यूपी में 594Km लंबा गंगा एक्सप्रेस-वे लगभग तैयार हो चुका है। अब फिनिशिंग चल रही है। PM मोदी इसका उद्धाटन कर सकते हैं। पश्चिमी यूपी को पूर्वांचल से जोड़ने वाले एक्सप्रेस-वे के शुरू होने के बाद मेरठ से प्रयागराज की दूरी सिर्फ 6 घंटे में पूरी हो जाएगी। अब तक 11-12 घंटे लगते हैं। कई मायनों में यह एक्सप्रेस-वे बेहद खास है। पब्लिक कन्वीनियंस सेंटर बनाए गए हैं। यहां सोने की जगह, इलाज के लिए ट्रामा सेंटर और फूड कोर्ट हैं। सड़क रंबल स्ट्रिप (सड़क पर उभरी हुई पट्टियां) बनाई गई हैं। इस पर गाड़ी का टायर जाते ही ड्राइवर वाइब्रेशन महसूस करने लगेगा। इससे एक्सीडेंट की आशंका कम हो जाएगी। एक्सप्रेस-वे पर फ्यूल स्टेशन बन गए हैं। टोल प्लाजा पर स्टाफ नजर आने लगा है। संकेतक भी लग चुके हैं। गाड़ियों की रफ्तार देखने के लिए स्पीडोमीटर भी एक्टिव कर दिए गए हैं। आपके एक्सप्रेस-वे पर रफ्तार भरने से पहले दैनिक भास्कर ने मेरठ से प्रयागराज तक यात्रा की। पढ़िए खास रिपोर्ट… गंगा नदी के पास के 12 जिलों से गुजरने की वजह से इसे गंगा एक्सप्रेस-वे नाम दिया गया है। मेरठ से करीब 7 किलोमीटर दूर हापुड़ बॉर्डर पर बसे बिजौली गांव से इसकी शुरुआत होती है। मेरठ को हरिद्वार, सहारनपुर, बुलंदशहर जैसे शहरों से जोड़ने वाला नेशनल हाईवे-334 भी यहां से गुजरता है। हमने भी अपने सफर की शुरुआत यहीं से की। बिजौली पहुंचकर देखा कि एक्सप्रेस-वे के एंट्री और एक्जिट पॉइंट्स बंद थे। वहां कुछ कर्मचारी मौजूद थे। उन्होंने बताया कि सिक्योरिटी के लिए ऐसा किया गया है, क्योंकि बाइकर स्टंट के लिए एक्सप्रेस-वे पर आने लगे थे। यहां कुछ दूर बाइक सवार नजर भी आए, हालांकि वो सिर्फ सफर करना चाहते थे। हमने उनसे बात की। मेरठ के रहने वाले रवि कुमार कहते हैं- पहले हमें गढ़मुक्तेश्वर (ब्रजघाट) के लिए दिल्ली हाईवे से होकर जाना पड़ता था। एक्सप्रेस-वे बनने के बाद कम समय में पहुंच जाएंगे। यहां स्टाफ ने हमें बताया कि हाई स्पीड एक्सप्रेस-वे पर सिर्फ कार और भारी वाहन ही चल सकते हैं, बाइक एक्सप्रेस-वे पर नहीं जा सकती। सड़क पर आते ही कार ने 110 किमी की रफ्तार पकड़ी
हमारी टीम ने यूपीडा के अधिकारियों से एक्सप्रेस-वे पर यात्रा के लिए अनुमति ली थी, इसलिए हमें एंट्री मिल गई। कार ने रफ्तार पकड़ी और चंद सेकेंड में 110 की स्पीड से दौड़ने लगी। आम पब्लिक के लिए बंद होने की वजह से सड़क पर सन्नाटा था। कुछ दूर चलकर मेरठ में ही हमें पहला टोल प्लाजा मिला। वहां रुककर हमने कर्मचारियों से बात की। उन्होंने बताया- एक्सप्रेस-वे पर 2 मेन टोल हैं। पहला- मेरठ, दूसरा- प्रयागराज में बनाया गया है। ये मुख्य टोल होंगे। इसके अलावा अन्य जिलों में एक्सप्रेस-वे के एंट्री और एग्जिट पॉइंट पर 15 रैंप टोल प्लाजा बनाए गए हैं। यहां से भी लोग एक्सप्रेस-वे पर टोल देने के बाद पहुंच सकेंगे। टोल की प्रस्तावित रेट भी तय हो चुके हैं। एक जैसी स्पीड से सुस्ती आती है, इसलिए स्ट्रिप बनाई गई
