फरीदाबाद के सिविल अस्पताल में शुक्रवार देर शाम स्वास्थ्य विभाग के डायरेक्टर वीरेंद्र यादव अचानक निरीक्षण के लिए पहुंचे। बिना सूचना किए गए इस निरीक्षण के दौरान अस्पताल में फैली अव्यवस्थाओं और कई गंभीर खामियों को देखकर वह कमियों पर भड़कते और नाराज दिखाई दिए। निरीक्षण के दौरान उन्होंने सीएमओ और अन्य डॉक्टरों से बार-बार जवाब मांगा, लेकिन अधिकतर अधिकारी कोई स्पष्ट जवाब देने से बचते नजर आए। डायरेक्टर वीरेंद्र यादव ने अस्पताल की पहली, दूसरी और तीसरी मंजिल का बारीकी से निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने भर्ती मरीजों से बातचीत कर इलाज और सुविधाओं की जानकारी भी ली। लेबर वार्ड पहुंचने पर जब वह अंदर से निरीक्षण कर बाहर आए तो वहां जूते रखने के लिए लगाया गया शू-रैक टूटा हुआ मिला। इस पर वह नाराज हो गए। मौजूद डॉक्टरों ने बताया कि लेबर रूम में आने वाले परिजनों के जूते इसी रैक पर रखवाए जाते हैं। इस पर डायरेक्टर ने कहा कि यह रैक भी टूटा हुआ और अंडर रिपेयर हालत में है, क्या इतनी छोटी चीज के लिए भी पीडब्ल्यूडी का इंतजार किया जाएगा, यह बिल्कुल सही नहीं है।
बिजली सुपरवाइजर को फटकार लगाई इसके बाद डायरेक्टर ब्लड बैंक की ओर पहुंचे, जहां बाहर और आसपास अंधेरा पसरा हुआ था। ब्लड बैंक के बाहर लगा लाइट वाला साइन बोर्ड भी बंद मिला। इस स्थिति को देखकर वह और अधिक भड़क गए। उन्होंने ब्लड बैंक संचालक और अस्पताल परिसर के बिजली सुपरवाइजर को फटकार लगाई। उन्होंने कहा कि क्या एक खंभे की लाइट जलाने के लिए बिजली विभाग से कर्मचारी बुलाना पड़ेगा, इतना काम तो खुद भी किया जा सकता है। इस दौरान उन्होंने नाराजगी जताते हुए यहां तक कह दिया कि क्यों न लापरवाही बरतने वालों की तनख्वाह ही रोक दी जाए, तब शायद जिम्मेदारी का एहसास होगा। डायरेक्टर ने कहा कि अगर ब्लड बैंक के बाहर लाइट और साइन बोर्ड ही नहीं जलेंगे तो अस्पताल में आने वाले मरीजों और उनके परिजनों को कैसे पता चलेगा कि ब्लड बैंक कहां स्थित है। अंधेरे की वजह से लोग अस्पताल परिसर में भटकते रहेंगे, जो किसी भी हाल में स्वीकार्य नहीं है। परिसर में पार्क न बनाये जाने पर भी भड़के निरीक्षण के दौरान अस्पताल में मरीजों के बैठने की उचित व्यवस्था न होने और परिसर में पार्क न बनाये जाने पर भी डायरेक्टर कमियों पर भड़कते और नाराज दिखाई दिए। उन्होंने कहा कि सरकार अस्पताल की सुविधाएं सुधारने और व्यवस्थाएं बेहतर करने के लिए भारी भरकम बजट उपलब्ध करा रही है, इसके बावजूद जमीनी स्तर पर व्यवस्थाओं का दुरुस्त न होना बेहद चिंताजनक है। इसके बाद उन्होंने सीएमओ को अपने सामने बुलाकर सख्त निर्देश दिए कि अस्पताल के मुख्य गेट के बाहर और परिसर में ऐसी जगह एलईडी साइन बोर्ड लगाए जाएं, जिससे रात के समय भी लोगों को आसानी से पता चल सके कि ब्लड बैंक, सीटी स्कैन, मॉर्च्युरी और अन्य जरूरी विभाग कहां स्थित हैं। उन्होंने एम्बुलेंस विभाग के ऊपर भी बड़ा साइन बोर्ड लगाने और दीवारों पर दोनों तरफ यह लिखवाने के निर्देश दिए कि डायल 112 के माध्यम से भी एम्बुलेंस सेवा उपलब्ध है। सिविल सर्जन चुपचाप सुनते रहे पूरे निरीक्षण के दौरान सिविल सर्जन वीरेंद्र यादव की फटकार और नाराजगी को चुपचाप सुनते रहे और उन्होंने एक शब्द भी नहीं कहा। डायरेक्टर सिविल सर्जन के सामने ही अस्पताल की कमियों को गिनाते रहे। वहीं जब सिविल सर्जन डॉ. जयंत आहूजा से इन खामियों को लेकर बात की गई तो उन्होंने अधिकतर जिम्मेदारी पीडब्ल्यूडी और बीएंडआर विभाग पर डाल दी। उन्होंने बताया कि अस्पताल में रिनोवेशन का काम पीडब्ल्यूडी और बीएंडआर विभाग द्वारा किया जा रहा है। काम जल्द पूरा करने के लिए कई बार दोनों विभागों को पत्र भी लिखे गए हैं, लेकिन किन कारणों से काम में देरी हो रही है, इसकी जानकारी उन्हें नहीं है। डेढ़ घंटे तक बारीकी से की जांच निरीक्षण के बाद जब स्वास्थ्य विभाग के डायरेक्टर वीरेंद्र यादव से बातचीत की गई तो उन्होंने कहा कि इस तरह के औचक निरीक्षण लगातार चलते रहते हैं। उन्होंने बताया कि अस्पताल का स्टैंडर्ड सर्टिफिकेशन फिलहाल पेंडिंग है, क्योंकि यहां अभी सुधार और निर्माण कार्य चल रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि एक समय फरीदाबाद का यह नागरिक अस्पताल पूरे भारत और हरियाणा में स्टैंडर्ड सर्टिफिकेशन के मामले में तीसरे स्थान पर था, लेकिन अब कुछ खामियां सामने आई हैं। इन सभी कमियों को दूर करने के लिए निरीक्षण के दौरान एक-एक व्यवस्था को करीब डेढ़ घंटे तक बारीकी से देखा गया है और जल्द से जल्द सुधार करने के निर्देश दिए गए हैं
फरीदाबाद सिविल अस्पताल में डायरेक्टर का छापा:ब्लड बैंक के बाहर अंधेरा मिला, खामियां देखकर भड़के, चुपचाप सुनते रहे सिविल सर्जन
