MP में तेज गर्मी…हीट स्ट्रोक का खतरा बढ़ा:नर्मदापुरम में 2 दिन तीव्र लू; तापमान 40.1°C; 15, 16-17 को बारिश का अलर्ट

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मध्य प्रदेश में सूरज के ‘हीट अटैक’ का दौर जारी है। शुक्रवार को नर्मदापुरम में दूसरे दिन भी तीव्र लू का असर देखा गया। यहां दिन का तापमान 40.1 डिग्री रहा। शनिवार को गर्मी से थोड़ी राहत मिल सकती है। वहीं, 15, 16 और 17 मार्च को प्रदेश के उत्तरी-पूर्वी हिस्से यानी, ग्वालियर-चंबल, जबलपुर, रीवा और शहडोल संभाग के जिलों में बारिश होने का अनुमान है। तेज गर्मी की वजह से हीट स्ट्रोक का खतरा बढ़ गया है। इसलिए मौसम विभाग ने अपनी एडवायजरी में इसे लेकर खासतौर पर सलाह दी है। कहा है कि लोग दोपहर में जरूरी होने पर ही घर से बाहर निकले। ठंडे पानी का सेवन करें। घर का तापमान कम रखने के लिए ओवन का उपयोग कम ही करें। बता दें कि मार्च के दूसरे हफ्ते में ही प्रदेश में तेज गर्मी पड़ रही है। पिछले 2 दिन से पारा 40 डिग्री के पार ही है। ग्वालियर, चंबल, उज्जैन, इंदौर, भोपाल, नर्मदापुरम और सागर संभाग में गर्मी का असर ज्यादा है। नर्मदापुरम प्रदेश में सबसे गर्म बना हुआ है। शुक्रवार को पचमढ़ी को छोड़ बाकी शहरों में तापमान 35 डिग्री से ज्यादा ही रहा। प्रदेश के 5 बड़े शहरों में भोपाल में सबसे ज्यादा 37.8 डिग्री, इंदौर में 37.6 डिग्री, जबलपुर में 37.5 डिग्री, उज्जैन में 37.4 डिग्री और ग्वालियर में 36.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वहीं, नर्मदापुरम में 40.1 डिग्री, रतलाम में 39.2 डिग्री, मंडला में 39 डिग्री, धार-खजुराहो में 38.9 डिग्री, दमोह में 38.5 डिग्री, खरगोन में 38.4 डिग्री, सागर, टीकमगढ़-सिवनी में पारा 38 डिग्री पहुंच गया। कल से बदलेगा मौसम
मौसम विभाग ने 14 मार्च को एक्टिव होने वाले वेस्टर्न डिस्टरबेंस (पश्चिमी विक्षोभ) की वजह से तीन दिन तक अलर्ट जारी किया है। 15 मार्च से प्रदेश में असर दिखाई देगा। जिन जिलों में बारिश होगी, वहां अधिकतम एवं न्यूनतम तापमान में थोड़ी गिरावट रहेगी, लेकिन बाकी शहरों में पारा चढ़ा हुआ रहेगा। मार्च में ही भोपाल जलाभावग्रस्त घोषित, ट्यूबवेल खनन पर रोक मार्च महीने में ही भोपाल जिला जल आभावग्रस्त घोषित हो गया है। कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने शुक्रवार को यह आदेश जारी किए। इसके साथ ही प्राइवेट ट्यूबवेल खनन पर भी रोक लगा दी गई है। सरकारी ट्यूबवेल खनन हो सकेंग और पीएचई अपनी नल-जल योजनाओं को सुचारू चला सकेगा। कलेक्टर के आदेश में कहा गया है कि यदि किसी ने बिना अनुमति ट्यूबवेल खनन किया तो 2 साल तक की सजा हो सकेगी। वहीं, बोरवेल मशीनें भी जिले से नहीं गुजर पाएंगी। तेज गर्मी की वजह से यह आदेश लागू किया गया है। इस साल करीब 25 दिन पहले ही रोक लगाई गई है। पिछले साल 7 अप्रैल को आदेश लागू किया था। इस वजह से गर्मी का असर तेज मौसम विभाग के अनुसार, वर्तमान में हवा की दिशा उत्तर-पूर्व से अब पश्चिम और उत्तर-पश्चिम है। वहीं, हवा में नमी बहुत कम है। साथ ही रेगिस्तानी इलाकों से मप्र पहुंचती है। यह अपने साथ गर्मी भी लाती है। 3 दिन बारिश, गरज-चमक वाला मौसम मार्च में सर्दी-जुकाम, एलर्जी का खतरा
डॉक्टरों‎ की मानें तो मार्च का यही मौसम ‎सबसे ज्यादा बीमारियां फैलाता है। दरअसल, इस महीने दिन में तो गर्मी बढ़ जाती है, लेकिन रात और सुबह हल्की ठंड रहती है। कई बार लोग दिन की गर्मी से बचने के लिए हल्के कपड़े पहन लेते हैं। वहीं, कोल्ड्रिंक्स समेत शीतल पेय पदार्थों का भी सेवन करते हैं। इससे सर्दी-जुकाम एलर्जी‎ और अस्थमा के मरीज बढ़ते हैं। ‎सुबह और देर रात ठंडी हवा से ‎बचना जरूरी है। खासकर बच्चों और ‎बुजुर्गों को।‎ इस बार पहले ही सप्ताह से गर्मी का दौर
प्रदेश में मार्च के दूसरे पखवाड़े में तेज गर्मी का ट्रेंड है। पिछले 10 साल में 15 मार्च के बाद ही तेज गर्मी पड़ी है, लेकिन इस बार ट्रेंड बदल गया है। दूसरे पखवाड़े की बजाय शुरुआत में ही पारे में उछाल आया है। मार्च में तीनों मौसम का असर
