हरियाणा सरकार ने रियल एस्टेट सेक्टर में बकाया और नियमों से बचने की प्रवृत्ति पर अब तक की सबसे कड़ी कार्रवाई की है। टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग ने साफ कर दिया है कि जिन डेवलपर्स के ऊपर बाहरी विकास शुल्क (EDC) और राज्य अवसंरचना विकास शुल्क (SIDC) का 20 करोड़ रुपए से अधिक का बकाया है, उन्हें अब न तो नया लाइसेंस मिलेगा और न ही किसी प्रोजेक्ट के लिए कोई नई मंजूरी मिलेगी। विभाग के नए आदेश में स्पष्ट है कि किसी भी नए लाइसेंस, बिल्डिंग प्लान या लेआउट अप्रूवल से पहले पिछले पूरे एक साल की शेयरहोल्डिंग और बोर्ड संरचना की गहन जांच अनिवार्य होगी। यह कदम उस कमी पर रोक लगाएगा, जिसका फायदा उठाकर कई बड़ी कंपनियां मंजूरियां लेने के समय अस्थायी रूप से साफ दिखने लगती थीं। इस आदेश में 9 फरवरी, 2022 से पहले हुए ज्वाइंट डेवलपमेंट राइट्स (JDR) ट्रांसफर मामलों को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की गई है। सरकार ने इसलिए फैसला लंबे समय से विवादित ये मामले कई कॉलोनियों के विकास को रोक रहे थे। सरकार ने माना कि ऐसे प्रोजेक्ट, जहां मूल डेवलपर पर बकाया है, लेकिन जेडीआर होल्डर पर नहीं, मंजूरियां रुकी हुई थीं और यह कॉलोनियों के विकास में बाधा बन रहा था। वहां विभाग ने दो-टूक कहा है कि ज्वाइंट डेवलपमेंट राइट्स से जुड़े उन पुराने मामलों में कालोनी के बिल्डिंग प्लान, लेआउट अप्रूवल और रिन्यूअल आदि से जुड़ी आगे की मंजूरियां मिल जाएंगी। डेवलप हो पाएंगी पुरानी कालोनियां इससे कई ऐसी पुरानी कॉलोनियों को राहत मिलेगी, जो सिर्फ इसलिए अटक गई थी, क्योंकि मूल कंपनी पर भारी बकाया था, जबकि जमीन और डेवलपमेंट की जिम्मेदारी जेडीआर होल्डर उठा रहे थे। सरकार का बकाया वसूली पर जोर हरियाणा में पिछले कई वर्षों से अटकी हुई कॉलोनियां, अधूरी सड़के और इन्फ्रास्ट्रक्वर तथा ईडीसी और एसआईडीसी की मोटी बकाया राशि राज्य के लिए बड़ी समस्या रही है। अब डिफॉल्टर की श्रेणी से नहीं बच पाएंगी कंपनियां रियल एस्टेट उद्योग में यह आम बात रही है कि लाइसेंस लेने के समय कंपनियां अपने बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स को शेयरहोल्डिंग पैटर्न को या प्रभावी नियंत्रण को अस्थायी रूप से बदल देती थीं, ताकि वे ‘डिफॉल्टर की श्रेणी से बाहर दिखाई दें। मंजूरी मिलते ही वही डायरेक्टर फिर से बोर्ड में वापस आ जाते थे। टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग ने इसे नियमों की खुली अवहेलना माना है और इसे रोकने के लिए बेहद कठोर प्रावधान लागू किया है। एक साल का पुराना खंगाला जाएगा अब एक साल पुराना रिकार्ड जांचा जाएगा। आवेदन करने वाले दिन बोर्ड और उसके शेयर होल्डर की जांच होगी। साथ ही. पिछले 12 माह के रिकार्ड से इसकी तुलना होगी। यदि इन 12 महीनों में एक भी दिन ऐसा पाया गया कि कोई डायरेक्टर शेयरहोल्डर किसी अन्य प्रोजेक्ट या कंपनी में 20 करोड़ से अधिक बकाया के साथ डिफॉल्टर रहा तो उस डेवलपर का लाइसेंस बा मंजूरी आवेदन तुरंत खारिज कर दिया जाएगा।
हरियाणा में EDC-SIDC बकाया नियम बदले:20Cr से अधिक बकाए पर नहीं मिलेगा नया लाइसेंस; बिल्डिंग प्लान, लेआउट अप्रूवल से पहले शेयरहोल्डिंग जांच होगी
