गुरुग्राम में कॉर्पोरेट जॉब स्ट्रेस एक और युवा सॉफ्टवेयर इंजीनियर के लिए जानलेवा बन गया। इस बार 26 साल के हर्ष बिजौरे शिकार हुए। हर्ष मूलतः भोपाल के रहने वाले हैं। गुरुग्राम में मल्टी नेशनल कंपनी (MNC) से रिजाइन किया था। 30 दिसंबर को लास्ट वर्किंग डे था। आखिरी बार पिता जितेंद्र बिजौरे को फोन पर कहा-पापा अभी माइंड फ्रेश करने मसूरी जा रहा हूं। लौटकर नई जॉब तलाशूंगा। हालांकि वो कभी लौट नहीं पाया। अगली सुबह ही पिता को हर्ष की मौत की खबर मिली। बताया गया कि उसे हार्ट अटैक आया। जवान बेटे की मौत से टूट चुके पिता जितेंद्र कहते हैं- हमें किसी पर शक नहीं। लेकिन इतनी कम उम्र में हार्ट अटैक हैरान करने वाला है। इस मौत से हजारों आईटी प्रोफेशनल्स को झकझोर दिया है। स्वास्थ्य विभाग की एक रिपोर्ट के मुताबिक गुरुग्राम में औसतन हर महीने 8 से 10 युवाओं की हार्ट अटैक में मौत हो रही है। इनमें से 50 फीसदी कॉर्पोरेट के होते हैं। ये वो आंकड़ा है, जिनका पोस्टमॉर्टम करवाया जाता है। बिना पोस्टमॉर्टम वालों की संख्या तो इससे ज्यादा है। हार्टअटैक के अधिकतर मामलों में परिजन पोस्टमॉर्टम नहीं करवाते। गुरुग्राम में प्रति महीने 25 से 30 लोग सुसाइड करते हैं। इसमें से कम से कम 5 लोग अच्छी सैलरी पैकेज वाले युवा होते हैं। 30 दिसंबर को अंतिम ड्यूटी की हर्ष ने दिसंबर की शुरुआत में अपना रिजाइन डाल दिया था। 30 दिसंबर तक नोटिस पीरियड पर था। 30 दिसंबर को अंतिम दिन अपने सहकर्मियों के साथ मुलाकात कर जॉब छोड़ कर चला गया। वह कुछ दिन स्ट्रेस फ्री होकर रहना चाहता था। इसलिए वह अपने दोस्तों के साथ मसूरी चला गया। कई महीने से स्ट्रेस में था जितेंद्र पिता जितेंद्र बिजौरे जो रेलवे में चीफ रिजर्वेशन सुपरवाइजर हैं, के मुताबिक हर्ष कई महीने से काम के दबाव में था। लंबे ड्यूटी आवर्स, डेडलाइन और कॉर्पोरेट कल्चर से परेशान होकर उसने रिजाइन दिया था। न्यू ईयर पर माइंड रिफ्रेश करने के लिए वह 3 दोस्तों विशाल कुमार, स्वाति और भावना वर्मा के साथ 1 जनवरी को मसूरी पहुंचा। ट्रिप का मकसद न्यू ईयर सेलिब्रेशन और दोस्त के जन्मदिन को मनाना था। 2 जनवरी की रात होटल में पार्टी के बाद हर्ष करीब 11 बजे कमरे में सोने चला गया। अगली सुबह 3 जनवरी को दोस्त उसे नाश्ता देने गए तो शरीर ठंडा पड़ा था। उसे अस्पताल लेकर गए, लेकिन डॉक्टरों ने कार्डियक अरेस्ट बता दिया। मसूरी में होम स्टे में ठहरे थे 3 जनवरी को सुबह करीब 10:54 बजे एमडीटी-112 के जरिए सूचना मिली कि मसूरी के होम स्टे “Zen Den”, के रूम नंबर-102 में ठहरे एक युवक की तबीयत खराब है। उसका शरीर अकड़ा हुआ है। सूचना मिलते ही बार्लोगंज चौकी प्रभारी स्टाफ के साथ तत्काल मौके पर पहुंचे। 108 एम्बुलेंस की मेडिकल टीम पहले से मौजूद थी। युवक को परीक्षण के बाद मृत घोषित किया गया। परिवार को किसी पर संदेह नहीं पिता कहते हैं- हर्ष रोज बात करता था। कुछ नहीं छिपाता था। मसूरी से लौटकर नई जॉब सर्च करने की प्लानिंग थी। नए साल में नई शुरुआत का सपना था, लेकिन सब खत्म हो गया। उन्होंने बताया कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में भी मौत का कारण हार्ट अटैक ही बताया गया। परिवार को किसी तरह का संदेह नहीं है। परिवार में इकलौता बेटा था हर्ष परिवार में इकलौता बेटा था। परिवार के साथ साथ गुरुग्राम में उसके सहकर्मी और दोस्त भी सदमे में हैं। उनका कहना है कि आईटी हब में काम करने वाले युवाओं में बढ़ते स्ट्रेस और हार्ट अटैक के खतरे बढ़ गए हैं। तीन मुख्य पॉइंट में समझें