एमपी के कई जिलों में घना कोहरा, विजिबिलिटी बेहद कम:दिल्ली रूट की ट्रेनें 5 घंटे तक लेट, उड़ानों पर भी असर

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मध्यप्रदेश में ठंड का असर लगातार बढ़ता जा रहा है। शुक्रवार सुबह भी प्रदेश के कई जिलों में घना कोहरा छाया रहा, जिससे दृश्यता काफी कम हो गई। ग्वालियर में गुरुवार रात से ही कोहरा बना हुआ है और शुक्रवार सुबह 9 बजे तक हालात नहीं सुधरे। बीते दिन यहां अधिकतम तापमान 24 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जिससे ठंड में अचानक बढ़ोतरी महसूस की गई। घने कोहरे का सबसे ज्यादा असर रीवा में देखने को मिला, जहां 50 मीटर के बाद कुछ भी साफ नजर नहीं आया। दतिया और सागर में दृश्यता 200 से 500 मीटर, जबकि ग्वालियर, सतना, जबलपुर और नौगांव में 500 से 1 हजार मीटर के बीच रही। इंदौर, मंडला और खजुराहो में विजिबिलिटी 1 से 2 किलोमीटर दर्ज की गई। भोपाल, उज्जैन, राजगढ़, दमोह और उमरिया में 2 से 4 किलोमीटर तक दृश्यता रही। राजधानी भोपाल में सुबह से ही कोहरे का असर बना रहा। शहर के कई इलाकों में दृश्यता कम रही, जिससे लोगों को सर्द हवाओं के साथ ठंड का ज्यादा अहसास हुआ। इंदौर का पारा 4.1 डिग्री, शिवपुरी सबसे ठंडा
गुरुवार-शुक्रवार की रात के न्यूनतम तापमान की बात करें तो इंदौर 4.1 डिग्री सेल्सियस के साथ बड़े शहरों में सबसे ठंडा रहा। वहीं प्रदेश में शिवपुरी सबसे ठंडा जिला रहा, जहां पारा 4 डिग्री तक गिर गया। राजगढ़ में 5 डिग्री, पचमढ़ी में 5.6, मलाजखंड में 6.8, रायसेन में 7.4 और मंडला में 7.7 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया। मौसम विभाग का अलर्ट
मौसम विभाग के अनुसार, आने वाले सात दिनों तक प्रदेश में इसी तरह का मौसम बना रहेगा। सुबह-शाम घना कोहरा छाने की संभावना है और ठंड का असर और तेज हो सकता है। लोगों को सतर्क रहने और आवश्यक सावधानियां बरतने की सलाह दी गई है। ट्रेनें 30 मिनट से लेकर 5 घंटे तक देरी से चल रही
कोहरे के कारण दिल्ली से इंदौर और भोपाल आने वाली ज्यादातर ट्रेनें 30 मिनट से लेकर 5 घंटे तक देरी से चल रही हैं। गुरुवार को पंजाब मेल, शताब्दी, झेलम एक्सप्रेस, सचखंड, मालवा, छत्तीसगढ़, कोल्हापुर एसएफ और मंगला लक्षद्वीप एक्सप्रेस समेत कई ट्रेनों पर असर पड़ा। ग्वालियर, जबलपुर और उज्जैन स्टेशनों पर आने वाली ट्रेनें भी देर से पहुंचीं। शुक्रवार सुबह भी कोहरे के चलते कई ट्रेनें अपने समय से लेट रहीं। फ्लाइट्स पर भी असर
भोपाल के राजा भोज एयरपोर्ट से दिल्ली, मुंबई, गोवा और बेंगलुरु जाने वाली फ्लाइट्स भी कोहरे से प्रभावित हुईं। गुरुवार को कई उड़ानें 20 मिनट से लेकर एक घंटे तक देरी से रवाना हुईं। क्या होती है जेट स्ट्रीम?