टोल क्रॉस करने के बाद हमारी कार ने फिर रफ्तार पकड़ी। करीब 20 किलोमीटर आगे निकलने के बाद हमने कार में कुछ अजीब-सा वाइब्रेशन और आवाज महसूस की। ड्राइवर से पूछा, तो उसने बताया कि जब भी सड़क के किनारे बनी सफेद पट्टी पर गाड़ी का टायर जाता है, तो वाइब्रेशन महसूस होता है। वो सफेद पट्टी ‘रंबल स्ट्रिप’ थी। ये स्ट्रिप ड्राइवर्स को नींद से जगाने के लिए बनाई जाती है। ये सुनने में थोड़ा अजीब जरूर लग सकता है, लेकिन सच है। दरअसल, एक्सप्रेस-वे पर लगातार एक ही स्पीड पर चलते रहने से ड्राइवर्स को सुस्ती आने लगती है। कई बार उनकी आंख तक लग जाती है। ऐसे में ड्राइवर्स को अलर्ट रखने के लिए रंबल स्ट्रिप बनाई गई है। जब भी कार का पहिया स्ट्रिप पर पड़ेगा, कार में वाइब्रेशन महसूस होगा। इससे ड्राइवर की नींद खुल जाएगी और एक्सिडेंट होने से बच जाएगा। रंबल स्ट्रिप मेरठ से प्रयागराज तक पूरे एक्सप्रेस-वे पर बनाई गई है। भारत पेट्रोलियम खुद ऑपरेटर कर रहा पेट्रोल पंप
गंगा एक्सप्रेस-वे को PPP मॉडल (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप) के तहत बनाया गया है। इसे 4 भागों में बांटकर बनाया गया है। मेरठ से बदायूं तक के पहले हिस्से को आइडियल रोड बिल्डर्स इंफ्रास्ट्रक्चर ने बनाया है। बदायूं से हरदोई तक दूसरे, हरदोई से उन्नाव तीसरे और उन्नाव से प्रयागराज तक चौथे हिस्से का काम अडाणी इंटरप्राइजेज ने किया है। इस लिहाज से एक्सप्रेस-वे का 75% काम अडाणी इंटरप्राइजेज ने किया है। 594 किलोमीटर के पूरे गंगा एक्सप्रेस-वे पर कुल 9 पब्लिक कंवीनियंस सेंटर बनाए गए हैं। यहां आपको पेट्रोल पंप, फूड प्लाजा, कैफेटेरिया, आराम करने के लिए डॉरमेट्री-होटल और किसी इमरजेंसी के लिए ट्रॉमा सेंटर भी मिलेगा। हर 75 किलोमीटर पर आपको पेट्रोल पंप मिलेंगे। ये यूपी का पहला ऐसा एक्सप्रेस-वे है, जहां आम जनता के लिए सड़क खुलने से पहले ही फ्यूल स्टेशन चालू कर दिए गए हैं। सभी पेट्रोल पंप भारत पेट्रोलियम (BPCL) के ‘कोको मॉडल’ पर चलाए जा रहे हैं। कोको का मतलब है- कंपनी ओंड, कंपनी ऑपरेटेड। ये पेट्रोल पंप डायरेक्टली BPCL ही चलाती है। होटल में चेकइन टाइम नहीं, घंटे के हिसाब से पेमेंट
फूड प्लाजा और कैफेटेरिया में खाने-पीने की चीजें किफायती दामों पर मिलने लगी हैं। ड्राइवरों और यात्रियों के लिए डॉरमेट्री भी बनाए गए हैं। चाहें तो होटल में कमरा भी ले सकते हैं। खास बात यह है कि आम होटलों की तरह यहां आपको पूरे 24 घंटे का पैसा नहीं देना होगा। सिर्फ उतने समय का पेमेंट करना है, जितनी देर के लिए आप कमरे में रुके थे। मतलब 5 घंटे रुकते हैं, तो सिर्फ 5 घंटे का ही भुगतान करना होगा। टोल प्लाजा के किनारे प्राइमरी हेल्थ सेंटर बनाए गए है। हेल्थ सेंटर पर मौजूद अटेंडेंट ऋषभ ने बताया- जैसे ही एक्सप्रेस-वे पर कोई एक्सिडेंट होगा, हमें पता चल जाएगा। हमारा टारगेट टाइम 20 मिनट का है। एंबुलेंस स्पॉट पर पहुंचने के बाद मरीज को ऑक्सीजन सिंलेडर, फर्स्ड एड से जुड़ी दवाईयां मिल सकेंगी। अगर वो सीरियस होता है, तो फिर हम उसको ट्रामा सेंटर में भर्ती कराएंगे। एंबुलेंस के अंदर जीवररक्षक उपकरण लगाए गए हैं। बदायूं में 720 मीटर लंबा पुल, बनाने की भी अलग कहानी