कार्पोरेट जॉब में स्ट्रेस क्यों होता है लंबे और अनियमित वर्किंग आवर्स: कॉर्पोरेट कल्चर में डेडलाइन और क्लाइंट सैटिस्फेक्शन को सबसे ऊपर रखा जाता है। इसका मतलब अक्सर 8 घंटे की बजाय 10-12 घंटे की शिफ्ट, देर रात तक मीटिंग्स, वीकेंड पर काम और हर दिन ऑन मोड में रहना पड़ता है। इससे शरीर का प्राकृतिक संतुलन बिगड़ जाता है, नींद कम होती है और लगातार थकान रहती है। यही क्रोनिक स्ट्रेस का सबसे बड़ा कारण बनता है। हाई परफॉर्मेंस प्रेशर और जॉब इनसिक्योरिटी: हर साल बेहतर रेटिंग, प्रमोशन, बोनस और टॉप परफॉर्मर बनने की होड़ रहती है। साथ ही लेऑफ, रिस्ट्रक्चरिंग और ऑटोमेशन का डर हमेशा बना रहता है। कर्मचारी को लगता है कि अगर आज थोड़ा भी कम किया तो कल जॉब जा सकती है। यह लगातार फाइट और फ्लाइट मोड में रखता है, जिससे एंग्जाइटी और बर्न आउट बढ़ता है। वर्क-लाइफ बैलेंस की कमी और पर्सनल आइडेंटिटी का खोना: कॉर्पोरेट में काम ही जिंदगी बन जाता है। फैमिली टाइम, शौक, एक्सरसाइज और सोशल लाइफ के लिए कम समय बचता है। व्यक्ति की पहचान सिर्फ उसकी जॉब टाइटल और कंपनी से जुड़ जाती है। जब काम में थोड़ी भी असफलता मिलती है तो लगता है पूरी जिंदगी बेकार हो गई। यह मेंटल हेल्थ पर गहरा असर डालता है और डिप्रेशन व हार्ट संबंधी समस्याओं का खतरा बढ़ाता है। ज्यादा ठंड में हार्ट अटैक के बढ़ते मामलों की 3 बड़ी वजह रक्त वाहिकाओं का सिकुड़ना: हार्ट स्पेशलिस्ट की राय में ठंड लगने पर शरीर खुद को गर्म रखने के लिए त्वचा के पास की रक्त वाहिकाएं सिकुड़ जाती हैं। इससे ब्लड प्रेशर अचानक बढ़ जाता है और दिल को खून पंप करने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। पहले से हृदय रोग या ब्लॉकेज वाले लोगों में यह अतिरिक्त दबाव प्लाक फटने या क्लॉट बनने का कारण बन सकता है, जिससे हार्ट अटैक हो जाता है। ऑक्सीजन की कमी और हृदय पर अतिरिक्त भार: ठंडी हवा में सांस लेने पर फेफड़े ठंडी हवा को गर्म करने में एनर्जी खर्च करते हैं, जिससे शरीर में ऑक्सीजन की मांग बढ़ जाती है। साथ ही ठंड से शरीर कांपता है। जो मांसपेशियों की गतिविधि बढ़ाकर दिल की धड़कन तेज कर देता है। दिल को ज्यादा ऑक्सीजन सप्लाई करनी पड़ती है, लेकिन अगर धमनियां पहले से संकरी हैं तो सप्लाई कम पड़ जाती है और हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है। ब्लड क्लॉटिंग का बढ़ना: ठंड में खून गाढ़ा हो जाता है और क्लॉटिंग फैक्टर्स बढ़ जाते हैं, जिससे ब्लड क्लॉट बनने की संभावना अधिक हो जाती है। ऊपर से सर्दियों में लोग कम व्यायाम करते हैं, ज्यादा खाते-पीते हैं और सुबह जल्दी उठकर सैर पर जाते हैं। ये सभी फैक्टर्स मिलकर हार्ट अटैक को ट्रिगर करते हैं। खासकर पहाड़ी इलाकों (जैसे मसूरी) में ऊंचाई पर ऑक्सीजन लेवल कम होने से यह खतरा और दोगुना हो जाता है। कड़ाके की ठंड से हार्ट पर दबाव बढ़ा जिला नागरिक अस्पताल के पीएमओ डॉ. लोकवीर के मुताबिक मसूरी जैसी हिल स्टेशन पर ठंड और ऊंचाई भी हार्ट पर अतिरिक्त भार डालती है। जॉब स्ट्रेस को भी हल्के में नहीं लेना चाहिए। रिजाइन लेकर ब्रेक लेना अच्छा कदम हो सकता है, लेकिन हेल्थ की अनदेखी घातक साबित हो सकती है। उन्होंने कहा कि नियमित व्यायाम, योग, मेडिटेशन और समय पर हेल्थ चेकअप जरूरी हैं। वर्क-लाइफ बैलेंस जरूरी है, जॉब सब कुछ नहीं होती। युवा अपनी सेहत का ध्यान रखें।
गुरुग्राम के इंजीनियर की मसूरी में मौत कॉरपोरेट स्ट्रेस:भोपाल में पिता को बताया-माइंड फ्रेश करने जा रहा; हर माह 8 युवकों की हार्टअटैक से मौत
