एडीजीसी क्राइम नितिन त्यागी ने बताया कि घटना 29 जून 2020 की है। वादी बाबूराम ने कासना थाने में मुकदमा दर्ज कराया था कि उनका भतीजा सोनू बिलासपुर से अपने गांव नियाना लौट रहा था। रास्ते में जसमाल और उसके पुत्र राजकुमार के अलावा राजकुमार के पुत्र निशांत ने ट्रैक्टर-ट्रॉली खड़ी कर रखी थी।सोनू ने रास्ता देने को कहा तो सभी ने गाली-गलौच की और रास्ता देने से इनकार कर दिया। विरोध पर उससे मारपीट की गई। किसी तरह सोनू बचकर घर पहुंचा और अपने परिजनों को पूरी बात बताई। सोनू की बात सुनकर वादी के भाई राजेंद्र सिंह, बिजेंद्र सिंह और देवेंद्र सिंह शिकायत करने जसमाल के घर पहुंचे। वहां पहले से मौजूद राजकुमार, निशांत और मोंटी ने उनके साथ गाली-गलौच शुरू कर दी। इस बीच जसमाल ने अपनी लाइसेंसी बंदूक निकालकर निशांत को दे दी और राजकुमार की पत्नी निरोज ने घर से दो फरसे निकालकर अपने पति राजकुमार और पुत्र मोंटी को थमा दिए। निशांत ने बंदूक से बिजेंद्र पर गोली चलाई, जिससे वह मौके पर ही गिर पड़ा। वहीं, राजकुमार और मोंटी ने फरसे से राजेंद्र, बिजेंद्र और देवेंद्र पर हमला कर दिया। गोली लगने से बिजेंद्र सिंह की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि राजेंद्र सिंह और देवेंद्र सिंह गंभीर रूप से घायल हो गए। फरसे के वार से देवेंद्र के बाएं हाथ की कलाई में चोट आई, जबकि राजेंद्र सिंह के हाथ, छाती और पेट पर गहरी चोटें आईं। घटना के बाद ग्रामीणों के शोर मचाने पर जसमाल, राजकुमार, निशांत, मोंटी और निरोज धमकी देते हुए फरार हो गए। पुलिस जांच में घटनास्थल से खून से सने दो फरसे और एक लाइसेंसी बंदूक बरामद हुई। पुलिस ने आरोपितों को गिरफ्तार कर जेल भेजा। उन्होंने बताया कि इनके खिलाफ पुलिस ने चार्जशीट दाखिल की। अभियोजन ने अदालत में कहा कि आरोपियों ने घटना के बाद शव को अपने घर में खींचने की कोशिश की, ताकि घटना के स्वरूप को बदलकर साक्ष्य मिटाया जा सके।
उन्होंने बताया कि मामले की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजेश कुमार मिश्रा की अदालत में चल रही थी। इस मामले में न्यायालय में 14 लोगों की गवाही हुई। बहस पूरी होने के बाद अदालत ने मामले में अमीनाबाद उर्फ नियाना गांव निवासी जसमाल उनके पुत्र राजकुमार, पुत्र वधु निरोज और पोते निशांत उर्फ निशु और मोंटी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
