उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में उगने वाला तरूड़ पारंपरिक कंदमूल आहार है. यह अधिकतर बेल के रूप में जंगलों में पाया जाता है. पुराने समय में यह कंद पहाड़ों में रहने वाले लोगों के लिए ऊर्जा का बड़ा स्रोत हुआ करता था. आज भी बागेश्वर जैसे जिलों में इसे पारंपरिक आहार के रूप में खाया जाता है. कई बार एक ही बेल से कई किलो वजन का तरूड़ निकल आता है. इसे निकालते समय अनुभव की जरूरत होती है, क्योंकि गलत खुदाई से कंद खराब हो सकता है.
थकान तुरंत फुर्र, दर्द छूमंतर…इतना ताकतवर पहाड़ों का ये कंद, खून की कमी का तगड़ा उपाय