एक्सप्रेस-वे पर मिलने वाली सुविधाओं को समझते हुए हम बदायूं के आगे पहुंचे। यहां रामगंगा नदी पर 720 मीटर लंबा पुल दिखता है। एक्सप्रेस-वे पर मौजूद कुछ कर्मचारियों से बात करके समझ आया कि एक्सप्रेस-वे का करीब 92 किलोमीटर का हिस्सा बदायूं से गुजरता है। यहां रामगंगा नदी पर लंबे पुल को बनाना इंजीनियर्स के लिए बड़ा चैलेंज था। पुल को बनाने के दौरान नदी में कटान हो रहा था, इसलिए बहुत दिक्कत आई। हमें बताया गया कि जब पुल बनने की शुरुआत हुई थी, तब नदी का बहाव करीब 200 मीटर दूर थी। कुछ दिनों बाद नदी ने रास्ता बदल दिया और पुल के बगल का हिस्सा धारा में बह गया। इस वजह से कई दिनों तक पुल का काम रुका रहा। आखिरकार इंजीनियर्स ने धारा के बहाव को मोड़कर पिलर बनाए। इस पुल को बनाने में 122 करोड़ रुपए खर्च हुए। जलालाबाद में एयर स्ट्रिप, कई मायनों में खास
एक्सप्रेव-वे पर 242 किलोमीटर की दूरी तय करने के बाद अचानक सड़क कुछ चौड़ी हो जाती है। हमने लोकेशन चेक की, तो हम शाहजहांपुर के जलालाबाद कस्बे में एंट्री कर चुके थे। यहां 3.5 किमी की एयर स्ट्रिप बनाई गई है। इस एरिया में डिवाइडर भी अस्थाई बनाए गए हैं। ड्राइवर ने बताया कि युद्ध के समय ये अस्थाई डिवाइडर हटाकर इसको एयर स्ट्रिप की तरह इस्तेमाल किया जा सकेगा। यहां रात में भी फाइटर जेट उतर सकते हैं। वायुसेना ने 2 मई, 2025 को 16 विमानोंं की लैंडिंग और टेकऑफ प्रेक्टिस की थी। इनमें राफेल, सुखोई, मिराज-2000, मिग-29, जगुआर जैसे फाइटर प्लेट और हरक्यूलिस, AN-32 व Mi-17-V5 जैसे कार्गो विमान शामिल थे। विमान उतरने की दिन और रात की तस्वीरें देखिए- सटीक ऑपरेशन में मददगार 1. वॉर टाइम रनवे- गंगा एक्सप्रेस-वे को वॉर टाइम रनवे के रूप में तैयार किया गया है। नाइट लैंडिंग से वायुसेना अंधेरे में भी सटीक ऑपरेशन करने में सक्षम है। यूपी में वायुसेना के 7 एयरबेस हैं। किसी भी एयरबेस पर हमला होने पर गंगा एक्सप्रेस-वे ऑप्शनल रनवे के तौर पर काम कर सकता है। 2. स्ट्रैटेजिक लोकेशन- एयर स्ट्रिप बनाने के लिए शाहजहांपुर रणनीतिक रूप से अहम है। यहां से पाकिस्तान और चीन बॉर्डर तक तुरंत एयर सपोर्ट भेजा जा सकता है। 