हिसार से आज नांदेड़ साहिब जाएगी फ्लाइट:एयरपोर्ट पर HGSPC का कार्यक्रम; 3:40 बजे उड़ान भरेगा विमान, 61 श्रद्धालु जाएंगे

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हरियाणा में हिसार के महाराजा अग्रसेन एयरपोर्ट से आज महाराष्ट्र के नांदेड साहिब के लिए फ्लाइट उड़ेगी। श्री गुरु तेग बहादुर साहिब के 350वें शहीदी शताब्दी समारोह के उपलक्ष्य में प्रशासन ने हिसार से नांदेड़ (महाराष्ट्र) स्थित तख्त श्री हजूर साहिब के लिए पहली बार विशेष हवाई सेवा शुरू की है। आज दोपहर 3:40 बजे विमान हिसार से उड़ान भरेगा। इस पहली उड़ान में कुरुक्षेत्र के 61 श्रद्धालु शामिल होंगे। यह जत्था 28 जनवरी को वापस लौटेगा। वापसी के समय विमान दिल्ली या चंडीगढ़ एयरपोर्ट पर लैंड करेगा। अधिकारियों के अनुसार, इस यात्रा के लिए एक तरफ का किराया लगभग 5,000 रुपए निर्धारित किया गया है। वर्तमान में हिसार के 8 श्रद्धालुओं ने पहले जत्थे के लिए 10-10 हजार रुपए जमा कराए हैं, हालांकि देर शाम तक उनके टिकट कंफर्म होने की प्रक्रिया जारी थी। महीने में एक या दो दिन नियमित होगी सेवा
गुरुद्वारा सिंह सभा नागोरी गेट के प्रधान करमजीत सिंह और प्रवक्ता सोनू सिंह खुराना ने बताया कि प्रशासन की योजना इस सेवा को महीने में एक या दो दिन नियमित रूप से संचालित करने की है, ताकि क्षेत्र के लोग आसानी से धार्मिक स्थलों के दर्शन कर सकें। आज हिसार एयरपोर्ट पर हरियाणा सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी की मांग पर कार्यक्रम रखा गया है। इस फ्लाइट को हरी झंडी दिखाने हिसार एयरपोर्ट पर हरियाणा सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी के अध्यक्ष जगदीश झिंडा समेत कमेटी के और भी सदस्य मौजूद रहेंगे। हिसार से ट्रेन से 2 दिन का समय लगता है
बता दें कि हिसार से नांदेड़ साहिब की दूरी करीब 1,475 km है और यह महाराष्ट्र के नांदेड साहिब में है। हिसार से सप्ताह में दो ट्रेनें नांदेड़ साहिब की तरफ जाती हैं। इसमें 42 घंटे से अधिक का समय लग जाता है। फ्लाइट संचालन से श्रद्धालुओं का समय बचेगा। नांदेड़ साहिब की देश-विदेश में मान्यता
तख्त सचखंड श्री हजूर साहिब नांदेड़ शहर के सबसे पवित्र और ऐतिहासिक गुरुद्वारों में से एक है और सिख धर्म के पांच प्रमुख तख्तों में शुमार है। यह वह पवित्र स्थान है जहां दसवें सिख गुरु, श्री गुरु गोविंद सिंह जी ने 1708 ईस्वी में अंतिम सांस ली थी । इसलिए, सिख धर्म में इस स्थल का विशेष महत्व है। इसे दक्षिण भारत का प्रमुख सिख तीर्थस्थल माना जाता है और इसके गहन आध्यात्मिक महत्व के कारण इसे “दक्षिण की काशी” भी कहा जाता है। श्री गुरु गोविंद सिंह जी की स्मृति में यहां एक भव्य और कलात्मक रूप से निर्मित गुरुद्वारा बनाया गया है।