मध्यप्रदेश में पिछले 10 साल के आंकड़ों पर नजर डालें तो मार्च महीने में रातें ठंडी और दिन गर्म रहते हैं। बारिश का ट्रेंड भी है। इस बार भी ऐसा ही मौसम है। भोपाल, इंदौर और उज्जैन में दिन का अधिकतम तापमान 40 डिग्री के पार पहुंच सकता है, जबकि रात में 10 से 17 डिग्री के बीच रहने का अनुमान है। मौसम विभाग के अनुसार, मार्च में ग्वालियर में मौसम सबसे ज्यादा बदला हुआ रहता है। यहां रात में पारा 8 डिग्री तक पहुंच चुका है। जबलपुर में दिन में गर्मी और रात में ठंड रहती है। अप्रैल-मई सबसे ज्यादा गर्म रहेंगे
मौसम विभाग ने इस साल अप्रैल और मई में सबसे ज्यादा गर्मी पड़ने का अनुमान जताया है। इन दो महीने के अंदर ग्वालियर, चंबल, जबलपुर, रीवा, शहडोल और सागर संभाग के जिलों में पारा 45 डिग्री के पार पहुंच सकता है। भोपाल, इंदौर, उज्जैन और नर्मदापुरम संभाग भी गर्म रहेंगे। फरवरी में 4 बार ओले-बारिश हुई
इस बार फरवरी में मौसम का मिजाज चार बार बदला। शुरुआत में ही प्रदेश में दो बार ओले, बारिश और आंधी का दौर रह चुका है। इससे फसलों को खासा नुकसान हुआ था। इसके बाद सरकार ने प्रभावित फसलों का सर्वे भी कराया था। 18 फरवरी से तीसरी बार प्रदेश भीग गया है। 19, 20 और 21 फरवरी को भी असर रहा। फिर चौथी बार 23-24 फरवरी को भी ओले-बारिश का दौर रहा। MP के 5 बड़े शहरों में मार्च में मौसम का ऐसा ट्रेंड… भोपाल में दिन में तेज गर्मी के साथ बारिश भोपाल में मार्च महीने में दिन में तेज गर्मी पड़ने के साथ बारिश का ट्रेंड भी है। मौसम विभाग के अनुसार, मार्च महीने में गर्मी के सीजन की शुरुआत हो जाती है। इसके चलते दिन-रात के तापमान में बढ़ोतरी होने लगती है। आंकड़ों पर नजर डालें तो 30 मार्च 2021 को अधिकतम तापमान रिकॉर्ड 41 डिग्री पहुंच चुका है। वहीं, 45 साल पहले 9 मार्च 1979 की रात में पारा 6.1 डिग्री दर्ज किया गया था। वर्ष 2014 से 2023 के बीच दो बार ही अधिकतम तापमान 36 डिग्री के आसपास रहा। बाकी सालों में पारा 38 से 41 डिग्री सेल्सियस के बीच रहा है। इंदौर में 41.1 डिग्री तक पहुंच चुका पारा इंदौर में मार्च से गर्मी का असर तेज होने लगता है। यहां दिन का पारा 41.1 डिग्री तक पहुंच चुका है, जो 28 मार्च 1892 को दर्ज किया गया था। 4 मार्च 1898 को रात में पारा 5 डिग्री सेल्सियस तक रहा था। 24 घंटे में करीब एक इंच बारिश होने का रिकॉर्ड है, जबकि पूरे महीने में दो इंच पानी गिर चुका है। मौसम विभाग के अनुसार, मार्च में 2 से 3 दिन बारिश होती है। कभी-कभी धूल भरी हवा की रफ्तार भी तेज होती है। ग्वालियर में गर्मी, ठंड-बारिश का ट्रेंड मार्च महीने में ग्वालियर में गर्मी, ठंड और बारिश तीनों का ही ट्रेंड है। 31 मार्च 2022 को दिन का पारा रिकॉर्ड 41.8 डिग्री पहुंच गया था, जबकि 1 मार्च 1972 की रात में न्यूनतम तापमान 5.4 डिग्री रिकॉर्ड हो चुका है। साल 2015 में पूरे महीने 5 इंच से ज्यादा पानी गिरा। वहीं, 12 मार्च 1915 को 24 घंटे में करीब 2 इंच बारिश हुई थी। जबलपुर में मार्च की रातें रहती हैं ठंडी जबलपुर में मार्च में भी रातें ठंडी रहती हैं। पारा औसत 15 डिग्री के आसपास ही रहता है। वहीं, दिन में 36 से 40 डिग्री के बीच तापमान दर्ज किया जाता है। 31 मार्च 2017 को दिन का पारा 41.2 डिग्री सेल्सियस पहुंच चुका है, जबकि 4 मार्च 1898 में रात का तापमान 3.3 डिग्री दर्ज किया गया था। यहां मार्च में मावठा भी गिरता है। पिछले 10 में से 9 साल बारिश हो चुकी है। उज्जैन में दिन रहते हैं गर्म, 6 दिन बारिश का ट्रेंड भी
उज्जैन में दिन गर्म रहते हैं। 22 मार्च 2010 को पारा रिकॉर्ड 42.5 डिग्री सेल्सियस पहुंच चुका है। वहीं, 1 मार्च 1971 की रात में न्यूनतम तापमान 4.6 डिग्री रहा था। पिछले साल दिन में तापमान 36 से 42 डिग्री सेल्सियस के बीच रहा है। उज्जैन में 2017 सबसे गर्म साल रहा था। मौसम विभाग के अनुसार, इस महीने बारिश भी होती है। एक दिन में पौने 2 इंच बारिश का रिकॉर्ड 17 मार्च 2013 का है।