष के रूप में करेंगे। समिति में वरिष्ठ वैज्ञानिक, पर्यावरण इंजीनियर और तकनीकी विशेषज्ञ सदस्य के रूप में शामिल किए गए हैं। जबकि हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मुख्य पर्यावरण इंजीनियर को सदान सचिव नियुक्त किया गया है। इनमें डॉ. जय भगवान सदस्य, डॉ नरेश कुमार सदस्य, डॉ. कपिल कुमार सदस्य, संजीव कुमार सदस्य, मुख्य पर्यावरण इंजीनियर हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड सदस्य सचिव होंगे। तीन साल तक रहेगा कार्यकाल प्राधिकरण और समिति के अध्यक्ष एवं सदस्य अधिसूचना के प्रकाशन की तिथि से तीन वर्ष तक पद पर रहेंगे। हितों के टकराव से बचने के लिए सख्त प्रावधान किए गए हैं। किसी भी सदस्य को उन परियोजनाओं से स्वयं को अलग रखना होगा। जिनसे उनका पूर्व या वर्तमान में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष संबंध रहा हो। हरियाणा सरकार प्राधिकरण और समिति के लिए सचिवालय के रूप में कार्य करने के लिए एक अभिकरण नामित करेगी, जो आवास, परिवहन, वित्तीय और प्रशासनिक सहयोग उपलब्ध और महंगाई भत्ता राज्य सरकार के कराएगा। बैठक शुल्क, यात्रा भत्ता नियमों के अनुसार दिया जाएगा।