मध्य प्रदेश की राजनीति, नौकरशाही और अन्य घटनाओं पर चुटीली और खरी बात का वीडियो (VIDEO) देखने के लिए ऊपर क्लिक करें। इन खबरों को आप पढ़ भी सकते हैं। ‘बात खरी है’ मंगलवार से रविवार तक हर सुबह 6 बजे से दैनिक भास्कर एप पर मिलेगा। मंच पर न बैठने की दिग्विजय की सौगंध टूटी
मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने करीब 10 महीने पहले ली गई कसम तोड़ दी। वे भोपाल में राहुल गांधी के मंच पर बैठे नजर आए। हालांकि, उनके बोलने की बारी नहीं आई। दिग्विजय सिंह ने अप्रैल 2025 में ग्वालियर में आयोजित ‘संविधान बचाओ रैली’ के दौरान मंच से कहा था कि मैं अब कांग्रेस या किसी भी मंच पर नहीं बैठूंगा। मैं नीचे बैठ जाऊंगा। बस इतना अनुरोध है कि जब बोलने का अवसर आए, तब मुझे बुला लिया जाए। कृपया मंच की लड़ाई को समाप्त कर दीजिए। इसके बाद कई मौकों पर दिग्विजय सिंह वाकई मंच पर नहीं दिखे और नीचे ही बैठे। लेकिन अब उनकी यह सौगंध टूट गई। राहुल गांधी के साथ मंच पर दिखने पर भाजपा ने उन पर निशाना साधा है। मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने कहा कि राजनीति में मंच और कुर्सी की लड़ाई अहम होती है। हर नेता की इच्छा मंच, सत्ता और कुर्सी की होती है। दिग्विजय सिंह भी इससे अलग नहीं हैं। वे घोषणा कर चुके थे तो फिर मंच पर क्यों बैठे। वैसे राजनीति में कसमें और वादे अक्सर बातें भर ही होते हैं। लेकिन दिग्विजय सिंह ने 2003 के चुनाव में कांग्रेस की हार के बाद 10 साल तक कोई पद न लेने की कसम ली थी, जिसे उन्होंने निभाया। इस बार मंच पर न बैठने की उनकी कसम कमजोर साबित हुई। राहुल गांधी की सभा का मंच रहा ‘हाउसफुल’
सबका साथ-सबका विकास… वैसे तो यह नारा भाजपा ने दिया है, लेकिन मंच पर बैठने की बात आए तो कांग्रेस इसका अक्षरशः पालन करती नजर आती है। भोपाल में राहुल गांधी की सभा के दौरान भी कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला। दरअसल, कांग्रेस ने इस सभा के लिए इतना बड़ा मंच बनाया था कि उस पर करीब 200 लोग बैठ सकें। सभा शुरू होते ही मंच पूरी तरह खचाखच भर गया। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी, दिग्विजय सिंह, जीतू पटवारी, उमंग सिंघार, अजय सिंह और अरुण यादव सहित कांग्रेस के सभी बड़े नेता, विधायक और संगठन से जुड़े पदाधिकारी मंच पर मौजूद थे। ‘नरेंद्र मोदी’ कहकर नारा लगवाया, फिर टोका
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भोपाल में ‘जय जवान, जय किसान’ का नारा लगवाया। इसके बाद उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर भी नारा लगवाया। खड़गे ने जैसे ही कहा- नरेंद्र मोदी… उन्होंने तुरंत लोगों की ओर देखकर कहा- अरे, सरेंडर मोदी बोलो भाई। इसके बाद लोग चर्चा करने लगे कि खड़गे ने ऐसा क्या सुन लिया कि उन्हें बीच में टोकना पड़ा। कहीं से ‘जिंदाबाद’ की आवाज तो नहीं आ गई? हालांकि, इसके बाद खड़गे ने दो बार फिर कहा- नरेंद्र मोदी… और भीड़ की ओर से जवाब आया- सरेंडर मोदी। इसके बाद खड़गे ने कहा- चलो, अब आगे चलते हैं। और अपना भाषण आगे बढ़ाया। उज्जैन में आयोजित ग्रामीण डाक सम्मेलन में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की गजब की जुगलबंदी देखने को मिली। दोनों मंच पर काफी देर तक आपस में बातचीत करते और ठहाके लगाते नजर आए। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने समाज में डाकिया की भूमिका का जिक्र किया। इस दौरान उन्हें अभिनेता राजेश खन्ना की एक फिल्म का गाना ‘डाकिया डाक लाया’ याद आ गया। सीएम यह भी बताने लगे कि उस फिल्म में राजेश खन्ना ने कैसी भूमिका निभाई थी। मुख्यमंत्री के बाद जब सिंधिया बोलने मंच पर आए, तो वे भी पीछे नहीं रहे। उन्होंने कहा कि उन्हें भी एक फिल्म याद आ रही है- ‘बॉर्डर’। फिर उन्होंने कहा कि उसका एक गाना था- ‘चिट्ठी आई है, आई है, चिट्ठी आई है’। हालांकि, सिंधिया जिस ‘बॉर्डर’ फिल्म का जिक्र कर रहे थे, उसमें यह गाना था ही नहीं। उस फिल्म का मशहूर गीत था- ‘संदेशे आते हैं, हमें तड़पाते हैं’। जबकि ‘चिट्ठी आई है’ गाना तो पंकज उधास ने फिल्म ‘नाम’ में गाया था। खैर, ये सारी बातें समाज में डाकिया की अहम भूमिका बताने के लिए कही गई थीं। शब्दों की अदला-बदली भले ही हो गई हो, लेकिन भावनाएं लोगों तक पहुंच गईं और इसी भाव में तालियां भी बज उठीं। ये भी पढ़ें –
सीएम का ही नाम भूल गए भाजपा कार्यकर्ता: चलती सभा में पिता को फोन, पटवारी ने पूछा आलू का भाव मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव अक्सर मंच पर अपने विधायक और मंत्रियों के नाम भूल जाते हैं। अब उनके साथ भी कुछ ऐसा ही हो गया। कार्यकर्ताओं ने उनके लिए ‘मोहन सिंह यादव – जिंदाबाद’ और ‘हमारा मुख्यमंत्री कैसा हो – मोहन सिंह यादव जैसा हो’ के नारे लगा दिए। जबकि सीएम अपने नाम में ‘सिंह’ नहीं लगाते हैं। पूरी खबर पढ़ें
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