बैठक में विभिन्न जगहों से आए समाजवादी नेताओं ने एक स्वर में कहा कि श्याम रजक लम्बे समय से सामाजिक न्याय, समानता और अधिकारों की लड़ाई लड़ते रहे हैं। समाजवादियों का मानना है कि महादलित और वंचित वर्ग की आवाज को सशक्त बनाने के लिए श्याम रजक जैसा अनुभवी और संघर्षशील नेता राज्य नेतृत्व में शामिल होना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि यदि उन्हें उपमुख्यमंत्री बनाया जाता है तो सामाजिक न्याय को नई दिशा मिलेगी और बिहार के विकास में सहभागिता बढ़ेगी।
रजक समाज के नेता कारू रजक ने भी बैठक में स्पष्ट कहा कि बिहार की राजनीति में श्याम रजक का योगदान अतुलनीय रहा है। उन्होंने कहा कि 74 के जेपी आंदोलन से जुड़े रहे श्याम रजक ने जीवन भर वैचारिक राजनीति और गरीबों के संघर्ष को आगे बढ़ाया है। उनके नेतृत्व में महादलित समाज, मजदूर, पिछड़ा वर्ग और अन्य वंचित लोग मजबूत राजनैतिक प्रतिनिधित्व प्राप्त कर सकते हैं।
बैठक में उपस्थित समाजवादियों ने यह भी कहा कि आज जब बिहार में समावेशी नेतृत्व की आवश्यकता है, तब श्याम रजक को उपमुख्यमंत्री बनाकर सामाजिक समानता और न्याय के मूल्यों को मजबूत किया जा सकता है। उनका कहना था कि वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य में रजक समाज को भी उचित सम्मान और प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए।
वरिष्ठ समाजवादी नेता अनिल प्रसाद सिंह ने भी अपने संबोधन में कहा कि श्याम रजक सामाजिक न्याय की मजबूत आवाज हैं। उन्होंने कहा कि यदि सरकार वास्तव में सर्वसमावेशी विकास चाहती है, तो श्याम रजक को उपमुख्यमंत्री के रूप में अवसर देकर बिहार को नई दिशा और नई ऊर्जा मिल सकती है। उन्होंने कहा कि पूरे बिहार में रजक समाज, महादलित समाज, छात्र और युवा उनसे प्रेरित हैं, तथा ऐसे समय में इस वर्ग की उम्मीदों का सम्मान होना चाहिए।
बैठक में वक्ताओं ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि नेतृत्व से लिखित ज्ञापन देकर श्याम रजक को बिहार का उपमुख्यमंत्री बनाए जाने की मांग की जाएगी। साथ ही इस मुद्दे को लेकर प्रदेशभर में जन-जागरण अभियान चलाने की भी घोषणा की गई।
अंत में बैठक का धन्यवाद ज्ञापन साकेत बिहारी ने किया और कहा कि यह लड़ाई समानता और अधिकारों की लड़ाई है, जो तब तक जारी रहेगी जब तक श्याम रजक को उपयुक्त सम्मान नहीं मिल जाता।