3. डिजास्टर मैनेजमेंट- प्राकृतिक आपदा की स्थिति में एक्सप्रेस-वे पर एयरक्राफ्ट और हेलिकॉप्टर उतारे जा सकेंगे। राहत सामग्री, दवाइयां और जवान तेजी से भेजे जा सकेंगे। गंगा एक्सप्रेस-वे के नीचे से गुजरता है NH-19 शाहजहांपुर से होते हुए हरदोई और उन्नाव के रास्ते हम रायबरेली पहुंचे। यहां लखनऊ-प्रयागराज हाईवे फोर लेन कर दिया गया है। इससे पहले यहां अक्सर जाम की स्थिति हो जाती थी। करीब 20 किलोमीटर आगे अयोध्या से चित्रकूट को जोड़ने वाला रामपथ भी बनकर तैयार है। दोपहर 1 बजे मेरठ से शुरू हुआ सफर शाम करीब 7 बजे प्रयागराज में खत्म होने वाला था। शहर से करीब 15 किलोमीटर पहले प्रयागराज-प्रतापगढ़ रोड पर शिवगढ़ होते हुए जूड़ापुर दांदू पहुंचे। यहां आकर गंगा एक्सप्रेस-वे खत्म होता है। दिल्ली को कोलकाता से जोड़ने वाला नेशनल हाईवे-19 यहां गंगा एक्सप्रेस-वे के नीचे से गुजरता है। जिसे प्रयागराज जाना होता है, वो यहीं से शहर के अंदर जा सकता है। वहीं, NH-19 के जरिए 2 घंटे में वाराणसी पहुंचा जा सकता है। वहीं, 160 किलोमीटर दूर अयोध्या भी है, ऐसे में ये एक्सप्रेस-वे धार्मिक टूरिज्म के हिसाब से भी बनाया गया है। 1Km एक्सप्रेस-वे बनाने में 62 करोड़ खर्च हुए
PM नरेंद्र मोदी ने 18 दिसंबर, 2021 को शाहजहांपुर में गंगा एक्सप्रेस-वे का शिलान्यास किया था। इसे बनाने में करीब 37 हजार 350 करोड़ रुपए की लागत आई है। इस लिहाज से 1 किलोमीटर एक्सप्रेस-वे की कीमत 62 करोड़ 87 लाख रुपए पड़ती है। वहीं, प्रयागराज से दिल्ली जाने के लिए लखनऊ आकर आगरा एक्सप्रेस-वे पकड़ने की जरूरत नहीं होगी। गंगा एक्सप्रेस-वे को आगे हरिद्वार तक बढ़ाने की प्लानिंग भी हो रही है। इसके अलावा मेरठ-प्रयागराज के बीच 10 जिलों (प्रतापगढ़, रायबरेली, उन्नाव, शाहजहांपुर, हरदोई, बदायूं, अमरोहा, संभल, बुलंदशहर और हापुड़) में भी कनेक्टिविटी बढ़ेगी। यूपी के सबसे लंबे एक्सप्रेस-वे जानिए 3 सेक्टर्स को बड़ा फायदा 1. रियल स्टेट- एक्सप्रेस-वे शुरू होने से कनेक्टिविटी बढ़ जाएगी। जमीन के रेट बढ़ेंगे। खासतौर पर आवासीय रियल स्टेट में तेजी से उछाल आएगा। 2. धार्मिक पर्यटन- प्रयागराज, वाराणसी, गढ़मुक्तेश्वर, हरिद्वार जैसी धार्मिक जगहों पर पहुंचना आसान होगा। अयोध्या जाने के लिए प्रतापगढ़ उतरकर पहुंचा जा सकेगा। 3. इंडस्ट्री- कनेक्टिविटी बढ़ने से छोटे शहरों तक कच्चा माल आसानी से पहुंचेगा। फैक्ट्रियां और उद्योग शुरू हो सकेंगे। साथ ही पहले से चल रहे दूसरे बिजनेस भी तेजी से बढ़ेंगे।
————————– ये खबर भी पढ़ें… यूपी के एक्सप्रेसवे पर सफर करना महंगा, 5 से 85 रुपए तक अधिक टोल देने होंगे; जानिए कहां कितने रेट बढ़े यूपी के एक्सप्रेसवे पर फर्राटा भरने वालों के लिए 1 अप्रैल 2026 सफर महंगा हो गया है। उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (UPEIDA) ने टोल की नए रेट लागू कर दिए हैं। आगरा-लखनऊ, पूर्वांचल या बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे के टोल पर 5 रुपए से 85 रुपए तक की बढ़ोत्तरी की गई है। पूरी खबर पढ़ें…
गंगा एक्सप्रेस-वे पर ड्राइवरों को नहीं आएगी झपकी:हर 75km पर सोने की जगह मिलेगी; मेरठ से 6 घंटे में पहुंचेंगे प्रयागराज
