हिसार के पूर्व सांसद एवं कांग्रेस नेता बृजेंद्र सिंह की सद्भाव यात्रा मंगलवार (17 मार्च) को फतेहाबाद जिले में पहुंचेगी। यहां इस यात्रा की अगुवाई पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा से बगावत कर चुके प्रहलाद सिंह गिल्लाखेड़ा और उनके बेटे आनंदवीर करेंगे। यह यात्रा पांच दिन तक फतेहाबाद जिले में रहेगी। इसके बाद सिरसा जिले के लिए रवाना होगी। बता दें कि, अक्टूबर 2024 से पहले फतेहाबाद में भूपेंद्र सिंह हुड्डा के सबसे नजदीकियों में गिल्लाखेड़ा परिवार की गिनती होती थी। गिल्लाखेड़ा परिवार की ओर से विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की टिकट की मांग की गई। मगर टिकट बलवान सिंह दौलतपुरिया को मिल गई। इसके बाद से गिल्लाखेड़ा पिता-पुत्र का हुड्डा खेमे से मोह भंग हो गया और वह बगावती खेमे में खड़े नजर आए। यह रहेगा बृजेंद्र सिंह की सद्भाव यात्रा का रूट कल 17 मार्च को बृजेंद्र सिंह सद्भाव यात्रा लेकर टोहाना हलके के गांव समैण से फतेहाबाद जिले में प्रवेश करेंगे। इसके बाद कन्हड़ी, गांव कमालवाला होते हुए टोहाना शहर पहुंचेंगे। पहले दिन का रात्रि ठहराव टोहाना में ही होगा। इसके बाद अगले दिन भी टोहाना हलके के गांव जमालपुर, सलेमपुरी, कुलां होते हुए रतिया पहुंचेंगे। रतिया में रात्रि ठहराव होगा। इसके बाद अगले दिन रतिया हलके के गांवों में यात्रा पहुंचेंगी। रतिया शहर में भी कई जगहों से होकर यात्रा निकलेगी। गांव धांगड़ से होगी फतेहाबाद हलके में एंट्री फतेहाबाद हलके में यात्रा की एंट्री गांव धांगड़ से होगी। धांगड़ से होते हुए बृजेंद्र सिंह यात्रा लेकर लघु सचिवालय पहुंचेंगे। जहां बार एसोसिएशन के साथ उनका कार्यक्रम होगा। इसके बाद शहर के बीचोंबीच होते हुए यात्रा भोडियाखेड़ा पहुंचेगी। यहां से गांव ढांड से बनावाली व किरढ़ान होते हुए भट्टू मंडी में रात्रि ठहराव करेगी। अब तक 61 विधानसभा क्षेत्रों में जा चुकी यात्रा पूर्व केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र सिंह डूमरखां के अनुसार, यह सद्भाव यात्रा अब तक प्रदेश के 61 विधानसभा क्षेत्रों में 2 हजार किलोमीटर चल चुकी है। आखिरी चरण में करनाल से 20 हलकों में जाने के बाद 5 मई को यात्रा रोहतक में संपन्न होगी। जानिए… कौन है प्रहलाद सिंह गिल्लाखेड़ा प्रहलाद सिंह गिल्लाखेड़ा ने अपनी राजनीति की शुरुआत पूर्व मुख्यमंत्री स्व.बंसीलाल के बेटे स्व. सुरेंद्र सिंह के साथ की थी। वह उनके बेहद नजदीकी रहे। गिल्लाखेड़ा ने साल 2009 में फतेहाबाद से निर्दलीय चुनाव लड़ा और तत्कालीन कांग्रेस उम्मीदवार दुड़ाराम को 2802 वोटों से हराकर विधायक बने। उस समय निर्दलीयों के सहारे दूसरी बार बनी भूपेंद्र सिंह हुड्डा सरकार को उन्होंने अपना समर्थन दिया। बाद में हुड्डा ने उन्हें मुख्य संसदीय सचिव बनाया। इसके बाद वह कांग्रेस में शामिल हो गए। साल 2014 में वह कांग्रेस की टिकट पर चुनाव लड़े। मगर इस चुनाव में जीत नहीं सके और चौथे नंबर पर रहे। साल 2019 में भी कांग्रेस प्रत्याशी के तौर पर तीसरे नंबर पर रहे।
बृजेंद्र सिंह की ‘सद्भाव यात्रा’ की फतेहाबाद में एंट्री कल:हुड्डा विरोधी पिता-पुत्र करेंगे अगुवाई; टिकट न मिलने से पूर्व CM से हुए अलग
