हरियाणा के पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं JJP नेता दुष्यंत चौटाला करनाल में आयोजित युवा योद्धा सम्मेलन में पहुंचे। सम्मेलन में उनके साथ JJP नेता दिग्विजय चौटाला भी मौजूद रहे। सम्मेलन के बाद मीडिया से बातचीत में दुष्यंत चौटाला ने एसवाईएल मुद्दे पर हरियाणा और पंजाब के मुख्यमंत्रियों की बैठक को लेकर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि अगर हरियाणा के मुख्यमंत्री चाहते तो यह मामला 6 महीने पहले हुई बैठक में ही सुलझ सकता था। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा आगामी पंजाब चुनाव को देखते हुए जानबूझकर इस मुद्दे को टाल रही है। दुष्यंत चौटाला ने कहा कि केंद्र सरकार को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर फैसला करने के आदेश दे रखे हैं, लेकिन दो साल बीतने के बाद भी कोई ठोस निर्णय नहीं हुआ। हरियाणा सरकार चाहे तो कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट भी दायर कर सकती है, लेकिन ऐसा नहीं किया जा रहा। इससे साफ है कि हरियाणा के मुख्यमंत्री ही नहीं चाहते कि पंजाब के साथ एसवाईएल पर कोई अंतिम फैसला हो। यूजीसी गाइडलाइंस पर जताई गंभीर चिंता दुष्यंत चौटाला ने कहा कि आज देश में सबसे महत्वपूर्ण बहस यूजीसी की दो नई गाइडलाइंस को लेकर है। पहली गाइडलाइन वाइस चांसलर की नियुक्ति से जुड़ी है और दूसरी यूनिवर्सिटी और कॉलेजों के भीतर कमेटियां बनाकर मॉनिटरिंग करने से संबंधित है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार कॉन्क्रेंट लिस्ट के विषय को कमजोर कर इसे केंद्र के कानून के रूप में लागू करना चाहती है, जो बेहद खतरनाक है। उन्होंने कहा कि अगर किसी कॉलेज या यूनिवर्सिटी की कमेटी कार्रवाई नहीं करती तो उसे यूजीसी से वंचित करने का प्रावधान रखा गया है। वहीं वाइस चांसलर की नियुक्ति पहले राज्य का विषय था, जिसे अब केंद्र की कमेटियों के अधीन लाया जा रहा है। इससे राज्यों के पास यह अधिकार ही नहीं बचेगा कि वे अपनी यूनिवर्सिटियों के वाइस चांसलर नियुक्त कर सकें। शिक्षित समाज से विरोध की अपील दुष्यंत चौटाला ने कहा कि वह तब हैरान रह गए, जब उत्तर प्रदेश सरकार के एक सीटीएम ने यूजीसी गाइडलाइंस के विरोध में इस्तीफा दे दिया। अगर पढ़े-लिखे और शिक्षित लोग इसे खतरा मान रहे हैं तो सोचिए देश की 55 प्रतिशत आबादी, जो उच्च शिक्षा में है या आने वाली है, उसके लिए यह कितना बड़ा खतरा है। कर्ण चौटाला के बयान पर प्रतिक्रिया इनेलो नेता कर्ण चौटाला के उस बयान पर, जिसमें उन्होंने कहा था कि जिन्हें जनता ने नकार दिया, उनके बारे में वह बात नहीं करना चाहते, दुष्यंत चौटाला ने कहा कि जनता ने JJP को सिर्फ नकारा ही नहीं, बल्कि कई जगह पूचकारा और गले भी लगाया है। उन्होंने ऐलान किया कि युवाओं को सशक्त बनाने के लिए युवा योद्धा अभियान को आगे बढ़ाया जाएगा और 13 मार्च को डॉ. अजय सिंह चौटाला के जन्मदिन पर प्रदेशभर का युवा एकजुट होगा। दिग्विजय चौटाला का यूजीसी और एसवाईएल पर तीखा बयान JJP नेता दिग्विजय चौटाला ने यूजीसी मुद्दे पर कहा कि केंद्र सरकार जनमानस की भावनाओं के साथ खेलना चाहती है। उन्होंने कहा कि जो लोग इतिहास से नहीं सीखते, वे सुनहरा भविष्य नहीं देख सकते। उन्होंने युवाओं से कहा कि भाजपा से नहीं, बल्कि आरएसएस की सोच से लड़ने की जरूरत है। एसवाईएल मुद्दे पर दिग्विजय चौटाला ने कहा कि भाजपा और केंद्र की राजनीति करने वाले लोग इस मुद्दे को कभी सुलझने नहीं देंगे। कांग्रेस और भाजपा दोनों ही अपने-अपने राज्यों में राजनीतिक हितों को सुरक्षित रखना चाहते हैं। अगर वे हरियाणा में एसवाईएल की बात करेंगे तो पंजाब में इसका नुकसान झेलना पड़ेगा। उन्होंने दो टूक कहा कि एसवाईएल की लड़ाई सिर्फ JJP ही लड़ेगी। इनेलो पर दिग्विजय चौटाला का तंज इनेलो नेता कर्ण चौटाला के बयान पर दिग्विजय चौटाला ने तंज कसते हुए कहा कि एक कहावत है- चीन नहीं तो कोचिन ही सही। उन्होंने कहा कि इनेलो के युवा सम्मेलनों में 90 प्रतिशत भीड़ बुजुर्गों की होती है। उन्होंने कर्ण चौटाला को नसीहत दी कि पहले अपनी पार्टी में युवाओं के लिए लड़ाई लड़ें। उन्होंने सौरव गांगुली का उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे गांगुली अपने करियर का आखिरी मैच खेलने के लिए बीसीसीआई से मिन्नतें करते रहे, लेकिन किसी ने नहीं सुना, वैसा ही हाल मेरे चाचा और उनकी पार्टी का है। उन्होंने कहा कि इनेलो के पास न कोई विजन है, न सोच और न ही कोई प्रगतिशील एजेंडा, सिर्फ डराने और धमकाने की राजनीति बची है।
करनाल पहुंचे पूर्व डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला:बोले- SYL पर भाजपा टाल रही फैसला, पंजाब चुनाव के डर से देरी
