हरियाणा के अंबाला की डॉ. तन्वी के देहरादून में सुसाइड से पहले के 6 घंटे बेहद उदासी, तनाव और दर्द से गुजर रहे थे। असहनीय मानसिक कष्ट से गुजर रही डॉ. तन्वी ने जान देने के लिए पोटैशियम क्लोराइड (KCl) को कैनुला के जरिए सीधे नसों में उतारने का तरीका चुना। मेडिकल से जुड़े एक्सपर्ट का कहना है कि इस प्रक्रिया के चलते शरीर में पोटैशियम का स्तर खतरनाक रूप से बढ़ गया, जिससे हाइपोकैलेमिया की स्थिति बनी। ऐसे में हार्टबीट धीरे-धीरे बंद हो गई। तन्वी ने आखिरी बार अंबाला में अपने पिता डॉ. ललित मोहन को कॉल लगाई। पिता बताते हैं- वो बहुत परेशान थी। मैंने उसे समझाया भी, सब ठीक होगा, मैं आ रहा हूं। मगर, बेटी इंतजार न कर सकी। मरने से कुछ देर पहले तन्वी ने देहरादून में ही रह रही मां के मोबाइल पर मैसेज भी किया कि 12ः30 बजे तक घर पहुंच जाऊंगी। हालांकि वो कभी नहीं लौटी। रात 9 बजे पिता को कॉल करने से लेकर तड़के में ढाई बजे पिता के देहरादून पहुंचने तक के पांच-साढ़े 5 घंटे एक होनहार डॉक्टर की विदाई के लिए काफी थे। उधर, इस डॉ. तन्वी की एक ऑडियो और सामने आई है। इसमें वह एक घंटा लेट होने की सजा के तौर पर 7 दिन ड्यूटी से बाहर रखने का जिक्र रही है। कह रही हे कि यह तो नाइंसाफी है। वहीं, इस मामले में उत्तराखंड राज्य महिला आयोग की भी एंट्री हुई है। आयोग अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने मामले का स्वतः संज्ञान लिया है। उन्होंने पुलिस प्रशासन को निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। मौत यह तरीका चुनने से सब हैरान केस की जांच से जुड़े फॉरेंसिक विशेषज्ञों और पुलिस को शुरुआती जांच में घटनाक्रम की प्रकृति ने हैरान कर दिया। जांचकर्ताओं के अनुसार, डॉ. तन्वी ने मेडिकल साइंस का उपयोग करते हुए एक ऐसा तरीका अपनाया, जिससे उनके शरीर में पोटैशियम क्लोराइड (KCl) धीरे-धीरे प्रवेश करता रहा। एक सीनियर डॉक्टर के मुताबिक- एक डॉक्टर होने के नाते डॉ. तन्वी को इसके प्रभावों की पूरी जानकारी रही होगी। पोटैशियम क्लोराइड सामान्य तौर पर शरीर में पोटैशियम की कमी को दूर करने के लिए प्रयोग होता है। लेकिन अधिक मात्रा और सीधे नसों में जाने से यह हार्ट बीट को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है। अब जानिए…होनहार डॉक्टर ने आखिरी 5 घंटों में क्या किया वॉयस रिकॉर्डिंग का एक और अंश आया सामने… ललित मोहन ने मीडिया को करीब आधे घंटे का ऑडियो शेयर किया। उन्होंने बताया कि बेटी तन्वी ने वॉयस रिकॉर्डर से अपनी एचओडी डॉ. प्रियंका गुप्ता की बात रिकॉर्ड की थी, ताकि साबित कर सके कि कैसे उसे प्रताड़ित किया जा रहा था। इसका ऑडियो में 7 घंटे क्लास से बाहर रखने की सजा का जिक्र है। आरोपी HOD ने जमानत की तैयारी शुरू की इस सुसाइड मामले में आरोपी डॉक्टर डॉ. प्रियंका गुप्ता ने गिरफ्तारी से बचने के लिए अग्रिम जमानत (एंटीसिपेटरी बेल) की तैयारी शुरू कर दी है। जानकारी के अनुसार कॉलेज की जिस डॉक्टर पर आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप है, उसने सेशन कोर्ट में जमानत याचिका दाखिल करने के लिए वकील भी कर लिया है। बता दें कि मामले में पुलिस ने मृतक छात्रा के पिता की शिकायत पर आरोपी डॉक्टर प्रियंका के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 108 के तहत केस दर्ज किया है। कानून विशेषज्ञों के अनुसार इस धारा में अधिकतम 10 साल की सजा का प्रावधान है और पुलिस आरोपी की गिरफ्तारी कर सकती है, इसी वजह से आरोपी डॉक्टर ने पहले ही अग्रिम जमानत की तैयारी शुरू कर दी है। सूत्रों के मुताबिक, देहरादून पुलिस ने आरोपियों से पूछताछ शुरू कर दी है और जल्द गिरफ्तारी की तैयारी है। ———————– ये खबर भी पढ़ें…. लेडी डॉक्टर की रिकॉर्डिंग, जिसका खुलासा करना चाहती थी:अंबाला में पिता को कॉल कर बोलीं- ऑडियो भेजनी पड़ेगी; देहरादून में जहरीला इंजेक्शन लगा जान दी हरियाणा के अंबाला की डॉ. तन्वी के देहरादून में सुसाइड करने के मामले में एक ऑडियो रिकॉर्डिंग सामने आई है। चार महीने से परेशान चल रही डॉ. तन्वी ने अपनी हेड ऑफ द डिपार्टमेंट (HOD) से हुई बातचीत की एक वॉयस रिकॉर्डिंग की थी। मरने से पहले डॉ. तन्वी ने अंबाला में पिता ललित मोहन को फोन पर कहा था… बहुत परेशान हो गई हूं। (पूरी खबर पढ़ें)
डॉक्टर तन्वी ने लगाई थी पोटैशियम क्लोराइड की ड्रिप:इससे हार्टबीट धीरे-धीरे बंद होती, फिर जान जाती, देहरादून में मौत से पहले 6 घंटे की कहानी
