मौलाना शहाबुद्दीन ने जुलूस में शामिल लोगों से फरमान जारी करते हुए कहा कि ईद मिलादुन्नबी पैग़म्बरे इस्लाम के जन्मदिन का पर्व है और इस दिन का मकसद केवल खुशी और आस्था का इज़हार है। उन्होंने कहा कि जुलूस में किसी भी तरह का भड़काऊ बयान या नारा नहीं लगाया जाए और नमाज अपने समय पर अदा की जाए। जुलूस में अम्न और शांति बनाए रखना आवश्यक है।
मौलाना ने कहा कि आजकल कुछ नौजवान धार्मिक जुलूसों में डीजे पर नाचते हैं और रुमाल लहराते हैं, जो शरीयत के अनुसार नाजायज और हराम है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि ऐसे कृत्य पैग़म्बरे इस्लाम और पाकिजा जुलूस की गरिमा को नुकसान पहुंचाते हैं। ऐसे लोगों को ताैबा करने और हराम कामों से दूर रहने की सलाह दी गई है। यदि कोई व्यक्ति डीजे लेकर आता है तो उसे जुलूस से बाहर किया जाना चाहिए।
मौलाना ने जुलूस के आयोजकों और अंजुमन के जिम्मेदारों को हिदायत दी कि जुलूस साफ-सुथरा और पवित्र माहौल बनाए रखे। उन्होंने कहा कि यह दिन पूरी दुनिया के सामने पैग़म्बरे इस्लाम के अमन और शांति के संदेश को पहुंचाने का अवसर है। किसी भी प्रकार के नाजायज और हराम कार्य से बचते हुए ही जुलूस को सफल बनाया जा सकता है।
अंततः मौलाना ने सभी मुस्लिमों से अपील की कि वे धार्मिक जुलूस में शामिल होने से पहले शरीयत और धार्मिक मर्यादाओं का पालन करें और अपने आचरण से ईद मिलादुन्नबी के महत्व को बनाए रखें।————–
