सोनीपत में रेबीज से ड्राइवर की मौत:4 दिन से खाना-पीना छोड़ा; PGI में तोड़ा दम, मां बोलीं-डॉक्टरों ने एक इंजेक्शन देकर टाला

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सोनीपत जिले के टिकोला गांव में हेल्थ डिपार्टमेंट की कथित लापरवाही का एक बेहद दर्दनाक मामला सामने आया है, जहां एक मामूली कुत्ते के काटने की घटना ने इलाज में चूक के चलते एक 27 वर्षीय युवक की जान ले ली। परिजनों का आरोप है कि जैनपुर स्थित सरकारी डिस्पेंसरी में सही परामर्श और पूरी एंटी-रेबीज वैक्सीन नहीं दिए जाने के कारण युवक की हालत धीरे-धीरे बिगड़ती चली गई और रेबीज जैसी जानलेवा बीमारी ने उसकी जिंदगी छीन ली। इस घटना ने न केवल स्वास्थ्य सेवाओं की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता और जिम्मेदारी की कमी को भी उजागर किया है। टिकोला गांव की मुन्नी देवी ने बताया कि उसके बेटे रूपेंद्र को करीब दो महीने पहले गांव में ही एक कुत्ते ने पैर में काट लिया था। इसके बाद वह इलाज के लिए जैनपुर डिस्पेंसरी पहुंचा, जहां उसे केवल एक एंटी-रेबीज इंजेक्शन लगाकर वापस भेज दिया गया। परिजनों का आरोप है कि न तो उसे आगे के टीकों की जानकारी दी। और न ही समय पर अगला डोज लेने के लिए कहा गया। बोलीं- एक ही इंजेक्शन टाल दिया रूपेंद्र की मां का कहना है कि जब उन्होंने डिस्पेंसरी स्टाफ से दोबारा टीकाकरण के बारे में पूछा, तो उन्हें यह कहकर टाल दिया गया कि एक ही इंजेक्शन पर्याप्त है। इसी लापरवाही के चलते युवक को जरूरी वैक्सीन की पूरी श्रृंखला नहीं मिल सकी। रेबीज के लक्षण दिखने लगे, हालत बिगड़ती गई मृतक की मां मुन्नी देवी के अनुसार, पिछले चार-पांच दिनों से रूपेंद्र ने खाना-पीना लगभग छोड़ दिया था। उसकी हालत लगातार बिगड़ रही थी। एक वीडियो भी सामने आया है जिसमें उसे पानी पिलाने की कोशिश की जा रही है, लेकिन वह पानी से डर रहा था और पीने से इनकार कर रहा था। बार-बार गला सूखने के बावजूद पानी से डरना रेबीज का गंभीर लक्षण माना जाता है। पीजीआई में इलाज के दौरान मौत हालत बिगड़ने पर परिजन उसे सोनीपत नागरिक अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने रेबीज के लक्षण बताते हुए उसे तुरंत पीजीआई रोहतक रेफर कर दिया। वहां से उसे दिल्ली भेजा गया, लेकिन प्राथमिक उपचार के बाद वापस घर भेज दिया गया। अगले ही दिन हालत और गंभीर होने पर उसे फिर पीजीआई रोहतक ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। लोडर गाड़ी चलाकर था रूपेंद्र 27 वर्षीय रूपेंद्र अपने परिवार में सबसे छोटा था। वह लोडर गाड़ी चलाकर परिवार का पालन-पोषण करता था। उसकी असमय मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है और घर की आर्थिक स्थिति भी संकट में आ गई है। स्वास्थ्य विभाग पर लापरवाही के आरोप पीड़ित परिवार ने जैनपुर डिस्पेंसरी के कर्मचारियों पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि यदि समय पर सही इलाज और पूरी वैक्सीन दी जाती, तो रूपेंद्र की जान बचाई जा सकती थी। जांच के लिए टीम गठित, कार्रवाई का आश्वासन इस मामले पर सिविल सर्जन डॉ. ज्योत्सना ने कहा कि टिकोला गांव के युवक की रेबीज से मौत की सूचना मिली है। मामले की जांच के लिए टीम गठित कर दी गई है और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। विशेषज्ञों की चेतावनी: पूरी वैक्सीन लेना जरूरी मेडिकल विशेषज्ञों का कहना है कि कुत्ते के काटने के बाद एंटी-रेबीज वैक्सीन की पूरी श्रृंखला लेना बेहद जरूरी होता है। इसमें किसी भी तरह की लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है।