मौसम एक्सपर्ट की माने तो प्रदेश में ठंड बढ़ने की वजह खास वजह जेट स्ट्रीम भी है। यह जमीन से लगभग 12 किमी ऊंचाई पर चलने वाली तेज हवा है। इस बार रफ्तार 222 किमी प्रति घंटा तक पहुंच गई है। यह देश के उत्तरी हिस्से में सक्रिय है। पहाड़ों से आने वाली बर्फीली हवा के अलावा ये ऊंची हवा सर्दी बढ़ा रही है। उत्तर के मैदानी इलाकों से जब ठंडी हवा और पहाड़ी इलाकों से बर्फीली हवा हमारे यहां आती है, तब तेज ठंड पड़ती है। यह सब उत्तर भारत में पहुंचने वाले मौसमी सिस्टम वेस्टर्न डिस्टरबेंस के कारण होता है। ऐसे में यदि जेट स्ट्रीम भी बन जाए तो सर्दी दोगुनी हो जाती है। इस बार यही हो रहा है। नवंबर में रिकॉर्ड तोड़ चुकी है सर्दी
इस बार नवंबर में सर्दी रिकॉर्ड तोड़ चुकी है। भोपाल में लगातार 15 दिन तक शीतलहर चली। रिकॉर्ड के अनुसार, साल 1931 के बाद शीतलहर के यह सबसे ज्यादा दिन है। दूसरी ओर, 17 नवंबर की रात में पारा 5.2 डिग्री तक पहुंच गया, जो ओवरऑल रिकॉर्ड भी रहा। इससे पहले 30 नवंबर 1941 में तापमान 6.1 डिग्री रहा था। इंदौर में भी पारा 6.4 डिग्री ही रहा। यहां भी सीजन की सबसे सर्द रात रही। 25 साल में पहली बार पारा इतना लुढ़का।
ठंड के लिए दिसंबर-जनवरी खास
मौसम विभाग के अनुसार, जिस तरह मानसून के चार महीने (जून, जुलाई, अगस्त और सितंबर) में से दो महीने जुलाई-अगस्त महत्वपूर्ण रहते हैं और इन्हीं में 60 प्रतिशत या इससे अधिक बारिश हो जाती है, ठीक उसी तरह दिसंबर और जनवरी में कड़ाके की ठंड पड़ती है। इन्हीं दो महीने में प्रदेश में उत्तर भारत से सर्द हवाएं ज्यादा आती हैं। इसलिए टेम्प्रेचर में अच्छी-खासी गिरावट आती है। सर्द हवाएं भी चलती हैं। पिछले 10 साल के आंकड़े यही ट्रेंड बताते हैं। वेस्टर्न डिस्टरबेंस (पश्चिमी विक्षोभ) के एक्टिव होने से दिसंबर में मावठा भी गिरता है। इससे दिन में भी सर्दी का असर बढ़ जाता है। अब जानिए दिसंबर में कैसी रहेगी ठंड? मौसम का ट्रेंड देखें तो दिसंबर में स्ट्रॉन्ग वेस्टर्न डिस्टरबेंस आते हैं। वहीं, उत्तरी हवाएं आने से दिन-रात के तापमान में गिरावट होती है। इस बार भी यही अनुमान है। इन जिलों में सबसे ज्यादा सर्दी रहेगी 20-22 दिन चल सकती है कोल्ड वेव
मौसम एक्सपर्ट की मानें तो दिसंबर में प्रदेश के कई शहरों में कोल्ड वेव यानी सर्द हवाएं चलेंगी। जनवरी में यह 20 से 22 दिन तक चल सकती है। इसलिए रहेगा कड़ाके की ठंड का दौर ला नीना ने दिया ठंड को लंबा धक्का पहाड़ों पर जल्दी बर्फबारी, ठिठुरन बढ़ाई ठंडी हवाएं 25% ज्यादा अंदर तक घुसी पश्चिमी विक्षोभ का लगातार सक्रिय रहना MP के 5 बड़े शहरों में दिसंबर में ऐसा ट्रेंड भोपाल में 3.1 डिग्री रिकॉर्ड हो चुका टेम्प्रेचर
भोपाल में दिन-रात ठंड और बारिश का ट्रेंड रहा है। 10 में से पिछले 5 साल से भोपाल दिसंबर में भीग रहा है। आधा से पौन इंच तक बारिश हो गई। इस बार भी बारिश होने के आसार हैं। दिसंबर में ठंड की बात करें तो 11 दिसंबर 1966 की रात में पारा 3.1 डिग्री पहुंच गया था। यह अब तक का ओवरऑल रिकॉर्ड है। 3 साल पहले 2021 में पारा 3.4 डिग्री पहुंच चुका है। इंदौर में 5 से 8 डिग्री के बीच रहा है पारा
इंदौर में दिसंबर में रात का तापमान 5 से 8 डिग्री सेल्सियस के बीच रहता है। पिछले साल तापमान 8.6 डिग्री तक पहुंच गया था। 10 साल के आंकड़ों पर नजर डालें तो दिन में पारा 28 से 31 डिग्री के बीच ही रहता है। इस महीने इंदौर में बारिश भी होती है। पिछले 4 साल से बारिश हो रही है। 31 दिसंबर 2015 को दिन का सर्वाधिक तापमान 33 डिग्री दर्ज किया गया था। 27 दिसंबर 1936 की रात में टेम्प्रेचर 1.1 डिग्री रहा था। सर्वाधिक कुल मासिक बारिश वर्ष 1967 को 108.5 मिमी यानी 4.2 इंच हुई थी। 24 घंटे में सर्वाधिक 53 मिमी यानी 2.1 इंच बारिश 17 दिसंबर 2009 को हुई थी। ग्वालियर में सबसे ज्यादा सर्दी
ग्वालियर में दिन में गर्मी तो रात में ठंड रहती है। पिछले 10 साल में यहां अधिकतम तापमान 26.2 से 31.6 डिग्री तक रह चुका है। वहीं, रात में पारा 1.8 से 6.9 डिग्री दर्ज किया गया। 6 दिसंबर 2006 को दिन का तापमान 32.1 डिग्री सेल्सियस पहुंच चुका है। 26 दिसंबर 1961 को न्यूनतम तापमान 0.4 डिग्री पहुंचा था। वर्ष 1997 में कुल मासिक बारिश 106.6 मिमी यानी 4.1 इंच हुई थी। 24 घंटे में सर्वाधिक बारिश 13 दिसंबर 2013 को 32.1 मिमी यानी 1.2 इंच हुई थी। जबलपुर में तेज रहता है सर्दी का असर
जबलपुर में दिसंबर में बारिश होने का भी ट्रेंड है। 28 दिसंबर 1960 को दिन का तापमान 33.2 डिग्री पहुंच चुका है। 28 दिसंबर 1902 की रात में तापमान 0.6 डिग्री रहा था। यह ओवरऑल रिकॉर्ड है। वर्ष 1885 में सर्वाधिक मासिक बारिश 125 मिमी यानी 4.9 इंच हुई थी। 24 घंटे में सर्वाधिक बारिश का रिकॉर्ड 68.1 मिमी यानी 2.6 इंच 16 दिसंबर 1885 का है। उज्जैन में भी कड़ाके की ठंड
उज्जैन में दिन का औसत तापमान 28.2 डिग्री और रात में 9.4 डिग्री सेल्सियस है। इस महीने औसत 4.6 मिमी बारिश होती है। पिछले पांच साल से उज्जैन में दिसंबर में बारिश हो रही है। 18 दिसंबर 2002 को दिन में टेम्प्रेचर 34.9 डिग्री पहुंच चुका है। यह ओवरऑल रिकॉर्ड है। 28 दिसंबर 1968 और 29 दिसंबर 1983 को रात में पारा 0.5 डिग्री पहुंच चुका है। वर्ष 1997 में कुल मासिक बारिश 119.4 मिमी यानी 4.7 इंच बारिश हो चुकी है। 24 घंटे में सर्वाधिक बारिश की बात करें तो 11 दिसंबर 1967 को 35.3 मिमी यानी 1.3 इंच बारिश हुई थी।