हरियाणा में उद्योग-श्रमिक मैत्री परिषद का गठन कर दिया गया है। सरकार ने राज्य के औद्योगिक और आर्थिक ढांचे को मजबूती के लिए आगामी वित्तीय वर्ष के राज्य बजट के विचार-विमर्श और निर्माण के लिए उच्च स्तरीय समिति उद्योग-श्रमिक मैत्री परिषद के गठन को मंजूरी दे दी है। गवर्नर की मंजूरी के बाद गठित यह परिषद सीएम नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में काम करेगी। परिषद का उद्देश्य बजट निर्माण में उद्योग जगत और श्रमिक वर्ग के बीच संतुलन स्थापित करना और औद्योगिक विकास को गति देना है। इस समिति में श्रम मंत्री अनिल विज, अम आयुक्त, विभिन्न विभागों के वरिष्ठ प्रशासनिक सचिवों के अलावा औद्योगिक संगठनों और श्रमिक संघों के प्रतिनिधि भी सदस्य होंगे। ये होंगे परिषद के काम परिषद बजट सुझावों के साथ-साथ औद्योगिक वातावरण को बेहतर बनाने के उपायों पर भी चर्चा करेगी। परिषद का फोकस न्यूनतम मजदूरी दरों के पुनरीक्षण, औद्योगिक विवादों के शीघ्र समाधान के लिए 5 नए श्रम न्यायालयों की स्थापना, कर्मचारियों के लिए बीमा और सामाजिक सुरक्षा पोर्टल की निगरानी, औद्योगिक लाइसेंसिंग प्रक्रिया के सरलीकरण और विकेंद्रीकरण पर रहेगा। 29 को पंचकूला में सर्वदलीय मीटिंग हरियाणा सरकार ने बजट से पहले ऑल पार्टी मीटिंग बुलाई है। इसको लेकर 29 जनवरी को पंचकूला में सीएम नायब सैनी बजट को लेकर विपक्षी नेताओं से मंथन करेंगे। इसमें सभी विधायकों, विपक्षी नेताओं और निर्दलीय प्रतिनिधियों को शामिल होने के लिए न्योता भेजा जाएगा। विधायक अपनी क्षेत्रीय समस्याएं और विकास संबंधी सुझाव सीधे सीएम के सामने रखेंगे, जिन्हें बजट में शामिल किया जा सके। हाल ही में नई दिल्ली में हुई भाजपा कोर ग्रुप की बैठक में सीएम ने अब तक हुई प्री-बजट बैठकों से जुड़े सुझावों पर चर्चा की। इसका उद्देश्य राजनीतिक, प्रशासनिक और क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखना है। सवा दो लाख करोड़ तक पहुंच सकता है बजट इस बार हरियाणा के बजट का अनुमान सवा 2 लाख करोड़ रुपए तक लगाया जा रहा है, जो राज्य के वित्तीय इतिहास में नया रिकॉर्ड होगा। बजट का फोकस बुनियादी ढांचा, उद्योग, रोजगार, कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य, खेल और सामाजिक कल्याण पर रहेगा। सरकार पहले से चल रही योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी विशेष ध्यान दे रही है। बजट को लेकर CM लगातार कर रहे मीटिंग सीएम नायब सिंह सैनी पहले ही प्री-बजट बैठकों के माध्यम से उद्योगपतियों, व्यापारियों, विधायकों, सांसदों और विभिन्न सामाजिक वर्गों के प्रतिनिधियों से सुझाव लेकर बजट की रूपरेखा तैयार कर रहे हैं। इस रणनीति का उद्देश्य बजट को केवल ‘टॉप-डाउन’ दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि वास्तविक समस्याओं और अपेक्षाओं को ध्यान में रखते हुए ‘ग्राउंड-अप अप्रोच से तैयार करना है। सीएम ने गुरुग्राम, फरीदाबाद और नई दिल्ली में उद्योगपतियों, व्यापारियों और कॉर्पोरेट सेक्टर के प्रतिनिधियों के साथ बैठकों के माध्यम से बजट की दिशा तय करने के लिए सुझाव लिए, उनका उद्देश्य केवल आर्थिक विकास नहीं, बल्कि विभिन्न वर्गों की वास्तविक अपेक्षाओं को बजट में शामिल करना है। CM के पास ही वित्त विभाग की जिम्मेदारी हरियाणा में वित्त मंत्रालय सीएम नायब सिंह सैनी के पास ही है। पिछले वर्ष उन्होंने मौजूदा सरकार का पहला वार्षिक बजट स्वयं पेश किया था और फरवरी-मार्च में होने वाले बजट सत्र में भी वे ही हरियाणा सरकार का सालाना बजट विधानसभा में प्रस्तुत करेंगे, यह प्रशासनिक मॉडल नया नहीं है। पूर्व सीएम और वर्तमान केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने भी अपने दूसरे कार्यकाल में वित्त मंत्रालय अपने पास रखते हुए लगातार 5 बजट खुद पेश किए थे। हरियाणा में प्री-बजट बैठकों की शुरुआत मनोहर लाल के दूसरे कार्यकाल में हुई थी। उस समय यह प्रयोग माना गया था, लेकिन अब यह सरकार की स्थापित कार्यशैली बन चुका है।
हरियाणा में उद्योग-श्रमिक मैत्री परिषद का गठन:CM सैनी होंगे अध्यक्ष; मंत्री विज होंगे सदस्य, उद्योग और श्रमिक वर्ग के सुझावों पर होगा बजट
