ग्वालियर में गैस सिलेंडर की किल्लत के कारण चार में से तीन दीनदयाल रसोई बंद हो गई हैं। इससे जरूरतमंदों को मिलने वाले भोजन की थालियों की संख्या में भारी गिरावट आई है। पहले जहां औसतन 3700 थालियां वितरित होती थीं, वहीं अब यह संख्या घटकर मात्र 1300 रह गई है। वर्तमान में केवल अंतरराज्यीय बस स्टैंड पर स्थित दीनदयाल रसोई ही चालू है। यहीं से सीमित मात्रा में भोजन तैयार कर इंटक मैदान भेजा जा रहा है। झांसी रोड बस स्टैंड की रसोई भी पूरी तरह बंद हो चुकी है। यदि सिलेंडर की आपूर्ति में जल्द सुधार नहीं हुआ, तो अंतरराज्यीय बस स्टैंड की रसोई भी बंद हो सकती है। अधिकारियों के गैस सिलेंडर उपलब्ध होने के दावों के बावजूद, जमीनी हकीकत अलग है। नगर निगम को इन चार रसोई के लिए प्रतिदिन 8 से 10 सिलेंडर मिलते थे। हालांकि, 13 मार्च से इसमें कटौती शुरू हो गई, उस दिन केवल 5 सिलेंडर मिले और शनिवार को यह संख्या घटकर 2 रह गई। इसी वजह से तीन दीनदयाल रसोई पर ताले लग गए। सिलेंडर की कमी के कारण थालियों की संख्या में लगभग 60-65 प्रतिशत की कमी आई है। बड़ी बस स्टैंड से ही रोटी और अन्य भोजन तैयार करके दोपहर में दो स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है, लेकिन यह मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं है। 65-70% तक थाली कम हुई दीनदयाल रसोई के इंचार्ज प्रमोद सिंह ने दैनिक भास्कर से बात करते हुए बताया कि सिलेंडर की कमी के कारण रसोई में खाना काम बन रहा है, रसोई से जिन स्थान पर खाना सप्लाई होता था वह भी नहीं हो पा रहा है। पूर्व में दीनदयाल रसोई में 3 हजार से 3700 थालियां बनती थी, लेकिन अभी यह घटकर 1 हजार से 1500 की रह गई है। दीनदयाल रसोई में हर दिन थाली में लोगों के लिए अलग-अलग खाना बदल कर दिया जाता था, लेकिन गैस की किल्लत के चलते अब इसमें भी कमी कर दी गई है। गैस की किल्लत के चलते हम रोड से गर्म पानी करके खाना बनाने में यूज कर रहे हैं। रसोई में कम खाना बन रहा है इसलिए हम लोगों की खान की पूर्ति नहीं कर पा रहे हैं। गैस सिलेंडर की दिक्कत है इस मामले में अपर आयुक्त नगन निगम प्रदीप तोमर ने बताया दीनदयाल प्रसाद घर की रसोई के लिए पर्याप्त गैस सिलेंडर दो-तीन दिन से नहीं मिले हैं। ऐसी स्थिति में सिर्फ बड़े बस स्टैंड की किचन से ही खाना भेजा रहा है। शेष जगह रसोई चालू नहीं है। जल्दी ही व्यवस्था ठीक हो जाएगी।
ग्वालियर में गैस संकट: 3 दीनदयाल रसोई बंद:थालियों की संख्या 3700 से घटकर 1300 पहुंची, अधिकारियों के दावे निकले खोखले
