Zuhur Alam Nainital: सरोवर नगरी नैनीताल की वादियों में जब बैठकी होली के शास्त्रीय राग गूंजते हैं, तो उसके पीछे तीन दशकों की कड़ी साधना और एक अटूट संकल्प नजर आता है. रंगकर्मी जुहूर आलम, जिन्हें राष्ट्रपति द्वारा ‘संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार’ से सम्मानित किया जा चुका है, पिछले 30 वर्षों से कुमाऊंनी होली की विलुप्त होती परंपराओं को सींच रहे हैं. राग काफी और जैजैवंती की बंदिशों से लेकर महिलाओं को होली के मुख्य मंच तक लाने की यह कहानी सिर्फ एक उत्सव की नहीं, बल्कि ‘गंगा-जमुनी तहजीब’ की एक जीती-जागती मिसाल है. कैसे होली और रमजान के मिलन से नैनीताल का भाईचारा और मजबूत होता है.
गंगा-जमुनी तहज़ीब की मिसाल! नैनीताल में 30 साल से होली सजा रहे जुहूर आलम, मिल चुका है संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार
