गुरुवार को विश्व दृष्टि दिवस के अवसर पर जागरूकता एवं सम्मान समारोह आयोजित किया गया। इस अवसर पर अतिथियों द्वारा मृत्युपरांत नेत्रदान कर चुके चार लोगों के स्वजनों को शाल, श्रीफल, मोमेंटो और प्रमाण पत्र भेंटकर कर सम्मान किया गया। इस दौरान उपस्थित स्वजनों ने नेत्रदान के अनुभव साझा किए। नेत्रदान पखवाड़ा में उत्कृष्ट कार्य करने वाले पांच नर्सिंग छात्रों को प्रमाण पत्र प्रदान किया गया। इस कार्यक्रम में जिले के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे कुल 28 लोगों ने मृत्युपरांत देहदान करने की घोषणा कर विधिवत प्रक्रिया पूरी की। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में सीएमएचओ धमतरी डा यू एल कौशिक उपस्थित थे। इन्होंने नेत्रदान का महत्व बताते हुए उपस्थित लोगों को इसके लिए प्रेरित किया। नेत्रदान करने से दो लोगों को आंखों की रोशनी मिलती है। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डा अरुण कुमार टोंडर ने कहा कि नेत्रदान करके हम किसी की अंधेरी जिंदगी में उजाला ला सकते हैं।
राष्ट्रीय अंधत्व कार्यक्रम के नोडल अधिकारी एवं नेत्र रोग विशेषज्ञ डा राजेश सूर्यवंशी ने बताया कि हर साल अक्टूबर महीने के दूसरे गुरुवार को विश्व दृष्टि दिवस मनाया जाता है। इस साल अपनी आंखों से प्यार करें की थीम पर यह दिवस मना रहे हैं। मनुष्य की दृष्टि है तो सबकुछ है। अल्प दृष्टि का उपचार संभव है। आंख की दृष्टि में कमी की वजह से मनुष्य शिक्षा और व्यवसाय से प्रभावित होता है। नेत्रदान करके हम किसी भी व्यक्ति के जीवन को सुगम और उज्ज्वल बना सकते हैं। जिले में बचपन से लेकर मृत्यु तक के कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है। जिला अस्पताल के एसएनसीयू वार्ड में नवजात शिशुओं को अंधत्व से बचाने के लिए रेटिनोपैथी आफ प्रीमैच्योरिटी (आरओपी) कराया जा रहा है। जिसमें बच्ची की जांच कर समय परउपचार कर आंख की रोशनी जाने से बचाया जा रहा है। समग्र बाल सुरक्षा अभियान के तहत जिले में 388 स्कूलों के 22500 बच्चों की आंख जांच किया गया। जिसमें 950 बच्चों को चिन्हांकित किया गया है। इन्हें शासन की ओर से चश्मा प्रदान किया जाएगा। समय रहते आंखों की जांच कराएं। जिले में अब तक 54 लोगों का मरणोपरांत नेत्रदान उनके स्वजनों द्वारा किया जा चुका है। इस अवसर पर डीपीएम डा प्रिया कंवर, सहायक नेत्र अधिकारी डा गुरुशरण साहू, पी एन साहू सहित स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी एवं जीएनएम नर्सिंग के छात्र – छात्राएं उपस्थित थे।
